छोटा करे तो चोरी और बड़ा करे तो...


ना ना मै आपको कुछ नहीं कह रहा. मै तो उन चोरो के बारे में बात कर रहा हूँ जो आज आम आदमी की नाक में दम किये हुए है. भले ही वो नेता हो या राजनेता. या अपनी गरीबी को चंद मिनटों में दूर करने का सपना लिए चोरी करने वाले छोटे-मोटे चोर. आज जहां देखो चोर भरे पड़े है. फर्क मात्र इतना है की नेता और अधिकारी अन्दर ही अन्दर हमको अपनी चोरी का शिकार बना रहे है तो छोटा आदमी अगर अपनी पेट की आग मिटाने के लिए अगर छोटी-मोटी चोरी करे तो उसको चोर कहा जाता है.
यहाँ तक की पकडे जाने पर पहले उसको लोगो द्वारा की जाने वाली पिटाई का डर होता है और उसके बाद पुलिस के डंडे पड़ेंगे वो अलग से. जबकि बड़े चोरो को ऐसा कोई डर नहीं होता. ना तो यह लोग जल्दी से पकडे जाते है और कुछ वर्षो के बाद पकडे भी गए तो मार का क्या डर. लेकिन गौर करने वाली बात यह है की निशाना तो हम ही बन रहे है. जिसका जब बस चलता है चोरी कर जाता है, और हम पागलो की तरह हाथ मलते रह जाते है. बाद में हमारे पास बस बचती है करने को गुफ्तगू. 2010 में शायद ऐसा ही कुछ हुआ है.
अब यहाँ बड़े चोरो की बात नहीं की जाये तो ठीक रहेगा. क्योंकि उन्होंने बीते वर्ष में हमको और देश को इतना लूट लिया की कुछ भी कहने और सुनने को बाकी नहीं बचा. अब काम बचा तो सिर्फ मिडिया का. प्रतिदिन-प्रतिपल अब यही काम है की अब सीबीआई ने यह किया, यह करने वाली है. लेकिन स्थिति अभी भी वहीँ ठाक के तीन पात वाली बनी हुई है. अब तो देखना यह है की आगामी वर्ष में इन चोरो का क्या होता है. क्या यह पुलिस और सीबीआई की गिरफ्त में आयेंगे, क्या हमको इन बड़े चोरो से छुटकारा मिल पायेगा.
अब हिसार को ही ले लो. यहाँ आये दिन कभी सात दुकानों के ताले टूट रहे है तो कभी किसी बड़े शो रूम में लाखों की चोरी हो रही है. यहाँ तक की ठण्ड और धुंध का फायेदा उठा रहे चोरो ने हिसार के पुलिस अधीक्षक के आवास को भी अपनी चोरी का निशाना बनाने से नहीं बख्सा. अगर यह कहा जाये की ठण्ड और धुंध चोरो के लिए अवतार सिद्ध होती है तो गलत नहीं होगा जबकि बड़े चोरो के लिए तो पूरा साल अमावस्या की रात होती है. फर्क मात्र इतना है की चोरी के बाद छोटो को चोर और बड़ो को भ्रष्ट कहा जाता है.

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5 आपकी गुफ्तगू:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" said...

पुष्य और पाप की सही परिभाषा!

संजय कुमार चौरसिया said...

aapse sahmat hoon, bahut badiya baat ki aapne

Sharif Khan said...

चोरी के बजाए डाका लफ्ज़ इस्तेमाल करते तो बेहतर था क्योंकि ऐसी चोरी जो निडर होकर की जाए और सीनाजोरी के साथ हो वह डाका बन जाती है. जो कुछ आपने लिखा काबिले तारीफ़ है.
http://haqnama.blogspot.com/

shikha varshney said...

सही बात है .

DEEPAK SHARMA KULUVI दीपक शर्मा कुल्लुवी said...

BAHUT ACHHA LAGA AAPKA PARYAS

DEEPAK SHARMA KULUVI
09136211486

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तड़का मार के

* महिलायें गायब
तीन दिन तक लगातार हुई रैलियों को तीन-तीन महिला नेत्रियों ने संबोधित किया. वोट की खातिर जहाँ आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.

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यह विडम्बना ही है की कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार का जनक. कोई अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो कोई कांग्रेस शासन को कुशासन ...

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चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जो बीते कुछ समय में नगर हुई चोरी, हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ से सहमी हुई थी.

* अन्ना की क्लास में झूठों का जमावाडा
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* अगड़म-तिगड़म... देख तमाशा...
भारत देश तमाशबीनों का देश है. जनता अन्ना के साथ इसलिए जुड़ी, क्योंकि उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आन्दोलन एक बहुत बड़ा तमाशा नजर आया.
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