रावन तो हर वर्ष आता है राम मगर कब आओगे तुम




सबसे पहले आप सभी को गुफ्तगू की ओर से दशहरे की अनेको शुभकामनाये. भगवान् करे इस दशहरे पर आपके मन का रावन तो मर जाए लेकिन रावन की बुद्धि और उसका तेज आपको मिल जाये. 
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी रावन ने दस्तक दे दी है. जगह-जगह दशहरे की तैयारिया जोर-शोर से चल रही है. देश में विभिन्न स्थानों पर मनाये जाने वाले दश्हारो में फर्क सिर्फ पुतलो की उंचाई ओर उनमे जलने वाले पटाखों का होता है. दशहरे के आयोजन से संस्थाए जहा नाम कमाना चाहती है वही बड़े से बड़ा पुतला जला कर अन्य संस्थाओं से आगे भी निकलना चाहती है. यही कारण है की हिसार में चार स्थानों पर मनाये जाने वाले दशहरे में 40 से 60 फीट की उंचाई के पुतले जलाये है. यहाँ आयोजको में पुतलो के अन्दर बजने वाले पटाखों ओर आतिशबाजियो को लेकर भी होड़ रहती है की कौन सी संस्था सबसे अच्छी ओर ज्यादा आतिशबाजी का प्रदर्शन करती है. चलो जी यह बात तो हो गई दशहरे की और उसमे जलने वाले पुतलो की. लेकिन इतनी गुफ्तगू से कहने का भाव यही था की रावन प्रतिवर्ष आता है और रामलीला के कलाकार भगवान् राम की जय जयकार करते हुए रावन के पुतलो को आग लगा कर दशहरे का समापन भी कर देते है.

लेकिन आज मेरे दिमाग में एक बात घर कर गई की अक्सर सुनने में आता है की भगवान् राम के रूप में एक कलाकार प्रतिवर्ष रावन को मारता है लेकिन रावन है की हर वर्ष फिर से जीवित हो जाता है. जब रावन हर साल आता है तो कभी भगवान् राम क्यों नहीं आते. क्यों हर साल कलाकार ही रावन, मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतलो को आग लगाते है. रावन से बड़ा आज तक कोई तपस्वी नहीं हुआ, कोई बलशाली नहीं हुआ और ना ही कोई विद्धवान हुआ है. फिर भी बुराई पर अच्छाई की जीत मानते हुए हर साल दशहरा मनाया जाता है. जबकि आज घर-घर में और मन-मन में रावन छुपा बैठा है. किसी से बात कर के देख लो उसमे रावन जितना की गुस्सा भरा हुआ दिखता है. हर किसी के मन में चोर नजर आता है. हर कोई हवस का शिकारी बना घूम रहा है. सबसे ज्यादा रावन तो आज राजनीति में दिखाई देते है.

ऐसा नहीं है की यह सब आपको पता नहीं है लेकिन फर्क मात्र इतना है की कभी हम इस विषय पर सोचते नहीं है. जागरूकता तो है लेकिन जागने का समय नहीं है. तो क्या आपको लगता है की आज जिस माहौल में हम जी रहे है उसमे राम को आने की आवश्यकता है. जब रावन आ सकता है तो राम क्यों नहीं. तो मै इतना ही कहना चाहूँगा की अगर राम नहीं आ सकते तो हमको राम बनने की जरुरत है. तभी हम और हमारा परिवार सुरक्षित रह सकते है. नहीं तो आज देश में दो-तीन साल की मासूम लडकिया भी हवस के शिकारीयो से सुरक्षित नहीं रह गई है. जबकि पुरानी बात ना करूँ तो भ्रष्टाचार देश को किस कदर खोखला कर रहा है यह तो हम सभी ने कामनवेल्थ गेम्स में अच्छी तरह देखा और सुना है. जबकि राजनीति तो आज सिर्फ राज करने वालो के नाम ही हो गई है. भगवान् राम की तरह राज करने के दौरान जग भलाई तो बहुत पुरानी बाते हो गई है. जबकि रामलीलाओं और शिक्षा का स्तर आज क्या हो गया है वो मेरी तीनो पुरानी पोस्टो में मैंने बताया है.
अंत में मै तो यही कहना चाहूँगा की जिस तरह हर वर्ष लाखो रुपया खर्च कर रावन को जलाया जाता है तो क्यों नहीं देश का अरबो रुपया बचाने के लिए राम को बुलाया जाता. जब धरती पर रावन आ सकता है उसी तरह अब धरती पर भगवान् राम को भी आना पड़ेगा या फिर हम सबको ही राम बनना पड़ेगा.

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2 आपकी गुफ्तगू:

अनुपमा पाठक said...

ram aayenge; is kalyug mein hamari bhakti unhe kheench laye... aur ram ke aagaman se mahaul prakashit ho jaye!
hamare andar ke dev ka jagran isi vijadashmi par ho....
regards,

S.M.MAsum said...

आज का रावण रूपी इंसान, राम की तारीफ तो करता है, लेकिन फिर से आने नहीं देना चाहता.

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