आओ करे दुआ महंगाई और भ्रष्टाचार से मुक्त वर्ष की


नया साल नए आगाज के साथ हमारे सामने है. माना की यह बात पुरानी हो चुकी है और सभी जानते भी है की नववर्ष आ चुका है. लेकिन गुफ्तगू का विषय यह है की बीता वर्ष सभी के लिए कैसा रहा. इस पर सभी के अपने-अपने मत होंगे. कोई कहेगा की ठीक है यार जैसा था बीत गया तो कोई कहेगा की पता ही नहीं चला की एक साल कैसे बीत गया. और कुछ ऐसा ही कहने के बाद हम फिर से अपने-अपने काम में जुट जाते है. लेकिन साथ ही कामना करते है की जो कुछ बीते वर्ष में हमको झेलना पड़ा नए साल में हमको उससे मुक्ति मिले और जो हमको अच्छा मिला उसमे वृद्धि हो. दिली तमन्ना है की बीता साल सभी के लिए सुखद रहा हो बावजूद इसके अनेक लेखे-जोखे समय-समय पर समाचार पत्र-पत्रिकाओ की सुर्खिया बने रहे. बीते वर्ष में देश को एक तो कुछ प्रदेशो को दो-दो चुनावो का सामना करना पड़ा. हरियाणा भी दो चुनावो से अछुता नहीं रहा. हरियाणावाशियों को पहले लोकसभा तो बाद में
विधानसभा चुनाव देखने को मिले. रही बात सरकार चुनने की तो केंद्र में कांग्रेस इसलिए आई की जनता सोचती थी की आर्थिक मंदी का मनमोहन सिंह ही डट कर सामना कर सकते है जबकि मुख्यमंत्री हुड्डा के पुनः आने का कारण था की केंद्र में कांग्रेस का राज है और हुड्डा जी जो काम पूरे नहीं कर पाए शायद दोबारा आने से वो काम हो सके. लेकिन शायद आज जनता अपने को ठगा सा महसूस कर रही है. क्योंकि जहा केंद्र में राज कर रही कांग्रेस का हाथ गरीब आदमी के हाथ से छुट गया वही हुड्डा भी विधायको की जोड़-तोड़ के अतिरिक्त प्रदेश के लिए कुछ खास नहीं कर पाए है. महंगाई आसमान छूने लगी है तो प्याज, चीनी, सब्जी से लेकर पेट्रोल-डीजल तक के दाम बढे है. गैस और बिजली के लिए सर्दियों में भी जनता त्राहि-त्राहि कर रही है.
भ्रष्टाचार की भी रही हद
देश का कोई ऐसा प्रदेश नहीं होगा जहा बीते वर्ष में भ्रष्टाचार का बोलबाला नहीं रहा हो. फिर चाहे पंजाब हो या चाहे हरियाणा. या यहाँ बात की जाये झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की. सब ने जनता की कमाई को खूब खाया. यही कारण था की इस तरह के भ्रष्टाचार से राजनीति भी अछूती नहीं रही. लोग तरह-तरह की गुफ्तगू करने लगे की यह भ्रष्ट राजनीति है या फिर राजनीति में भ्रष्टाचार. जबकि सत्ता के बल किस तरह एक पुलिस अधिकारी रुचिका प्रकरण जैसे संघिन मामले से बचा रह जाता है.
अब बहुत हुआ, आओ दुआ करे
जो कुछ मैंने लिखा ऐसा नहीं है की आप पहली बार पढ़ रहे है. लेकिन जरुरत है तो सिर्फ जन जागरण की. और मेरा तो उद्देश्य ही यही है की मैं समाचारों के दुसरे पहलु को आपके सामने रख सकू. तो आइये सब मिल कर नववर्ष में दुआ करे की महंगाई, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता व् राजनीति में दलगत राजनीति से मुक्त वर्ष आये और आम आदमी का चेहरा खिला-खिला रहे.

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1 आपकी गुफ्तगू:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

दुआ तो हम भी कर ही रहे हैं।

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तड़का मार के

* महिलायें गायब
तीन दिन तक लगातार हुई रैलियों को तीन-तीन महिला नेत्रियों ने संबोधित किया. वोट की खातिर जहाँ आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.

* शायद जनता बेवकूफ है
यह विडम्बना ही है की कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार का जनक. कोई अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो कोई कांग्रेस शासन को कुशासन ...

* जिंदगी के कुछ अच्छे पल
चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जो बीते कुछ समय में नगर हुई चोरी, हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ से सहमी हुई थी.

* अन्ना की क्लास में झूठों का जमावाडा
आज कल हर तरफ एक ही शोर सुनाई दे रहा है, हर कोई यही कह रहा है की मैं अन्ना के साथ हूँ या फिर मैं ही अन्ना हूँ. गलत, झूठ बोल रहे है सभी.

* अगड़म-तिगड़म... देख तमाशा...
भारत देश तमाशबीनों का देश है. जनता अन्ना के साथ इसलिए जुड़ी, क्योंकि उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आन्दोलन एक बहुत बड़ा तमाशा नजर आया.
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