क्या सिर्फ़ बच्चो के लिए रह गए बापू


आज बापू (मोहन दास कर्म चाँद गाँधी) की 140वी जयंती है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। देश को आजाद करवाने के लिए वो अकेले ही एक ऐसे निर्भीक नेता थे जो एक महानतम आध्‍यात्मिक आधुनिक नेता भी थे। उन्होंने जिस तरह पूरे देशवाशियों को एक सूत्र में पिरोया उससे अंग्रेज भी भयभीत थे। यही कारण था की जनता उन्हें प्यार से बापू कहने लगी। लेकिन आज उनका व् उनके कथनों का स्वरूप बदलने लगा है। 2 अक्तूबर के दिन कुछ गांधीवादी नेता उनकी प्रतिमा पर फुल अर्पित करते है तो कुछ सरकारी अधिकारी उन्हें नमन कर अपने कर्तव्य को पूरा करने का काम करते है। जब मैं स्कुल में पढता था तो पुस्तकों में अक्सर बापू का जिक्र होता था। आज भी होता होगा लेकिन आज यह जिक्र सिर्फ़ बच्चो के लिए रह गया है। जबकि देश के अधिकांश नेता, अधिकारी, वृद्ध और नौजवान से लेकर बच्चे तक उनके दिखाए रास्तो से भटक रहे है। यही कारण है की आज सिर्फ़ बापू के नाम की चर्चा मात्र ही होती है। जबकि उन्होंने जो सात सामाजिक पाप गिनाये थे उनके ऊपर आज कोई अमल नही कर रहा। ये पाप थे :-

* सिद्धांतों के बिना राजनीति
* परिश्रम के बिना संपत्ति
* अंतरात्‍मा के बिना आनंद
* चरित्र के बिना ज्ञान
* नैतिकता के बिना वाणिज्‍य
* मानवता के बिना विज्ञान
* त्‍याग के बिना पूजा

अब इसे विडंबना कहा जाए या सरकार व् अधिकारियो की लापरवाही की उनके कार्यालयों में जिस बापू की प्रतिमा लगी रहती है उनकी जयंती वाले दिन देश में बना एक कानून आज धुँआ-धुँआ हो रहा है। मजे की बात तो यह है की सार्वजानिक स्थानों पर धुम्रपान निषेध कानून बने एक वर्ष हो चुका है लेकिन हिसार में इस एक साल में सिर्फ़ 103 लोगो पर ही जुर्माना किया गया है। इसलिए ऐसा लगता है की आज सिर्फ़ बापू बच्चो के लिए ही रह गए है। इस विषय पर मेरी यह गुफ्तगू भी एक बार जरुर पढ़े :- धुँआ-धुँआ होता कानून

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2 आपकी गुफ्तगू:

kshama said...

Baapu pooree duniyake hain...lekin jis tarah se ye diwas manaya jata hai...bas ek aupcharikta kee tarah, bachhon ke bhee kya palle padega? Ham Krish janmashtamee, Raamnavamee, sab itna dhoom dhaam se manate hai, jo haad maas kaa mahatme ho gaya, jiske karan ek azad mulk apne teej tyohar marzee se mana sakta hai, use kewal aupcharikta wash yaad karte hain? Yaad bhee nahee karte...manme to kewal chhutee kee khushee hotee hai..aur kuchh nahee..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

जन्म-दिवस पर
महात्मा गांधी जी और
पं.लालबहादुर शास्त्री जी को नमन।

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