जब हर नजर बलात्कार करती है


मेरे द्वारा की गई इस गुफ्तगू को मैं नाम देना चाहता था मेरी एक अनचाही पोस्ट. बहुत सोचा की मैं यह पोस्ट ना लिखू. क्योंकि कोई कहेगा की आज समय परिवर्तनशील है तो कोई मुझे ही दोष देगा की आखिर मुझे क्या पड़ी है. जैसा चल रहा चलने दो. लेकिन आखिरकार मैं अपने दिल को नहीं समझा पाया और पोस्ट लिख दी. इसका एक कारण था की मेरी यह गुफ्तगू सहज होने वाली उन बातो का हिस्सा नहीं है जिन बातो को आज की युवा पीढ़ी ने चिंताजनक बना दिया है. शायद इसीलिए मुझे इस गुफ्तगू को बलात्कार जैसे घिनौने अपराध से जोड़ना पड़ा. मैं भी क्या करता आज का माहौल देख कर मजबूर था. इसके अतिरिक्त लड़के-लडकियों सहित प्रत्येक माता-पिता को मेरी इस गुफ्तगू का हिस्सा बनाना चाहता था. अब कोई मुझे यह बताये की क्या आज हम यह मान ले की हमारे बच्चे आज सुरक्षित है. अगर लड़का है तो मारपीट का डर और अगर लड़की है तो लडको की कुदृष्टि का डर. शायद आज पूरे देश में यही माहौल है और नाम दिया जाता है की हम पश्चिमी सभ्यता में जी रहे है.
फिर ऐसी सभ्यता में साँसे लेकर क्या फायेदा जब आज कोई माता-पिता अपने बच्चो को सुरक्षित ही नहीं समझ रहा हो. भले ही वो आज कितना ही होनहार क्यों ना हो या पढ़ाई में अव्वल आता हो. बावजूद इसके अगर बच्चे घर-परिवार में समय से नहीं पहुँचता तो डर सताने लगता है. लेकिन फिर भी आज हम अपने बच्चो की तरह कोई ध्यान नहीं दे पा रहे है क्योंकि समय नहीं है. समय क्यों नहीं है इसके बारे में मैंने अपनी पिछली पोस्ट में जिक्र किया था की समय बलवान है. लेकिन यंहा बात है तो सिर्फ फैशन की. गर्मी को हम सभी देख ही रहे है की इस भीषण गर्मी ने किस कदर लोगो का जीना मुहाल किया हुआ है लेकिन सबसे चिंताजनक जो बात है वो यह की गर्मी के बहाने फैशन ने युवाओं को किस कदर अपनी गिरफ्त में ले लिया है. या यह कहा जाये की नाम गर्मी का और बोलबाला फैशन का. यही कारण है की आज लडकिया आधे-अधूरे कपडे पहन रही है. अगर यहाँ खूबसूरती का जिक्र ना कर सिर्फ पहनावे की बात की जाये तो आज साधारण से साधारण लड़की भी अगर स्लीवलेस है तो भी लड़के आहे भरने से नहीं चुकते. अगर इस पहनावे से ऊपर की बात की जाये तो जींस-टॉप, स्कर्ट या लैगिंग-टॉप तो मैं यही कहूँगा की वाकई मेरे देश के युवाओं का भविष्य  उज्व्वल नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है की ऐसे कपडे पहने हर लड़की पर लडको की कुदृष्टि सदा रहती है. लड़की कितनी ही कोशिश कर ले लडको की नजरो से बचने की लेकिन लड़के है की घूरने से नहीं चुकते. क्योंकि आज लडकियों की जींस निक्कर हो गई है तो टॉप बनियान. लडको द्वारा घूरने का सिलसिला जब तक चलता है तब तक तो ठीक है लेकिन एक समय ऐसा आता जब लड़के नजरो ही नजरो में लडकियों का बलात्कार करने पर आमदा हो जाते है. उस समय लडकिया कभी अपना टॉप संभालती नजर आती है तो कभी शरीर को ढकने की कोशिश करती है.
आप मुझ से ज्यादा समझदार है. अब आप ही बताएं की क्या वाकई हमारे युवाओ का भविष्य उज्जवल है या आने वाले समय में हर नजर ऐसे ही लडकियों का बलात्कार करती रहेंगी.

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9 आपकी गुफ्तगू:

Ram Krishna Gautam said...

"आज हर नज़र बलात्कार करती है, मानवता रो-रोकर पुकार करती है, कोई तो आए जो बदल दे इसे, फिजा भी इंतज़ार करती है..."


आदरणीय आपकी ये पोस्टिंग सचमुच बेहद विचारणीय है. आभार!!



"रामकृष्ण"

kshama said...

Jab bachhon ke palan kartaaon ko yah sab manzoor hai,to tesra koyi kya kar sakta hai?

Anonymous said...

अगर लड़की अपनी बॉडी दिखाना चाहती है तो सब देखेंगे और लड़की को अच्छा लगेगा. ये तो आपकी mentality है जो कह रही है की बाकी लोग तो बलात्कार कर रहे है और आप उनको जुडगे कर रहे है. आपको अपने आपको रोकना चाहिए था ये article लिखने से पहले.

Anonymous said...

जुडगे = judge

Ravi said...

लड़कियां ही ऐसी चाहती हैं...सबसे पहले तो उनका वस्त्र विन्यास...अगर यार वो भड़काऊ कपड़े पहनकर किसी को मूक आमंत्रण देंगी तो चाहे आप उसे हर नजर से बलात्कार कह सकते हैं या कुछ और भी...लेकिन क्या आपने गौर किया की...जब किसी ने सलीके से कपड़े और और आपने उसे भी उसी नजर देखा हो... जरा गौर किजिए...इस बात पर...अधनंगा बदन, जिस्म की नुमाइश करते कपड़े...वो खुला आमंत्रण नहीं तो और क्या है...लड़कियों कपड़े ही ऐसे क्यों पहनती है...कि उन्हें संभालने की जरूरत पड़े...अगर आधुनिकता के नाम पर शॉर्ट टॉप पहनेगी तो फिर श्‍ार्म किस बात की...इन लड़कियों से अच्छी तो मल्ल‍िका शेरावत हो जो इन सब बातों को खुले तौर पर स्वीकार तो करती है...इसलिए ये लेख आपका किसी भी नजर से सही नहीं है...

Devender Dangi said...

Goyal sahab, yeh toh nazar-nazar ka fark h, vaise har nazar balatkari nhi hoti.

Sorry, but you are wrong Mr. Goyal...

श्याम said...

महोदय,
आपके द्वारा उठाया गया यह मुद्दा बाकर्इ एक दम ज्वलंत मुद्दा है. आज हमारे छोटे शहरों में भी इस तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गर्इ हैं जैसा कि पहले चंद बड़े शहरों तक सीमित था. हम अभिभावकों को इस पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है.

Shashi said...

Excellent effort

Shravan Kumar said...

Mai ek school aur college mai larkiyon ko dekha. ek larki apne dost ke sath ghumti thi aaj uske sath to kal dusre ke sath. esi tarh se kuchh mahine bad khabar suna us larki ka rape ho gaya.
mai confuse ho gaya ki dos kiska hai. dosti ka ya larki ka. keyonki har lrki ko pta hai ki larka usse sex karna chahata hai, phir bhi vo usko uksati hai kyon.(byk par chipk kar baithna, sare aam gale lgana, apne hau bhau se yah batana ki use kisi bhi bat se fark nahi prta.)............... Next time

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