भाजपा, नीति और नियत


आज देश में जितनी भी राजनितिक पार्टिया है वो सभी सत्ता हासिल करने के लिए ही बनी है। भले ही उन्हें इसके लिए वाद-विवाद करना पड़े या सत्ता पर काबिज होने के लिए झगडा। मकसद एक ही है की किसी तरह सत्ता का स्वाद चखना है। फ़िर चाहे वो अपनी बात से मुकर जाए या उन्हें याद ही न हो की अभी कुछ दिनों पहले या चंद समय पहले उन्होंने क्या कहा था। लेकिन अगर कोई पत्रकार उनकी मंशा को भांप जाए और उनकी कथनी और करनी को लेकर कोई सवाल दाग दे तो गिरगिट की तरह ऐसे रंग बदल जाते है जैसे वो यह सब कुछ सत्ता हासिल करने के लिए नही बल्कि जनता के लिए ही कर रहे है। अब भाजपा को ही देख लो। कहने को तो यह पार्टी राष्ट्रीय है और देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते इस समय विपक्ष में बैठी है। लेकिन इस समय भाजपा के पास जहा नेताओ की भारी कमी खल रही है वही लोकसभा चुनावो के बाद नियत भी साफ़ नजर नही आ रही है। यही कारण है की जहा लोकसभा चुनावो से पहले भाजपा क्षेत्रीय दलों को नकार रही थी वही लोकसभा चुनाव में उसने किस तरह इन दलों का साथ लिया वो सभी ने देखा। भाजपा और कांग्रेस अक्सर कहती आई है की देश में सिर्फ़ राष्ट्रीय पार्टिया ही होनी चाहिए लेकिन जिस तरह सत्ता सुख पाने के लिए ये राजनितिक दल अपनी नीति और नियत दिखाते आए है उससे आम आदमी अक्सर अपने को ठगा सा महसूस करता है। कांग्रेस और भाजपा जहा आज कई प्रदेशो में क्षेत्रीय दलों के साथ मिल कर सरकार चला रही है वो कबीले गौर है और हरियाणा में भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए क्या-क्या समीकरण बिठाने की कोशिश की वो भी सभी को पता है। हरियाणा में अपने को उभारने के लिए भाजपा ने पहले ओमप्रकाश चौटाला नित इनलो से समझौता किया तो लोकसभा चुनावो में मुहं की खाने के बाद इनलो से दामन छुडाने के पश्चात् भजनलाल नित हरियाणा जनहित कांग्रेस का दामन थामने की कोशिशे की लेकिन दाल नही गली। इस पर अगर भाजपा नेता यह कहे की भाजपा चाहती है की देश में सिर्फ़ क्षेत्रीय दल ही राजनीति में रहे तो ऐसा लगता है की भाजपा मजाक कर रही है। अब हरियाणा भाजपा के सहप्रभारी हरजीत सिंह ग्रेवाल को ही देख लो। कहने को तो उनका नाम व् पद बहुत बड़ा है लेकिन आज वो यह नही समझ पाए की मिडिया के आगे वो क्या बोल गए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा की हरियाणा में उनका मुकाबला सीधे कांग्रेस से है क्योंकि अब देश में क्षेत्रीय पार्टियों का कोई वजूद नही रह गया है। साथ ही वो बोल गए की प्रदेश में अब भाजपा को किसी गठबंधन की कोई आवश्यकता नही है। लेकिन जब मैंने इस बात पर उनसे पूछा की भाजपा प्रदेश विधानसभा चुनावो को लेकर किसी क्षेत्रीय दल से गठबंधन को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित थी तो गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए वो बोले की वो इस लिए की कांग्रेस को सत्ता से दूर करना आज की जरुरत है। जबकि भाजपा ने जो प्रत्याशी आज मैदान में उतारे है वो सत्ता सुख के लिए नही अपितु जनता की सेवा के लिए चुनाव मैदान में है। जब उनसे पूछा गया की अगर भाजपा क्षेत्रीय पार्टियों को इतना ही अछूत मानती है तो कई प्रदेशो में आज भी भाजपा क्षेत्रीय दलों के साथ मिल कर सरकार चला रही है तो उन्होंने कहा की वो इसलिए की भाजपा ने सरकार में रहते हुए महंगाई को रोक कर रखा था लेकिन कांग्रेस ने जिस तरह महंगाई को बढ़ावा दिया है उससे आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। इसलिए भाजपा चाहती है की किसी भी तरह सरकार बना कर कांग्रेस को सत्ता से दूर रखा जाए।
तो दिखावा किस बात का
अब आप स्वयं ही समझदार है की भाजपा नेता क्या बोलना चाहते है और क्या बोल रहे है। अब यह कौन जाने की भाजपा सत्ता सुख पाना चाहती है की महंगाई को दूर रखने के लिए कांग्रेस को सत्ता से बाहर। लेकिन इनको कौन समझाए की किसको सत्ता में रखना है और किसको नही यह तो मतदान के दिन विचार करके ही जनता मतदान करती है। लेकिन यह राजनीति है यहाँ सब कुछ दिखावे के लिए ही होता है जनता की किसको पड़ी है। क्योंकि सत्ता तो सत्ता ही है।

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1 आपकी गुफ्तगू:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"इनको कौन समझाए की किसको सत्ता में रखना है और किसको नही यह तो मतदान के दिन विचार करके ही जनता मतदान करती है। लेकिन यह राजनीति है यहाँ सब कुछ दिखावे के लिए ही होता है जनता की किसको पड़ी है। क्योंकि सत्ता तो सत्ता ही है।"

क्योंकि इन्होंने कानों में तेल डालकर ऊपर से रूई जो ठूँस रखी है।

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