आखरी विकल्प- एनकाउंटर


एक के बाद एक हत्या के चलते अब तो यह लगने लगा है की या तो हरियाणा में कानून व्यवस्था का दिवाला निकल चुका है या फिर हिसार पुलिस प्रशासन हिसार जिले के हांसी में बदमाशो पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल हो चुका है. यही कारण है की यहाँ आये महीने किसी ना किसी व्यापारी की हत्या कर दी जाती है. बावजूद इसके आज तक ना तो कोई अपराधी पुलिस की पकड़ में आया है और ना ही पुलिस किसी नतीजे पर पहुंची है. इसी कारण अब तो यह लगने लगा है की अब हांसी रहने लायक नहीं रह गई है. अगर शुरुआत में पिछली हत्याओं का जिक्र ना भी करे तो वर्ष 2010 शुरू होते ही यहाँ के लोगो को चार दिन की चांदनी सुहानी लगने लगी थी, लेकिन उन्हें क्या पता था की फरवरी का महीना आते ही यहाँ के बदमाश मौत का तांडव शुरू कर देंगे. यही कारण रहा की 14 फरवरी को व्यापारी अमित चराया की हत्या से शुरू हुआ यह सिलसिला अब रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इसके तुरंत बाद 16 फरवरी को बदमाशो ने एक अन्य व्यापारी प्रवीन सोनी को अपना शिकार बनाया और उसकी भी हत्या कर दी.
एक के बाद एक हत्या से सकपकाई पुलिस के सभी दावे इस हत्या के पश्चात खोखले नजर आने लगे. बार-बार पुलिस के आला अधिकारी यही कहते सुने गए की पुलिस अपराधियों का सुराग लगा चुकी है तथा अपराधी जल्द ही पुलिस गिरफ्त में होंगे. लेकिन किसी को कानो कान खबर नहीं थी की मार्च शुरू होते ही बदमाश फिर से दस्तक दे देंगे. 17 मार्च को फिर से हत्या का सिलसिला शुरू हुआ और इस बार नंबर था व्यापारी सुरेश छाबड़ा का. अपराधियों ने उनके घर में घुस कर उनकी हत्या कर दी. लगभग दो महीने की शांति के बाद एक सप्ताह पहले नगर के प्रमुख व्यापारी देवराज लोहिया को धमकी मिली की या तो वो बदमाशो की मांग के अनुसार उन्हें पैसा दे दे या फिर परिणाम भुगतने को तैयार रहे. लेकिन उन्हें क्या पता था की बदमाशो की बात नहीं मानने का नतीजा यह होगा की उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा. 2 जून को दिन दहाड़े दो युवक मोटर साइकिल पर आये और अपनी दुकान पर बैठे देवराज लोहिया की हत्या कर दी. इस दौरान उन पर दो गोलिया चलाई गई. जो एक गर्दन में और दूसरी कमर में लगी.
अब बात पुरानी
मैंने जो चार हत्याओ को लेकर गुफ्तगू की है वो सिर्फ इतनी ही नहीं है. मैंने शुरू में ही कहा था की पुरानी घटनाओं की गुफ्तगू आगे की जाएगी तो मैं यह बताना चाहूँगा की हांसी में अब तक लगभग दस माह के भीतर एक दर्जन से अधिक मुख्य व्यापारियों की हत्या हो चुकी है. जबकि अब तक किसी भी हत्या की गुत्थी सुलझना तो दूर किसी अपराधी की गिरफ्तारी तक नहीं हुई है. जबकि छुटपुट घटनाए, वारदात और हत्या यहाँ हर रोज की बातो में शुमार हो चुकी है. ऐसा नहीं है की आज जो व्यापारी बदमाशो की नजर से बचे हुए है वो सुरक्षित है. उसका कारण यह है की या तो वो इन बदमाशो को मोटी रकम दे चुके है या फिर दे रहे है.
नाकाम पुलिस प्रशासन
प्रति माह हो रही इन हत्याओ को लेकर पुलिस कितनी सजग है अब आपको यह बताने की जरुरत नहीं है. लेकिन इससे ज्यादा पुलिस की नाकामी और क्या हो सकती है की 2 जून को हुई हत्या के तुरंत बाद उस मोटर साइकिल का नंबर पुलिस को बता दिया गया था जिस पर हत्यारे आये थे. बावजूद इसके पुलिस कातिलो को पकड़ने में नाकामयाब रही. साथ ही साथ पुलिस इस हत्या में जिस अपराधी पर शक कर रही है उसके लिए पुलिस के पास यह सुचना थी की उक्त अपराधी दो दिन से हांसी में मौजूद है. लेकिन पुलिस उसे खोज नहीं सकी. या फिर यह भी कह सकते है पुलिस सोनू पंडित नाम के इस अपराधी को खोजना ही नहीं चाहती थी.
इन हालातो को देख कर ही यह लगने लगा है की अब पुलिस के पास आखरी विकल्प- एनकाउंटर ही बचा है. ऐसा नहीं है की यह सिर्फ मैं बोल रहा हूँ. अगर आप मेरी आगे की गुफ्तगू पढेंगे तो आप भी यही कहेंगे की पुलिस के पास आखरी विकल्प- एनकाउंटर

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1 आपकी गुफ्तगू:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

उपयोगी और सार्थक पोस्ट!

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