आखिर पहले क्यों नही जागती सरकार


इन्हासमेंट के खिलाफ चल रहे आंदोलन की जीत, पहले होगी सही जांच
शुक्रवार सुबह धरनास्थल पर पहुंचकर धरना समाप्त करवाएंगे सरकार व पार्टी के प्रतिनिधि


हिसार : मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने इन्हासमेंट की समस्या से जूझ रहे हुडा सेक्टरवासियों को बड़ी राहत देते हुए समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने सही गणना न होने तक किसी प्लॉटधारक को नोटिस न देने तथा पूरे प्रदेश के सेक्टरवासियों को राहत देने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही हिसार में विधायक डा. कमल गुप्ता के आवास के समक्ष डाला गया पड़ाव शुक्रवार सुबह सरकार के प्रतिनिधि मौके पर आकर व सेक्टरवासियों को मुख्यमंत्री का आश्वासन देकर उठवाएंगे।
मुख्यमंत्री का यह ब्यान ऐसे समय मे आया हैं जब हिसार के सेक्टर निवासी वीरवार को विधायक कमल गुप्ता के निवास के बाहर धरना दे रहे थे. ऎसा नही हैं की सेक्टर निवासी आज तक चुप थे. लगभग माह पूर्व से इन्हासमेंट के खिलाफ उठ रही आवाज के प्रति उसमें से किसी के कान पर जूँ तक नही रेंग रही थी जिनकी आज पीथ थपथपाई जा रही हैं. आपको बता दे की भाजपा जिला प्रधान सुरेन्द्र पूनिया ने सेक्टर पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री से मिलवाया।
मुख्यमंत्री से मिलने वालों में जिला आरडब्ल्यूए प्रधान दलबीर किरमारा, सेक्टर 16-17 प्रधान जितेन्द्र श्योराण, डा. किताब सिंह पूनिया, डीपी ढुल, कुलदीप वत्स, सुभाष जैन व कर्नल चन्द्र रेड्डू शामिल थे। सेक्टर पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि हिसार में पिछले पिछले 28 दिनों से धरना, प्रदर्शन व आंदोलन चल रहा है जो हुडा विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा की गई गलत गणना की देन है। यदि इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो विभाग के अधिकारियों का बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के साथ अन्याय न हो, इसलिए पहले सही आंकलन किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल हिसार ही नहीं बल्कि वे पूरे प्रदेश को एक नजर से देखते हैं और यह पूरे प्रदेश के सेक्टरवासियों की समस्या है, इसलिए इसका समाधान अवश्य होगा।


देश व प्रदेश के व्यापारी व उद्योगपति नुकसान में : बजरंग दास गर्ग


श्री गर्ग ने कहा की गेहू खरीद को शुरू हुए हरियाणा में 15 दिन बितने के बावजूद भी गेहू खरीद के लिए सरकारी अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए किसान व आढ़तियों को नाजायज तंग करते है अगर किसी अधिकारी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए गेहू खरीद में देरी की तो मंडी बंद करके उस अधिकारी के खिलाफ व्यापार मंडल मोर्चा खोल देगा। प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में गेहू उठान के ठेके सरकारी अधिकारियों द्धारा अपने निजी स्वार्थ के लिए अपने चहेतो को अनाप शनाप रेटों में दे कर हरियाणा सरकार को करोड़ो रूपए का चुना लगाने का काम किया है।


नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग किसी टेरेरिस्ट से कम नहीं : साहा


साजिश के तहत पब्लिक सेक्टर बैंकों को खत्म करना चाहती है सरकार

हिसार 14 अप्रैल : वर्तमान सरकार एक साजिश के तहत पब्लिक सेक्टर बैंकों को खत्म करना चाहती है। बैंकिंग सेक्टर के लिए पिछले चार सालों में किये गये बदलावों के चलते बैंकिंग सेक्टर आज ऐसी स्थिति में पहुंच गया है कि सरकार खराब स्थिति होने पर बैंकों को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में ले जाएगी और प्राइवेट प्लेयर बोली लगाकर उसे खरीद सकेगा। वर्तमान सरकार में आरबीआई ने बैंकों के लोन रिस्ट्रक्चर के लिए लागू की गयी सभी योजनाओं को बंद कर दिया है, जिसमें सीडीआर, एसडीआर, जेएलएफ आदि योजनाएं हैं। ये कहना है आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फ्रडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और आल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईपीएनबीओए) के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड दिलीप साहा का। वह हिसार में एआईपीएनबीओए हिसार सर्कल की त्रिवार्षिक कान्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लेने आये हुए थे। इस कान्फ्रेंस में लगभग 300 बैंक अधिकारियों ने भाग लिया।
यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में कुल 10 लाख करोड़ रुपये का एनपीए है और इनमें से 40 उद्यौगिक घरानों के ही 4.5 लाख करोड़ रुपये एनपीए है। सरकार को एक ऐसा क्रिमिनल कानून बनाना चाहिए जिसमें विलफुल डिफाल्डर्स के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो। उन पर एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तार किया जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार विलफुल डिफाल्टर को बचा रही है तो उन्होंने कहा कि यदि सरकार उन्हें बचा नहीं रही तो कोई सख्ता काननू भी नहीं बना रही।
नीरव मोदी स्कैम के बारे में कामरेड साहा ने कहा कि नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग आर्थिक अपराध कर रहे हैं वो किसी टेरेरिस्ट से कम नहीं हैं। ऐसे इकोनोमिक्स टेरेरिस्ट को ढूंढकर उन्हें सजा दी जानी चाहिए ताकि दूसरों को सीख मिले। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से पहले ही ऐसे लोगों का देश से बाहर भाग जाना संयोग नहीं हो सकता। साहा ने कहा कि इस स्कैम में यदि बैंक का कोई अधिकारी शामिल रहा है तो ये काफी शर्मनाक है और उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। 


चेयरमैन की दुकान में अवैध निर्माण पर आखिर प्रशासन क्यों है मौन


फेस-3 में अवैध निर्माण के सम्बंध में मुख्यमंत्री से मिलेगी बाबा विश्वकर्मा समिति 

हिसार। बाबा विश्वकर्मा समिति के पदाधिकारियों की बैठक समिति कार्यालय में हुई जिसमें व्यापार एवं व्यवसाय कुंज फेस-3 की मुख्य ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा हुई और विशेषकर फेस-3 में फुटपाथ तोड़कर उसके नीचे बनाई बेसमेंट पर चर्चा हुई। समिति के पदाधिकारियों ने प्रशासन के लचीले रवैये पर रोष प्रकट किया। आरोप लगाया गया कि यह दुकान भाजपा से जुड़े नेता एवं चेयरमैन की है और इसी दबाव में प्रशासन ने अब तक कोई कार्यवाही न करके उक्त नेता को खुली छूट दी हुई है। सरकारी जमीन पर कब्जे के बाद भी उक्त नेता की न तो दुकान का अवैध निर्माण सील किया गया है और न ही उक्त नेता के खिलाफ कोई कार्यवाही की गई है। समिति के प्रधान ओमपाल सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में बाबा विश्वकर्मा समिति ने आरटीआई के माध्यम से नगर निगम से जानकारी मांगी है कि उक्त नेता ने फुटपाथ के नीचे बनी दीवार हटाई है या नहीं, फुटपाथ का कब्जा छोड़ा है या नहीं, प्रशासन कोई कार्यवाही उक्त नेता के खिलाफ करेगा या नहीं, फुटपाथ खोदकर जो मिट्टी का प्रयोग किया गया, उसकी भरपाई उक्त नेता से की जाएगी या नहीं, भाजपा नेता के विरुद्ध अवैध निर्माण करने पर क्या कार्यवाही बनती है। आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी मांगी गई है। 
समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अगर प्रशासन इस अवैध निर्माण को सील नहीं करता तो समिति का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर उक्त नेता की कारगुजारी उनके सम्मुख रखेगा। उक्त नेता के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेगा। जब तक सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को सील नहीं किया जाता तब तक बाबा विश्वकर्मा समिति चुप नहीं बैठेगी।


जब भाजपा का उपवास..., उपहास सा लगने लगा


अधिकतर पदाधिकारी रहे दूर, आए वो कुछ देर में चलते बने, कुछ पहुंचे मात्र औपचारिकता निभाने


हिसार। कांग्रेस पर संसद न चलने देने का आरोप लगाते हुए देशभर में भाजपा के आह्वान पर किये गए उपवास का भाजपाइयों ने ही मजाक बना डाला। उपवास कार्यक्रम से पार्टी के अधिकतर पदाधिकारी ही दूर रहे वहीं अधिकतर नेता मौके
पर आकर औपचारिकता निभाकर जाते रहे। यही नहीं, जिले में विभिन्न विभागों, बोर्डों व निगमों के सात चेयरमैनों में से केवल एक चेयरमैन ही उपवास में नजर आए वहीं अन्य बड़े नेता भी कन्नी काटते नजर आए।
भाजपा के राष्ट्रीय आह्वान पर उपवास कार्यक्रम रखा गया था। हिसार में अग्रसेन चौक के उसी पार्क को भाजपा ने उपवास स्थल चुना, जिसमें कांग्रेसियों ने उपवास किया था। भाजपाइयों का उपवास कार्यक्रम भी कांग्रेसियों से कम नहीं रहा। जिस तरह कांग्रेसियों का उपवास कार्यक्रम मजाक बनकर रह गया वहीं भाजपा भी इससे अछूती नहीं रही। भाजपा के अधिकतर पदाधिकारी ही इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे, एक प्रदेशस्तरीय नेता लगभग दो बजे इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उक्त नेता के बारे में प्रसिद्ध है कि वह हर कार्यक्रम में देरी से पहुंचकर केवल बैठने के लिए सीट हथियाने के प्रयास में रहता है। बताया जाता है कि उक्त नेताजी को उपवास कार्यक्रम की जानकारी भी नहीं थी और उन्हें अपने मीडिया प्रभारी के माध्यम से उपवास कार्यक्रम की जानकारी मिली थी। हुआ यूं कि उक्त नेताजी के मीडिया प्रभारी किसी तरह पत्रकारों को मिल गये और जब पत्रकारों ने उससे पूछा की नेताजी उपवास में हैं क्या, तो मीडिया प्रभारी का कहना था कि किस बात का उपवास, आज पार्टी का कोई कार्यक्रम है क्या? इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से पूरी जानकारी लेकर अपने आका को फोन किया और उपवास कार्यक्रम में जाने की सलाह दी, जिस पर उक्त नेताजी लगभग दो बजे इस कार्यक्रम में पहुंचे और अपनी हाजिरी लगवाई। 
पार्टी के इस उपवास कार्यक्रम से कुछेक को छोड़कर अधिकतर पदाधिकारी ही दूर रहे। पार्टी आए दिन नई नियुक्तियों की घोषणा करती है लेकिन नई नियुक्तियों वाले तो दूर, पुराने पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी पार्टी जुटा नहीं पाई और हालत यह हो गई कि निर्धारित पार्क भरना तो दूर, चौथाई हिस्से में बैठकर सत्तारूढ़ भाजपाइयों को कांग्रेस पर हमले करने पड़े।


कागजों में ही दौड़ कर लाखों का डीजल पी गई उपायुक्त की कार


3 वर्षों तक सिर्फ कागजों में दौड़ती रही डीसी साहब की इनोवा
हिसार (राजेश्वर बैनीवाल)। प्रदेश की मनोहर सरकार भले ही सिस्टम को भ्रष्टाचार मुक्त करने के दावे करती नहीं थकती, लेकिन उसी सरकार के सिस्टम को सरकार के ही अधिकारी
भ्रष्टाचार से खोखला करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला फतेहाबाद की जिला आईटी सोसाइटी का है। जिला आईटी सोसाइटी (डीआईटीएस) का काम जिले के बीपीएल परिवारों और पंचायतों को डिजीटल साक्षर करने का था, लेकिन वो अपने भारी-भरकम फंड को इधर-उधर एडजस्ट करने में ही लगी रही। जिला आईटी सोसाइटी की पिछले तीन साल की आडिट रिपोर्ट में तो यही खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री तक शिकायत जाने के बाद मामले की जांच विजीलेंस को सौंपी गई है।
आडिट रिपोर्ट की मानें तो फतेहाबाद जिले में तीन वित्त वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 तक जितने भी डीसी आए, वो लगातार तीन वर्षों तक रोजाना 120 किलोमीटर इनोवा गाड़ी में घूमते रहे। इतना ही नहीं इन तीन वर्षों में आए सरकारी अवकाश और उनके निजी अवकाशों के दौरान भी ये इनोवा गाड़ी सड़कों पर दौड़ती रही। हां, ये बात अलग है कि जिले के किसी भी डीसी को स्थानीय लोगों या अधिकारियों ने इनोवा गाड़ी में निरीक्षण आदि पर जाते नहीं देखा। इसका सीधा सा मतलब है कि उनके लिए डीआईटीएस की इनोवा गाड़ी कागजों में ही दौड़ती रही और तीन साल में डीजल बिल की आड़ में सात लाख रुपए को ठिकाने लगा दिया गया।
हैरानी तो इस बात की है कि पिछले तीन साल में लगातार वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बावजूद इस गड़बड़झाले को रोकने का किसी ने प्रयास तक नहीं किया। और तो और आडिट रिपोर्ट में भी इन अनियमितताओं को अनदेखा किया जाता रहा। पिछले तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट में जो सामने आया है, उसकी जानकारी देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट सुशील बिश्नोई ने बताया कि वित्त वर्ष 2014 से लेकर 2017 तक डीसी की इनोवा गाड़ी पर सात लाख का डीजल एवं रिपेयरिंग खर्च आया है। हैरानी की बात तो ये है कि पिछले एक साल में जिला आईटी सोसाइटी ने एक भी पंचायत को डिजीटल साक्षर करने के लिए एक कैंप तक नहीं लगाया।
जानकारी के अनुसार फतेहाबाद जिले में दो-तीन साल में अलग-अलग उपायुक्त कार्यरत रहे लेकिन एनके सोलंकी ही इन तीन सालों में अधिकतर समय फतेहाबाद के उपायुक्त पद पर रहे। मीडिया ने जब पूर्व डीसी सोलंकी से इस संदर्भ में बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिया और फोन काट दिया। हालांकि जिला आईटी सोसाइटी के पिछले तीन साल के आडिट रिपोर्ट की एक प्रति भी है। ये इनोवा गाड़ी फिलहाल डीसी फतेहाबाद के निवास पर बने गैराज में बंद शटर के पार खड़ी है।
विजीलेंस को दी जांच : सुशील
एडवोकेट सुशील बिश्नोई के अनुसार उन्होंने पूरे गड़बड़झाले की शिकायत मुख्यमंत्री मनोहर लाल को की थी। मुख्यमंत्री ने शिकायत का अध्ययन करवाकर मामले की जांच का आश्वासन दिया था। अब उन्हें पता चला है कि मामले की जांच विजीलेंस को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सके।


हमाम में सभी नंगे है


राष्ट्रीय: अक्सर सुनने में आता था की राजनीति गंदी हो चुकी है. यह सुन मैं अचरज में पड़ जाता की आखिर राजनीति गंदी कैसे हो सकती है. क्योंकि राजनीति में आने वाला हर नेता तो सफ़ेद कुर्ता-पजामा पहनता है. यहाँ तक की सफ़ेद टोपी भी उसके सिर पर होती है. अगर राजनीति गंदी होती तो नेता सफ़ेद कुर्ता-पजामा नहीं पहनते, जबकि नेता तो अपने परिधान पर दाग तक नहीं लगने देते. फिर मैं यह सोच कर चुप हो जाता की शायद सभी मजाक कर रहे है. समय गुजरता गया और पता चलता गया की कभी वोटों के नाम पर तो कभी नोटों के नाम पर, कभी कुर्सी के लिए तो कभी सत्ता सुख के लिए नेता-राजनेता राजनीति को गंदा किये रखते है.
आज समय यह है की एक बार वोट क्या मिले की नेताओं को नोट दिखने लगते है और एक बार कुर्सी क्या मिली की सत्ता सुख का सभी आनंद लेना चाहता है. और जब सत्ता सुख मिल ही गया तो फिर भला उनके कुर्ता-पजामा पर दाग लगे या राजनीति गंदी हो किसी को क्या परवाह. फिर किसी नेता को अपना जमीर बेचना पड़े या जनता की आशाओं को दरकिनार. बस सब कुछ राजनीतिक सा लगने लगता है. अब हाल ही में हुए सैक्स स्कैंडलों को ही देख लो. इन स्कैंडलों के कारण राजनीति में जो भूचाल आया उस पर राजनीति करने से ना भाजपा बाज आ रही है और ना ही कांग्रेस पीछे हटने का नाम ले रही है.
बावजूद इसके आज कांग्रेस दावा करती है की देश में विकास उन्ही की सरकार करवा रही है तो भाजपा कहती है स्वच्छ छवि की सरकार वो ही दे सकती है. जबकि आज यह कहना बड़ा मुश्किल सा लगता है की विकास कौन करवा रहा है और स्वच्छ कौन है. क्योंकि राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मंत्री मदेरणा के कारण जहाँ भंवरी देवी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा वहीँ कर्नाटक विधानसभा में भाजपा विधयाकों द्वारा ब्लू फिल्म देखना भी भाजपा की स्वच्छता को दर्शाता है. इन दोनों ही प्रकरण की मजेदार बात यह है की दोनों ही राजनीतिक दल अपनी-अपनी करतूत भूल कर आज एक-दूसरे की टांग खिंच रहे है. 
अभी बात हो रही थी राजनीति के गंदा होने की. लेकिन लगता है की आज इसकी भी परिभाषा भी बदल चुकी है. क्योंकि जिस तरह से एक के बाद एक राजनीतिक दल व् नेता कभी धन को लेकर तो कभी भ्रष्टाचार को लेकर, कभी बाहुबल को लेकर तो कभी सैक्स स्कैंडल को लेकर लपेटे में आ रहे है उसे देख तो यही लगने लगा है की आज ना सिर्फ राजनीति गंदी हो चुकी है बल्कि इस हमाम में सभी नंगे है. बावजूद इसके आज गुफ्तगू यह हो रही है की कर्नाटक विधानसभा में हुए प्रकरण पर जो कांग्रेस आज शोर मचा रही है उसी कांग्रेस शासित राजस्थान में तो एक मंत्री से लेकर कितनों ने ही एक महिला को....


कुर्सी के लिए खुले आम रिश्वत


देश: बीते वर्ष में जनता देश में फैले भ्रष्टाचार को ख़त्म करने व् विदेशों में जमा हमारा अरबों-खरबों रुपया वापिस लाने के लिए लड़ती रही. जन लोकपाल बिल के लिए तरसती रही. लेकिन किसी को कुछ नहीं मिला. भला मिलता भी कैसे. क्योंकि जिस देश में कुर्सी के लिए ही रिश्वत चलती हो वहां भला जनता की कौन सुनेगा. भारत के नेताओं को तो बस कुर्सी चाहिए फिर चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े, कुछ ही कहना पड़े. बात चल रही थी कुर्सी के लिए रिश्वत की. तो जैसा की सभी जानते है की आगामी महीनों में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है. इसके लिए सभी राजनीतिक दल कमर कस चुके है.
कोई वादों की झड़ी लगा रहा है तो कोई सब्जबाग दिखा कर जनता का वोट हथियाना चाहता है. जिनको इतने भर से भी जीत की उम्मीद नहीं है वो तो जनता को खुलेआम रिश्वत देने तक पर उतर आया है. रिश्वत भी थोड़ी बहुत नहीं अपितु पूरे एक लैपटाप की. अब देखो न उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह ने जीतने के पश्चात जनता को फ्री में लैपटाप देने का वादा किया है तो पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पुत्र सुखबीर बादल ने भी जीत की ख़ुशी में जनता को फ्री लैपटाप देने की हामी भर दी है. ऐसे में गुफ्तगू होना लाजमी था की अब तो कुर्सी के लिए भी खुलेआम रिश्वत चलने लगी है.


नया वर्ष - नए सपने - नई दुआए


हर वर्ष की भाँती इस वर्ष भी नया साल नए आगाज के साथ हमारे सामने है. लेकिन गुफ्तगू का विषय यह है की बीता वर्ष सभी के लिए कैसा रहा. कोई कहेगा की ठीक है यार जैसा था बीत गया तो कोई कहेगा की पता ही नहीं चला की एक साल कैसे बीत गया. सब अपना-अपना तर्क देने के बाद फिर से अपने काम में जुट जाते है. लेकिन आओ आज नई दुआओं के साथ नववर्ष में नए सपने संजोते हुए हम कामना करे की जो कुछ बीते वर्ष में हमको झेलना पड़ा, नए साल में हमको उससे मुक्ति मिले और जो हमको अच्छा मिला उसमे वृद्धि हो. दिली तमन्ना है की बीता साल सभी के लिए सुखद रहा हो. इतना जरुर है की बीते वर्ष में अनेक लेखे-जोखे और घटनाक्रम समय-समय पर समाचार पत्र-पत्रिकाओ की सुर्खिया बने रहे.
जहाँ पूरे साल एक के बाद एक भ्रष्टाचार के खुलासों ने आम जनता के नाक में दम किये रखा वहीँ भारत का क्रिकेट विश्वकप जीतना दिल को सुकून देने वाला था. देश में बढती महंगाई के साथ-साथ पैट्रोल के दामों ने जहाँ आग में घी डालने का काम किया वहीँ दुनिया में आई आर्थिक मंदी ने लोगों की धड़कने तेज किये रखी. इन सबके साथ-साथ वर्ष भर राजनीति भी खूब हावी रही. कभी कलमाड़ी, कभी ए राजा तो कभी कनिमोड़ी के मुद्दे पर राजनीति में घमासान मचा रहा तो काले धन पर बाबा रामदेव, भ्रष्टाचार पर स्वामी अग्निवेश तो लोकपाल बिल पर अन्ना हजारे के अनशन ने सरकार की नाक में दम किये रखा. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए चुनावों के कारण भी राजनीति में अस्थिरता का माहौल रहा.
हिसार भी बीते वर्ष के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाने में कामयाब रहा. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की मृत्यु जहाँ दुखद रही वहीँ कुलदीप बिश्नोई का भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे गया. इतना ही नहीं हिसार लोकसभा उपचुनाव में अन्ना हजारे का कांग्रेस के खिलाफ प्रचार हिसार के नाम को बुलंदियों पर ले गया वहीँ इस सीट को जीतने के लिए मुख्यमंत्री हुड्डा और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के सभी साम-दाम-दंड-भेद को धत्ता बताते हुए कुलदीप बिश्नोई यह चुनाव जीतने में सफल हुए. जीत का जश्न समाप्त होता की आदमपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई विजयी हुई. उधर जनता गैस और बिजली के लिए त्राहि-त्राहि करती रही.
अब बहुत हुआ, आओ दुआ करे
जो कुछ मैंने लिखा ऐसा नहीं है की आप पहली बार पढ़ रहे है. मेरा तो उद्देश्य ही यही है की मैं समाचारों के दूसरे पहलू को आपके सामने रख सकूँ. लेकिन जरुरत है तो सिर्फ जन जागरण की, सोचने की और सोच कर विचार करने की क्या इन हालातों में हम चैन की सांस ले सकते है. क्या हमारा देश आगे बढ़ सकता है. अगर नहीं तो आइये सब मिल कर नववर्ष में दुआ करे की महंगाई, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता व् राजनीति में परिवारवाद जड़ से ख़त्म हो. आने वाला साल राजनीति से मुक्त वर्ष हो और देश में लोकपाल बिल आये जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके ताकि हर इंसान का चेहरा खिला-खिला रहे.


मुंह चिढाता परिवारवाद


आज राजनीति में बने रहने के लिए सबसे ज्यादा जरुरत पड़ती है तो मुद्दों की. अगर आज किसी पार्टी व् नेता के पास मुद्दा नहीं है तो समझो राजनीति ख़त्म. लेकिन लगता है की आज देश के किसी भी राजनितिक दल व् नेता के पास जनहित के लिए तो दूर जनता को बताने व् समझाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है. यही कारण है की कहीं ना कहीं जाकर जनसभाओ, चुनावी दौरों व् पत्रकारवार्ताओं में बिजली और पानी ही एक ऐसा मुद्दा बचा है जिस पर नेता खुल कर भाषण दे सकते है. इसके अतिरिक्त अगर जनता को आज कोई मुद्दा लुभा रहा है तो वो है भ्रष्टाचार. भले ही जनता राजनीति व् नेताओ को रात-दिन कोसती हो लेकिन भ्रष्टाचार का मुद्दा आते ही उसको वहीँ नेता अच्छा लगता है जो भ्रष्टाचार पर लम्बा-चौड़ा भाषण दे रहा है.
इतने से भी अगर नेताओ का पेट नहीं भरता और उसको लगता है की अन्य राजनितिक दल व् नेता पर कटाक्ष करना अभी बाकी है तो मुद्दा बचता है परिवारवाद का. ऐसे में वह यह बात भूल जाता है की उसकी पार्टी में या स्वयं उसने राजनीति में भले ही परिवारवाद को कितना ही बढ़ावा दिया हो उसका कोई जिक्र नहीं लेकिन दूसरों ने क्या किया इसका कोरा चिठठा खोलने से आज कोई भी नेता एक- दूसरे से पीछे नहीं रहना चाहता. मजेदार बात तो यह है की आज हर राजनीतिक दल में परिवारवाद है और हर नेता इसको बढ़ावा देने में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है. फिर भले ही वह गांधी परिवार हो या हरियाणा की राजनीति के सरताज तीनो लाल परिवार. जबकि आज प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा भी इससे अछूते नहीं है.
जबकि देश के अन्य प्रदेशों की बात की जाए तो ऐसे नामों की एक लम्बी फेहरिस्त है जिन्होंने राजनीति में परिवारवाद को बढ़ावा देने में अपना भरपूर सहयोग दिया है. फिर भले ही वो मुख्यमंत्री, मंत्री, नेता या राजनेता ही क्यों ना हो. इसके पीछे सबके अपने-अपने तर्क भी हो सकते है. कोई कहेगा की बेटा बाप की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है तो कोई कहेगा की जनता की भावना के अनुरूप किसी नेता के पुत्र-पुत्री व् पत्नी को चुनाव की टिकट दी गई है. जबकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता की राजनीतिक दल किसी नेता की मृत्युपरांत उसके परिवार के किसी जन को चुनावी मैदान में उतर कर जनता के वोट पाना चाहता है. बावजूद इसके आज राजनीति में बढ़ता परिवारवाद नेताओं का मुंह चिढ़ा रहा है.
अब आदमपुर व् रतिया विधानसभा उपचुनाव को ही देख लो. दोनों ही चुनाव में परिवारवाद इस कदर हावी है की किसी भी नेता से कुछ बोलते नहीं बन रहा है. हिसार के सांसद व् पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की मृत्युपरांत रिक्त हुई हिसार लोकसभा सिट के उपचुनाव में आदमपुर से उनके विधायक पुत्र कुलदीप बिश्नोई हिसार से सांसद बन गए. चलो वो तो राजनीति में पुराने है लेकिन ऐसे में आदमपुर उपचुनाव में जहाँ उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई को पहली बार चुनावी मैदान में उतरा गया है वहीँ रतिया से इनलो विधायक के मरणोपरांत उनकी पत्नी इनलो की टिकट पर चुनावी समर में है. जबकि कांग्रेस भी आदमपुर से इनलो की टिकट पर चुनाव लड़ चुके कांग्रेसी विधायक संपत सिंह के पुत्र को टिकट देना चाहती थी.
अगर देश की बात की जाएँ तो ऐसा कोई विरला ही राजनीतिक दल मिलेगा जिसने परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया हो. कश्मीर से कन्याकुमारी व् महाराष्ट्र से आसाम तक प्रत्येक मुख्यमंत्री परिवारवाद को बढाने का गुनहगार है. ऐसे में मुद्दों की तलाश में रहने वाले राजनीतिक दल व् नेताओं को परिवादवाद पर भाषण देना भारतीय राजनीति में मुंह चिढाने के सामान लगता है.


सब कुछ चुनावी-चुनावी


सभी जानते हैं कि मेरे देश की राजनीति सुबहान अल्ला है। आम कार्यकर्ता से लेकर शीर्ष राजनेता तक राजनीति में इस कदर डूब गया है कि उसे देश दुनिया से कोई सरोकार नहीं है। अब अगर बात चुनाव की, की जाए तो नेता तो नेता आमआदमी भी चुनावी रंग में रंगा नजर आता है। यही कारण है कि आजकल चहुंओर चुनावी माहौल सा नजर आ रहा है। जिसके चलते हर आम-खास की जुबान चुनावी गुफ्तगु कर रही है तो नेताओं के क्रियाकलाप भी चुनावी-चुनावी से नजर आ रहे हैं। जनता की सोच आज चुनाव तक सिमित लग रही है तो नेताओं के भाषणों में भी चुनावी रस टपक रहा है।
बात देश के पाँच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की हो या आदमपुर व रतिया विधानसभा उपचुनाव की। सभी चुनावों ने देश के माहौल को चुनावी सा कर दिया है. वहीँ हरियाणा के आदमपुर व् रतिया के दोनों उपचुनावों में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला व भविष्य में मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए कुलदीप बिश्रोई एवं कैप्टन अभिमन्यु चुनाव जीतने हेतू रावण के जमाने के प्रसिद्ध फार्मूले साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल करने से गूरेज नहीं कर रहे हैं। कहने का भाव सिर्फ इतना सा है की जनता से लेकर नेता तक सब चुनावी हो गए है.
इस गुफ्तगू को उस समय और हवा मिली जब उत्तर प्रदेश  के विकास का दावा करने वाली मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तरप्रदेश के ही चार टुकड़े करने का मन बना लिया। परिणामस्वरूप एक प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को भेज दिया गया। ऐसा ही कुछ हाल केन्द्र सरकार का भी है। केन्द्र भी इन चुनावों में जीत हासिल करने के लिए पूरी तरह से चुनावी रंग में रंगा हुआ है। यह शायद चुनावी असर ही है की क्रुड (कच्चा तेल) की कीमत्तें दिन-प्रतिदिन बढऩे के बावजूद केन्द्र ने या तो बीते लोकसभा चुनाव में जीत पाने के लिए तेल की कीमतों में कटौती की थी या फिर अब एक बार पुन: तेल के दामों में कटौती की है।
माना जा रहा है कि हिसार लोकसभा उपचुनाव में मात खाने के बाद केन्द्र ने पाँचों राज्यों सहित आदमपुर व रतिया उपचुनाव पर कब्जा जमाने के उद्देश्य से यह कटौती की है। बीते दिनों राज्यस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हैलीकॉप्टर की हिसार के सीमावर्ती गांव में आपात लैंडिंग के दौरान गरीब के घर चाय पीकर हजार रूपए का नोट देना चुनावी सा नजर आया. प्रदेश में बिजली को लेकर जहाँ हाहाकार मचा हुआ है वहीँ हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का हालिया ब्यान कि जनवरी से प्रदेश की जनता को नियमित बिजली मिलेगी भी यह दर्शाता है कि आज सबकुछ चुनावी-चुनावी सा हो गया है।
जहां उत्तरप्रदेश के हालात पर देश के युवराज राहुल गांधी को शर्म आना उनकी राजनीतिक मंसा को दर्शाता है वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की जनचेतना यात्रा  भी किसी चुनावी फार्मूले से कम नहीं है।


खुलती गठबंधन की गाँठ


आज जनता हैरान है, परेशान है. किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा की राजनीति में आखिर हो क्या रहा है. बस हम सब यह देखने पर मजबूर है की सत्ता के भूखे ये नेता आखिर किस हद तक गिर कर आज किसी भी दल से गठबंधन तो करते है, लेकिन चंद ही दिनों में उस गठबंधन की गाँठ खुलती नजर आती है. इतने से भी पेट नहीं भरता तो गठबंधन के समय जनता के वोट हथियाने के उद्देश्य से कभी दल मिलने तो कभी दिल मिलने की बात करने वाले दोनों ही दलों के नेता एक-दूसरे को कोसते नजर आते है. आज देश हो या देश का कोई भी प्रदेश नेताओं की इस राजनीति से कोई भी अछूता नहीं है. सत्ता के नशे में मदमस्त गठबंधन के समय किसी नेता का उद्देश्य यह नहीं होता की जनता को सुशासन दिया जाये.
जबकि शादी जैसे पवित्र बंधन से एक रीत चली गठजोड़. शादी के दौरान जब लड़का-लड़की के फेरे शुरू होते है तो पंडित सात जन्मों तक यह बंधन ऐसे ही बना रहे इसके लिए गठजोड़ करते है. भारतीय संस्कृति के अनुसार यह गठजोड़ होनी-अनहोनी की सभी सीमाओं को लांघ कर उम्र भर चलता है. लेकिन भारतीय राजनीति ने आज इस गठजोड़ के मायने ही बदल कर रख दिए है. दो दिल और दो जिस्म को एक जान में बाँधने का काम करने वाले इस बंधन को राजनीति ने नाम दिया गठबंधन का. लेकिन आज यह गठबंधन होते बाद में है और टूट पहले जाते है. कुर्सी की चाह में दो दलों के ना दिल मिलते है और ना ही विचार. बावजूद इसके राजनीतिक दल और उसके नेता गठबंधन करते है तो सिर्फ स्वार्थ के लिए.
देश-प्रदेश में हुए गठबंधन को लेकर होने वाली गुफ्तगू का जिक्र छोड़ अगर सिर्फ हाल ही में हुए हिसार लोकसभा उपचुनाव व् आदमपुर तथा रतिया विधानसभा उपचुनाव की बात ही की जाए तो यह स्पष्ट होता है की गठजोड़ और गठबंधन में बहुत फर्क है. जहाँ बहुजन सन्देश पार्टी (कांशीराम) की अध्यक्षा कांता अलहड़िया जो बीते हिसार लोकसभा उपचुनाव में इनलो के साथ एक मंच पर दिखाई दी. वहीँ उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ मिलकर तीसरे मोर्चे को लेकर अपनी आवाज बुलंद की. शायद यह सत्ता का नशा ही था की मात्र कुछ ही दिनों में गठबंधन में दरार पड़ती नजर आई. कांता अलहड़िया जहाँ स्वयं इन उपचुनावों में आदमपुर से चुनाव मैदान में है वहीँ कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे है.
ज्ञात रहे की इससे पूर्व भी देश-प्रदेश में बहुत से गठबंधन बने व् टूटे लेकिन गठजोड़ की भूमिका आज तक बहुत ही कम गठबंधन निभा पाए है. केंद्र की सता पर काबिज होने के लिए विभिन्न दलों का कांग्रेस के साथ मिलना आज उन्ही दलों को भारी पड़ रहा है. कारण वहीँ की दल तो अवश्य मिले लेकिन दिल नहीं मिले. महंगाई के विरोध में कभी करूणानिधि का नाराज होना तो कभी ममता बेनर्जी का आँखे तरेरना गठबंधन की गाँठ पर समय-समय पर सवाल खड़े करता है. टूटते गठबन्धनों का हरियाणा में भी एक लम्बा इतिहास रहा है. हविपा-भाजपा, इनलो-बसपा, हजकां-बसपा व् इनलो-भाजपा जैसे गठबन्धनों को लेकर समय-समय पर लम्बे-चौड़े दावे किये गए. लेकिन कभी सत्ता नहीं मिलना तो कभी ज्यादा सत्ता सुख मिलने के कारण इन गठबंधनों की गाँठ खुलती नजर आई.


खुश तो बहुत हुए होगे आप



भारत निर्वाचन आयोग ने आदमपुर और रतिया विधानसभा उपचुनाव में रोड रोलर चुनाव चिन्ह को हटाने का फैसला लिया है. यह वही रोड रोलर है जिसने बीते हिसार लोकसभा उपचुनाव में जिस तरीके से हजकां-भाजपा प्रत्याशी कुलदीप बिश्नोई के ट्रैक्टर को कुचला उससे शायद वो कभी उभर नहीं पायेंगे. इसी रोड रोलर के बेकाबू होने से ही ना सिर्फ कुलदीप बिश्नोई की जीत का अंतर नाम मात्र रह गया बल्कि यह रोलर अगर कुछ कदम और चल गया होता तो कुलदीप बिश्नोई की हार निश्चित ही थी. यह रोड रोलर इनलो प्रत्याशी अजय चौटाला को जीत तो नहीं दिलवा सका लेकिन जीत का अंतर मात्र 6335 करने में अवश्य कामयाब रहा, जो मुख्य विपक्षी उम्मीदवारों के लिए सुखद अनुभूति थी. यहीं कारण था की जीत के पश्चात कुलदीप की होली मनी तो भाजपा की दिवाली. लेकिन इतना अवश्य है की चुनाव परिणाम आने के अंत तक सभी की साँसे थमी हुई थी. चुनाव आयोग का यह फैसला आने से कुलदीप बिश्नोई खुश तो जरुर हुए होंगे.
कितने से जीत - कितने से हार 
हिसार लोकसभा उपचुनाव को हुए एक माह होने को आया, चुनाव परिणाम भी आ चूका है. सभी को पता है की इस उपचुनाव में हजकां-भाजपा उम्मीदवार कुलदीप बिश्नोई ने इनलो प्रत्याशी अजय चौटाला को हराया. लेकिन आज भी बहुत से लोगों और नेताओं के लिए यह एक पहेली ही बनी हुई है की आखिर कुलदीप बिश्नोई ने कितने मतों से जीत दर्ज की. भले ही चुनाव आयोग के आकडों के हिसाब से कुलदीप बिश्नोई 6335 वोट से जीत कर ही लोकसभा में पहुंचे है. लेकिन इनलो कुलदीप बिश्नोई की इस जीत को मात्र बता कर शायद अपने दिल का दर्द छुपाने की कोशिश कर रही है.
सभी जानते है की इस चुनाव में अगर रोड रोलर चुनाव चिन्ह नहीं होता तो परस्थितियाँ आज कुछ और ही होती. इसके साथ साथ चार कुलदीप नामक प्रत्याशियों ने भी क्रमशः 2353, 2712, 1659 व् 2053 वोट लेकर 8777 वोटों से कुलदीप बिश्नोई की जीत का अंतर कम करने में आग में घी का काम किया है. जबकि निर्दलीय प्रत्याशी ओमप्रकाश कल्याण जिनका चुनाव चिन्ह रोड रोलर था ने इस चुनाव में 27802 प्राप्त किये. इनलो - कांग्रेस को यह मानना पड़ेगा की भले ही कुलदीप बिश्नोई की जीत 6335 मतों से हुई हो लेकिन इनलो उम्मीदवार अजय चौटाला की हार अवश्य ही 42914 वोटों से हुई है. इसलिए यह गुफ्तगू गलत नहीं है की रोड रोलर द्वारा प्राप्त किये गए वोटों से अजय चौटाला खुश तो बहुत हुए होगे.


महिलायें गायब


- हिसार लोकसभा उपचुनाव के चुनावी मुद्दों में से -
रैली- 1 
राजनीतिक दल- भाजपा
महिला नेत्री- विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज
केंद्र की कांग्रेस सरकार महंगाई व् भ्रषाचार के कारण अलोकप्रिय व् बदनाम हो चुकी है. हजकां-भाजपा गठबंधन एक + एक नहीं अपितु एक और एक ग्यारह बन कर भारत की राजनीति में बदलाव की आहट करेगा. 
रैली- 2 
राजनीतिक दल- कांग्रेस
महिला नेत्री- दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित
भ्रष्टाचार को रोकने में अगर किसी पार्टी ने जरुरी कदम उठायें है तो वो सिर्फ कांग्रेस ने उठायें है. भाजपा के पास ना नेता है ना नीति है और ना ही कोई नियत. देश का विकास सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है. 
रैली- 3 
राजनीतिक दल- इनलो
महिला नेत्री- कांता अलहड़िया 
हजकां-भाजपा व् कांग्रेस ने कभी भी बाल्मीकि समुदाय को याद नहीं किया वहीँ प्रदेश के मुख्यमंत्री, उनके पुत्र और पूरा सरकारी अमला एक-एक वोट के लिए जिले में डेरा डाल कर लोगो से भीख मांग रहे है. 
लोगों को विकास करने व् भ्रष्टाचार मिटाने के सब्जबाग दिखाने के पश्चात आखिरकार वह दिन भी नजदीक आ ही गए जब सभी राजनीतिक दलों ने अपना दमखम लगाने के बाद विशाल रैली कर अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया. तीन दिन तक लगातार हुई इन रैलियों में जहाँ नेताओं ने  आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ वोट हथियाने के लिए किसी ने कोई दिग्गज नेता बुलाया तो किसी ने अभिनेता. सभी रैलियों में उच्च स्तर की महिला नेत्री भी उपस्थित रही. सिर्फ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.
ज्ञात रहे की हिसार लोकसभा के कुल मतदाताओं में 45 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है. बावजूद इसके प्रदेश में महिलाओं के प्रति असुरक्षित वातावरण व् आनर किलिंग के मुद्दे पर ना विपक्ष कुछ बोला और ना पक्ष से कुछ बोला गया. जबकि 33 प्रतशत आरक्षण की बात करने वाले सभी राजनीतिक दलों के पास लोकसभा चुनाव लड़ने वाली एक महिला नेत्री तक नहीं है. अक्सर राजनीतिक पार्टियां संसद तथा विधानसभा के अन्दर व् बाहर महिलाओं की बातें तो करते है लेकिन पता नहीं क्यों हिसार के मंच पर किसी भी नेता को महिलाओं की याद तक नहीं आई.
किसी ने महंगाई का रोना रोया तो किसी ने भ्रष्टाचार का गीत गया. अन्ना हजारे व् उनकी मुहीम का जिक्र करना भी कोई नहीं भुला. मकसद सभी का एक ही था की किसी तरह जनता के वोट हासिल किये जाये. लेकिन क्या हिसार जिले में महिलाओं के वोट नहीं है या राजनीतिक पार्टियों व् नेताओं को महिलाओं से कोई सरोकार नहीं है.


जिंदगी के कुछ अच्छे पल


हिसार लोकसभा उपचुनाव की गहमागहमी हुए भले ही महीनों बीत गए हो लेकिन अब कहीं जाकर जनता को पता लगने लगा है की हां चुनाव आ गया है. सिर्फ इसलिए नहीं की मतदान की तिथि समीप आ गई है या चुनाव का शोर बढ़ गया है बल्कि इसलिए की चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जिसकी भरी गर्मी में बिजली नहीं होने से सांस फूली हुई थी. चोरी का आलम यह था की व्यापारियों को नहीं पता था की जो प्रतिष्ठान वो ठीक से बंद कर के जा रहा है वो सुबह स्वयं आकर खोलेगा या शटर के ताले चटके हुए मिलेंगे. बीते कुछ समय में नगर हुई हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ ने आम आदमी की नींद तक उचाट दी थी. पुलिस की हर कोशिश को नाकाम करते हुए चैन स्नेचर आये दिन महिलाओं की या तो चैन तोड़ कर रफूचक्कर हो जाते रहे है या फिर उनका पर्स उड़ा कर भाग जाते थे. 
मगर जनता आज खुश है. उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करना है सिर्फ इसलिए नहीं, बल्कि उनकी ख़ुशी का मुख्य कारण है की आज शहर सहित जिले में जहाँ ना कोई अपराधिक वारदात हो रही है वहीँ महिलायें भी त्यौहार के दिनों में सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवागमन कर पा रही है. लोगो में गुफ्तगू हो रही है की जिन अपराधियों ने जनता का जीना दूभर कर दिया था आखिर आज वो किसके कहने मात्र से अपने मंसूबों को अंजाम नहीं दे रहे. एकाएक कहाँ गए सभी अपराधी. क्या उनको चुनाव के दिनों में कुछ और काम दे दिया गया है. ऐसा भी हो सकता है की हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई व् अनेक भाजपा नेता जो की पिछले दो सप्ताह से हिसार जिले में डेरा डाले हुए है उनके डर व् पुलिस की सक्रियता के चलते सभी अपराधी खामोश हो गए है. 
अभी कुछ दिनों पूर्व जब मई रात को अपनी गली में घुसा तो गली का नजारा कुछ बदला-बदला सा नजर आया. टाक-झांक करने पर पता लगा की जिस गली की स्ट्रीट लाईट कई साल से बंद पड़ी थी आज वो जगमगा रही थी. दीवाली का समय है शायद इसलिए नगर निगम द्वारा ठीक करवा दी गई होगी यह सोच मैं घर के अन्दर चला गया. सुबह जैसे ही गली से गुजर रहा था तो गली की सड़क का वह हिस्सा मुझे खुदा हुआ मिला जिसकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी की यह जल्दी से बनवा दिया जायेगा. आस-पड़ोस वालों ने खुश होते हुए बताया की रात को जेसीबी मशीन से इसको खोदा गया है और यहाँ सीमेंट की सड़क बनवाई जाएगी. अभी कुछ आगे ही चला था की ऐसा ही एक और नजारा देख मैं हतप्रद था. मुख्य सड़क पर आया तो कहीं रंग पुताई का कार्य चल रहा था तो कहीं-कहीं मरम्मत का काम जोर-शोर से जारी था. 
इसका जिक्र मैंने अपने कुछ साथियों से किया. उन्होंने कहाँ की तुम पत्रकारों की यहीं कमी है. कोई काम हो रहा है तो होने दो, क्यों बात को बढाते हो. अब कहीं जाकर तो कुछ विकास के काम हो रहे है उसको भी क्या बंद करवा दोगे. जो मैं सोच रहा था उसने स्पष्ट कह दिया की जो काम बहुत पहले होने चाहिए थे वो आज चुनाव के दिनों में हो रहे है. इसका अर्थ यह हुआ की ऐसा नहीं है की शासन-प्रशासन को पता नहीं होता की कहा क्या कमी है, बस कमी है तो काम को अंजाम तक पहुंचाने की. जो काम आज हो रहे है अगर वो समय पर हो जाये तो सत्ता में रहते हुए ना मुख्यमंत्री को जिले में डेरा डालना पड़े और ना ही पूर्व मुख्यमंत्री को विकास की याद दिलानी पड़े. कुछ भी हो जनता खुश है और चाह रही है चुनाव पांच वर्ष में नहीं अपितु वर्ष में एक बार होने चाहिए, जिससे चुनाव की आड़ में वो जिंदगी के कुछ अच्छे पल गुजार सके.


शायद जनता बेवकूफ है


कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश:- लोग कहते है की जयप्रकाश ग्रीन ब्रिगेड का बॉस रहा
है लेकिन सभी जानते है की इनलो के शासन काल में जितनी बदमाशी, डकैती, लूटपाट व् रुपया वसूली प्रदेश में हुई उतनी तो जनता ने कभी नहीं देखी-सुनी होगी. यही कारण रहा की इनलो के शासन में प्रदेश का सिस्टम ही खराब हो गया था. कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार की बात करते है तो मैं सभी प्रत्याशियों को भ्रष्टाचार पर बहस की चुनौती देता हूँ. मेरा मानना है की चौटाला और भजनलाल परिवार ने सदैव ही झूठ की राजनीति की है. 
इनलो प्रत्याशी अजय चौटाला:- जब से देश और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार
आई है तब से विकास जनता का नहीं अपितु कांग्रेसी नेताओं के रिश्तेदारों का हुआ है. रही बात सुरक्षा व्यवस्था की तो आज प्रदेश में कोई भी सुरक्षित नहीं है जबकि आयें दिन चिकित्सक व् व्यापारियों पर हमले हो रहे है. उधर कुलदीप बिश्नोई भ्रष्टाचार की बात करते है लेकिन सभी जानते है की वो उस परिवार से है जो प्रदेश में भ्रष्टाचार का जनक रहा है. स्कूलों में छात्राएं यौन शोषण का शिकार हो रही है तो सरकारी विश्राम गृह कांग्रेसियों के ऐशगाह बने हुए है. 
हजकां-भाजपा उम्मीदवार कुलदीप बिश्नोई:- कांग्रेस-इनलो को चुनाव के दिनों में
ही हिसार की याद आती है, सत्ता मिलने के बाद इनके नेता हिसार के लोगो के सुख-दुःख की खबर तक नहीं लेते. आज मुख्यमंत्री हुड्डा गाँव-गाँव जयप्रकाश के लिए यह कह कर वोट मांग रहे है की हिसार को नंबर वन बना दूंगा, तो पिछले सात साल से हुड्डा जी कहाँ सो रहे थे. अगर उन्होंने इतना ही विकास करवाया होता तो उन्हें गली-गली जाकर जयप्रकाश के लिए वोट मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती. जबकि इनलो का शासन जनता अभी तक भूली नहीं है.
समस्त भारतीय पार्टी उम्मीदवार:- महंगाई और भ्रष्टाचार के लिए केंद्र व् प्रदेश की
सरकारें दोषी है. सरकारी योजनायें समय पर लागू नहीं होती इसलिए जनता को उनका हक़ नहीं मिल पाता. आज कोई भी राजनीतिक दल और उनका नेता बेदाग़ नहीं है. सभी अपना उल्लू सीधा कर स्वार्थ की राजनीति कर रहे है. चुनाव जीतने के पश्चात समस्त भारतीय पार्टी सिर्फ जन लोकपाल बिल का समर्थन ही नहीं अपितु अन्ना के सपनो को साकार करने का काम भी करेगी.
जैसे-जैसे हिसार लोकसभा उपचुनाव का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे प्रत्याशियों का एक-दूसरे के प्रति वाकयुद्ध तेज होता जा रहा है. कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार जा जनक. इतने तक भी किसी का पेट नहीं भरता तो वो व्यापारियों से फिरौतियां वसूलने वाले को कांग्रेस का संरक्षित बता रहा है तो कोई कह रहा है की चौटाला बंधुओ पर जो आय से अधिक संपत्ति का आरोप तय हुआ है वह संपत्ति जनता से अर्जित की गई है. कांग्रेसी उम्मीदवार अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो अजय चौटाला कांग्रेस शासन को कुशासन का दर्जा दे रहे है. उधर कांग्रेसी विधायक व् पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रघुवीर सिंह कादियान ने तो यहाँ तक कह दिया है की पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की मौत का कारण कुलदीप बिश्नोई है. जबकि हरियाणा में हो रही हत्याओं, बलात्कार, अपहरण, लूटपाट, फिरौती, आगजनी व् चोरी का सेहरा इनलो, कांग्रेस व् हरियाणा जनहित कांग्रेस एक-दूसरे के सिर धर रही है. 
क्या आपको लगता है की कोई भी राजनीतिक दल, उसका प्रत्याशी या नेता गलत बोल रहा है. शायद नहीं, सभी सही ही तो बोल रहे है. यह सभी वहीँ बोल रहे है जिन समस्याओं से हमको हर समय दो-चार होना पड़ता है या जो हमारे लिए अक्सर गुफ्तगू बनती है. मुद्दा यह नहीं की आज कांग्रेस की सरकार या कल इनलो की सरकार थी. मुद्दा यह है की आज जो आरोप यह नेता एक-दूसरे पर लगा रहे है उनमे से एक को भी किसी नेता व् सरकार ने प्रदेश से ख़त्म करने का काम किया हो. ये वहीँ बोल रहे है जिनका हम शिकार हो रहे है. ये लोग तो आज बोल कर कल चले जायेंगे और हम हाथ मलते रह जाते है. नेताओं की बयानबाजी सुन कर अब गुफ्तगू शुरू हो गई है की भले ही यह सब आरोप ही है लेकिन जब सभी सही बोल रहे है तो आखिर जनता क्या करें. किसको दें वोट और क्यों. कौन विधायक व् सांसद आज चुनने के लिए ठीक है जो जीतने के बाद आपकी गली-मौहल्ले में आया आपका दुःख-दर्द सुनने को. जबकि स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री दावा करते है की एक सांसद और दे दो हिसार को नंबर एक बना दूंगा लेकिन हिसार का पुराना ओवरब्रिज को बंद हुए आज चार साल से अधिक हो गए वह तो बनवाया नहीं गया.


ट्रैक्टर पर हो के सवार चला रे


हरियाणा के मुख्यमंत्री प्रदेश के लिए नारा देते है नंबर वन हरियाणा. उनका कहना ठीक है की आज हरियाणा नंबर वन है. लेकिन कोई उनसे पूछे की किस चीज में, तो शायद जो वो कहेंगे उनमे से एक भी चीज में नहीं. ना यहाँ बिजली है, ना पानी. रही-सही कसर सड़के और अपराध पूरी कर देते है. इस पर भी अगर कोई जवाब या सुना-सुनाया जुमला सुना दिया जाये तो मिर्चपुर प्रकरण और जाट आरक्षण की आग अभी तक बुझी नहीं है. तो अब आप कहेंगे की फिर हरियाणा नंबर वन कैसे है. वो ऐसे की पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ताबड़तोड़ बेमौसमी रैलियाँ कर हरियाणा को नंबर एक पर ला दिया. उसके बाद इनलो व् हरियाणा जनहित कांग्रेस ने भी प्रदेश में बेमौसमी रैलियाँ कर मुख्यमंत्री हुड्डा का साथ दिया. अब भाजपा भी इसी नक़्शे कदम पर चल रही है. यह तो भविष्य की गर्भ में है की इन रैलियों का किस को क्या फायेदा मिलता है लेकिन इतना जरुर है की जनता सब कुछ देख-समझ रही है की मौजूदा समय में हरियाणा नंबर वन क्यों है.
वैसे राजनितिक तौर पर हरियाणा हमेशा ही नंबर वन रहा है. क्योंकि यहाँ की राजनीति हमेशा तिकोनी रही है. एक समय था जब यह तीन लालो का ढंका बजता था. देवी लाल, भजन लाल और बंसी लाल. लेकिन समय के साथ और बंसी लाल की मृत्यु के साथ हरियाणा विकास पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया. अब बचे दो लाल, उसमे से भजन लाल ने अपनी अलग पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस बना ली. तो अब कुल मिला कर लालो के प्रदेश में ओम प्रकाश चौटाला अकेले कमान संभाल रहे है. ऐसे में कांग्रेस और इनलो हर दम आमने-सामने रहते है. लेकिन इस बीच चर्चा में कोई रहता है तो वो है भजन लाल के पुत्र और हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई. वो समय-समय पर अपने बयानों और क्रिया-कलापों से सुर्खियाँ बटोरते रहते है. कहने को तो वो अपने को प्रदेश का आगामी मुख्यमंत्री बताते है लेकिन यह वो भी भली-भांति जानते है की अकेले मुख्यमंत्री बनना तो दूर प्रदेश की राजनीति में चलना भी उनके लिए बहुत कठिन है.
लेकिन मजे की बात यह है की इन दिनों कुलदीप बिश्नोई किसी साइकिल, जानवर, गाड़ी या पैदल नहीं बल्कि ट्रैक्टर पर बैठ कर प्रदेश का दौरा कर रहे है. आपको यह भी बता दें की चुनाव आयोग द्वारा उनकी पार्टी हजकां का चुनाव चिन्ह बदल कर अब ट्रैक्टर कर दिया है. यहीं कारण है की अब वो जहां कभी भाजपा के डर पर दीखते है तो कभी ट्रैक्टर पर बैठ कर किसी गाँव के दौरे पर. कभी वो रैली में देसी घी का हलवा बाँट रहे है तो कभी महंगाई, भ्रष्टाचार और बिजली-पानी के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार की खिंचाई करते नजर आते है. जबकि बीते विधानसभा चुनावों में हजकां की टिकट पर जीतने वाले 5 विधायक जो अब कांग्रेस में शामिल हो चुके है उनका क्या होगा यह शायद कुलदीप बिश्नोई भी नहीं जानते. इतना जरुर है की इस मुद्दे पर वो सिर्फ मुख्यमंत्री हुड्डा, पांचो विधायको और विधानसभा स्पीकर को सिर्फ कोस ही सकते है. चलो जी अब जब कुलदीप बिश्नोई ट्रैक्टर पर बैठ कर निकल ही पड़े है तो उसकी रफ़्तार क्या रंग दिखाती है यह तो आगामी चुनावों में ही पता लगेगा.


बस सिर्फ एक भारत ही दिखा


एक स्कूल का एक मंच लेकिन यहाँ सैकड़ो बच्चो जब विभिन्न पारंपरिक वेशभूषा में घूमते देखा तो एक बारगी तो लगा की पूरा भारत यहाँ एकत्रित हो गया हो. फिर भले ही इन बच्चो की भाषा अलग हो या रंग रूप. इन सभी का मकसद एक था की जिस देश की माटी में उन्होंने जन्म लिया है, इस स्कूल में बने मंच पर गीत के माध्यम से उसी माटी का गुणगान करना. मौका था भारत विकास परिषद् की राष्ट्रीय स्तर की समूहगान प्रतियोगिता का. 13 - 14 नवम्बर को हिसार में होने वाली इस समूहगान प्रतियोगिता का समापन रविवार को हो गया. पूरे देश के 41 प्रान्तों से आये लगभग 500 बच्चो ने रविवार को हिसार को अलविदा कहा. 13 नवम्बर को बड़े ही धूमधाम से प्रतियोगिता का आगाज हुआ. यह बात अलग है की कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्दू नहीं आ पाए लेकिन अपने देश भक्ति के गीतों से बच्चो ने जो समां बांधा हिसारवाशियों ने कभी उसकी कल्पना भी नहीं की थी.
प्रतियोगिता के रीजनल राउंड में भले ही बच्चो ने तमिल, उड़िया, गुजराती या फिर पंजाबी में गीत गाये हो लेकिन उनके परिधान और देश भक्ति से ओत प्रोत गीत यह बताने के लिए काफी थे की यह सभी भारतवाशी है. राष्ट्रीयता की भावना, देश की मान मर्यादा पर मर मिटने का आह्वान, आजादी की अनुभूति और स्वस्थ, समर्थन एवं संस्कृति पर बच्चो ने जिस कदर गीत प्रस्तुत किये उससे पंडाल में उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए. जैसे तैसे कर शनिवार का दिन इन बच्चो के लिए अच्छा बीत गया. लेकिन इनको नहीं पता था की रविवार को विदाई का दिन है. सभी बच्चे जहा अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त होकर सोये थे वही दूर राज्यों से आये बच्चो की आँखे नम दिखाई दी. आयोजक भी अपने को नहीं रोक पाए. कहते है ना की बच्चे तो भगवान् का रूप होते है. और जब एक साथ इतनी तादात में बच्चो का समागम हो तो आँखे नम होना स्वाभाविक ही है.
बच्चे भी ऐसे की जो अपनी प्रस्तुति से लोगो के दिल में घर कर गए हो. फिर भले ही वो प्रतियोगिता में कोई स्थान हासिल कर पाए हो या नहीं. रविवार को जैसी की उम्मीद जताई जा रही थी नवजोत सिंह सिद्दू समापन समारोह में अवश्य आयेंगे वो तो नहीं आये लेकिन इस अवसर पर शिरकत करने वाली भाजपा नेत्री स्मृति इरानी भी शामिल नहीं हो पाई. राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता के रीजनल राउंड में दक्षिण कर्नाटक को पांचवा, उत्तर हरियाणा को चौथा, पश्चिम बंगाल को तीसरा, आसाम को दूसरा और दक्षिण पंजाब ने पहला स्थान प्राप्त किया. हिंदी फाग में आसाम को पांचवा, महाराष्ट्र - II को चौथा, दक्षिण हरियाणा को तीसरा, पश्चिम हरियाणा को दूसरा और दक्षिण दिल्ली को पहला स्थान मिला.


चुनाव, इज्जत और दावेदारी-फ़िर भी जनता सब पर भारी


हिसार जिले की सात विधानसभा सीटो पर चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशी अब अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे है। वैसे तो रविवार को एक महीने से चल रहा चुनाव प्रचार का शोर-शराबा थम सा गया है लेकिन अब प्रत्याशी जनता से संपर्क कर अपने-अपने दावे कर रहे है। उल्लेखनीय है की हरियाणा विधानसभा के लिए 13 अक्तूबर को चुनाव होने है। रविवार को चुनाव प्रचार थमने से पूर्व सभी प्रत्याशियों ने जीत के लिए अपनी ताकत झोंक दी। किसी ने रैली कर अपनी ताकत दिखाई तो किसी ने रोड शो कर। किसी ने जनसभा कर वोट देने की अपील की तो किसी ने घर-घर जाकर अपने व् अपने प्रत्याशी के लिए वोट मांगे। कुल मिला कर रविवार का दिन सभी पार्टीयो व् उम्मीदवारों के लिए अहम् रहा। कोई किसी तरह की कोर-कसर बाकि नही रखना चाहता था। यही कारण था की जहा पंजाबी समुदाय के पंचायती प्रत्याशी गौतम सरदाना ने एक विशाल रैली कर अपनी ताकत दिखानी चाही वही कांग्रेस सांसद और हिसार विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री जिंदल के पुत्र नवीन जिंदल ने छोटी-छोटी जनसभाए कर अपनी माता को वोट देने की अपील की। इन सब से परे ज्येष्ठ जिंदल पुत्र पृथ्वी राज ने नगर के व्यापारियों और प्रतिष्ठित लोगो को पत्र के माध्यम से कांग्रेस और अपनी माँ को जिताने की अपील की। इसी कड़ी में हरियाणा जनहित कांग्रेस सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई ने भी रोड शो कर हजंका को वोट देने की अपील की। यह तो 22 अक्तूबर को ढोल की पोल खुलने पर ही पता चलेगा की कौन कितने पानी में है लेकिन इतना जरुर है की यह चुनाव हिसार के लिए अहम् होंगे। इन चुनावो में कांग्रेस, भाजपा व् हजंका सहित कई बड़े नेताओ की इज्जत दांव पर लगी है। अगर जनता से थोडी सी भी चुक हो गई तो जहा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का राजनैतिक भविष्य दांव पर लग सकता है वही वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व् पूर्व सांसद जयप्रकाश का राजनितिक जीवन अंधकारमय हो सकता है। तो इनलो छोड़ कर कांग्रेस का दामन थामने वाले पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह भी अपने को राजनैतिक मैदान में खड़ा रखने में असमर्थ होंगे। वही भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए भाजपा विधायक रामकुमार गौतम का राजनितिक अस्तित्व भी खतरे में है।
इन सब में एक चेहरा भाजपा का भी है। वैसे तो हरियाणा में पाँव जमाने के लिए भाजपा शुरू से ही मशक्कत करती रही है लेकिन अब तक उसको कुछ चंद सीटो से ही गुजरा करना पड़ा है। वही हिसार की नारनौंद सीट पिछले चुनावो में भाजपा के पाले में गई थी जिसे भाजपा गवाना नही चाहती। यही कारण है की भाजपा ने यहाँ से वरिष्ठ नेता कैप्टन अभिमन्यु को मैदान में उतरा है। अगर इस सीट पर गलती से भी कोई गलती हो गई तो या तो कैप्टन अभिमन्यु या फ़िर कांग्रेस उम्मीदवार रामकुमार गौतम को राजनीति से संन्यास लेना पड़ सकता है। जबकि इनलो भी बरवाला व् उकलाना से अच्छी स्थिति में दिखाई दे रही है। अगर यहाँ भी भाग्य ने इनलो का साथ नही दिया तो दोनों इनलो प्रत्याशी सरोज मोर और शीला भ्यान जो की आज पार्टी के उच्चस्थ पद पर बैठी है को हार का मुहं देखना पड़ सकता है। रही बात हजंका की तो उसने बिना कोई गलती करे हिसार की सात सीटो में से तीन को हथियाने का काम किया है। आदमपुर से पार्टी सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई को, नलवा से माता जसमां देवी को तो हांसी से पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद भयाना को चुनाव मैदान में उतरा है। यहाँ थोडी सी चुक होते ही जहा सीधा असर पार्टी पर पड़ेगा वही दिग्गज भी किसी को मुहं दिखाने लायक नही रहेंगे। फ़िर भले ही ये नेता अपनी जीत को लेकर कुछ भी दावे करते रहे, जनता को कुछ भी सब्जबाग दिखा ले लेकिन यह तो जनता को ही देखना है की वो किस की इज्जत उतारती है और किस पर मेहरबान होती है।


विधानसभा चुनाव, आतंक, उस पर अफवाहों का बोलबाला


जैसा की सभी को ज्ञात है की हरियाणा में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। तो यह भी स्वाभाविक है की बाजारों में राजनितिक चर्चा भी जोर पकड़ने लगती है। इस पर अगर जिले में अपराधो का बोलबाला हो तो चर्चा में जैसे तड़का लग जाता है। कोई होने वाली घटनाओ को शासन कर रही पार्टी से जोड़ता है तो कोई इसे विपक्ष की साजिश करार देता है। ऐसे में अगर तू-तू, मैं-मैं हो जाए तो कोई गम नही। ऐसा नही है की ऐसा सिर्फ़ मेरे हिसार में ही होता है। फर्क सिर्फ़ इतना है दिल्ली के नजदीक होने के कारण ऐसी चर्चाये हिसार में कुछ ज्यादा ही होती है। लेकिन अगर इस बीच कुछ अफवाहे और जुड़ जाए तो सोने पे सुहागा हो जाता है। ऐसा ही कुछ घटित हुआ वीरवार को हिसार में। आए दिन होने वाले खून खराबे से तो हिसार को निजात नही मिली लेकिन कुछ खास था तो यह की एक साथ तीन अफवाह जरुर लोगो का ध्यान अपनी और खींचने में कामयाब रही। चिंता तो उस समय होने लगी जब मेरे साथ-साथ मेरे साथी पत्रकारों के पास भी ऐसे कुछ फोन घनघनाने लगे। आनन-फानन में हमने भी फोन घुमाने शुरू किए तो खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली कहावत चरितार्थ होती साबित हुई।
शाम के लगभग 5 बजे थे की एक मित्र का फोन आया की भाई साहब हिसार के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की रोहतक में गोली मार कर हत्या कर दी गई है। यह समाचार मुझ सहित मेरे अन्य पत्रकार साथियों को हिला कर रख देने के लिए काफी था। इसका कारण था की कुछ दिन पूर्व एक जेल वार्डन की गोली मार कर की गई हत्या। लेकिन जब अन्य आलाधिकारियों से संपर्क किया गया तो यह सिर्फ़ महज अफवाह निकली। अभी इस अफवाह से निजात मिली ही थी की शाम को 7 बजे फ़िर मेरा फोन खनका। किसी ने मुझ से पूछा की आज की कोई खास ख़बर। मैंने सहज ही कहा की कुछ खास नही। तो मुझ से पूछा गया की आज कोई घटना नही घटी क्या। मैंने कहा की एक बिजली कर्मचारी को गोली मार कर लगभग 80000 रुपए लुटे गए है। फोन करने वाले का कहना था की तुम हिसार की ख़बर ही रख सकते हो। हिसार से बाहर की ख़बर भी रखा करो। मैंने कहा श्री मान ऐसी क्या बात हो गई। तो मुझे तपाक से जवाब मिला की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। ऐसा नही है की ऐसे फोन सिर्फ़ पत्रकारों को ही किए गए थे। जब भाजपा नेताओ को फोन करना शुरू किया तो वो भी ऐसे फोनों से चिंतित नजर आए।
इतना ही नही जिले की राजनीति को लेकर भी एक अफवाह शाम होते होते जोर पकड़ गई। कही से बात उठी की एक इनलो प्रत्याशी की टिकट बदल दी गई है। इस ख़बर के साथ ही यह समझते देर नही लगी की कोई शरारती तत्व ऐसी अफवाहों को जन्म दे रहा है। लेकिन इतना अवश्य है की एक तो विधानसभा चुनाव उस पर जिले में अपराधियों का आतंक और ऊपर से अफवाहों का बोलबाला। तो अब आम आदमी किस पर भरोसा करे किस पर नही यह समझना थोड़ा मुश्किल लगने लगा है।


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