नया वर्ष - नए सपने - नई दुआए


हर वर्ष की भाँती इस वर्ष भी नया साल नए आगाज के साथ हमारे सामने है. लेकिन गुफ्तगू का विषय यह है की बीता वर्ष सभी के लिए कैसा रहा. कोई कहेगा की ठीक है यार जैसा था बीत गया तो कोई कहेगा की पता ही नहीं चला की एक साल कैसे बीत गया. सब अपना-अपना तर्क देने के बाद फिर से अपने काम में जुट जाते है. लेकिन आओ आज नई दुआओं के साथ नववर्ष में नए सपने संजोते हुए हम कामना करे की जो कुछ बीते वर्ष में हमको झेलना पड़ा, नए साल में हमको उससे मुक्ति मिले और जो हमको अच्छा मिला उसमे वृद्धि हो. दिली तमन्ना है की बीता साल सभी के लिए सुखद रहा हो. इतना जरुर है की बीते वर्ष में अनेक लेखे-जोखे और घटनाक्रम समय-समय पर समाचार पत्र-पत्रिकाओ की सुर्खिया बने रहे.
जहाँ पूरे साल एक के बाद एक भ्रष्टाचार के खुलासों ने आम जनता के नाक में दम किये रखा वहीँ भारत का क्रिकेट विश्वकप जीतना दिल को सुकून देने वाला था. देश में बढती महंगाई के साथ-साथ पैट्रोल के दामों ने जहाँ आग में घी डालने का काम किया वहीँ दुनिया में आई आर्थिक मंदी ने लोगों की धड़कने तेज किये रखी. इन सबके साथ-साथ वर्ष भर राजनीति भी खूब हावी रही. कभी कलमाड़ी, कभी ए राजा तो कभी कनिमोड़ी के मुद्दे पर राजनीति में घमासान मचा रहा तो काले धन पर बाबा रामदेव, भ्रष्टाचार पर स्वामी अग्निवेश तो लोकपाल बिल पर अन्ना हजारे के अनशन ने सरकार की नाक में दम किये रखा. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए चुनावों के कारण भी राजनीति में अस्थिरता का माहौल रहा.
हिसार भी बीते वर्ष के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाने में कामयाब रहा. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की मृत्यु जहाँ दुखद रही वहीँ कुलदीप बिश्नोई का भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे गया. इतना ही नहीं हिसार लोकसभा उपचुनाव में अन्ना हजारे का कांग्रेस के खिलाफ प्रचार हिसार के नाम को बुलंदियों पर ले गया वहीँ इस सीट को जीतने के लिए मुख्यमंत्री हुड्डा और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के सभी साम-दाम-दंड-भेद को धत्ता बताते हुए कुलदीप बिश्नोई यह चुनाव जीतने में सफल हुए. जीत का जश्न समाप्त होता की आदमपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई विजयी हुई. उधर जनता गैस और बिजली के लिए त्राहि-त्राहि करती रही.
अब बहुत हुआ, आओ दुआ करे
जो कुछ मैंने लिखा ऐसा नहीं है की आप पहली बार पढ़ रहे है. मेरा तो उद्देश्य ही यही है की मैं समाचारों के दूसरे पहलू को आपके सामने रख सकूँ. लेकिन जरुरत है तो सिर्फ जन जागरण की, सोचने की और सोच कर विचार करने की क्या इन हालातों में हम चैन की सांस ले सकते है. क्या हमारा देश आगे बढ़ सकता है. अगर नहीं तो आइये सब मिल कर नववर्ष में दुआ करे की महंगाई, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता व् राजनीति में परिवारवाद जड़ से ख़त्म हो. आने वाला साल राजनीति से मुक्त वर्ष हो और देश में लोकपाल बिल आये जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके ताकि हर इंसान का चेहरा खिला-खिला रहे.


हमने मनाई राजनीतिक दीवाली


गुफ्तगू की ओर से सभी पाठकों, नियमित पाठकों, समर्थकों व् मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं. 


भले ही हिसार उपचुनाव संपन्न हो चुका हो. चुनाव परिणाम भी आ चुका है. मुद्दा यह नहीं की इस चुनाव में कौन जीता कौन हारा. लेकिन इतना जरुर है की सब कुछ होने के पश्चात भी जनता है की हिसार उपचुनाव को भुला नहीं पा रही है. शायद यही कारण रहा की चुनाव के पश्चात वोटों की गिनती और उसके बाद दिवाली के कारण आज बहुत दिनों बाद आपसे गुफ्तगू कर रहा हूँ. क्या करूँ मैं भी आपकी ही तरह दीपों का पर्व दिवाली मनाने में व्यस्त था, तो साथ ही साथ इस बात पर भी मेरा विशेष ध्यान था की अभी कुछ दिनों पहले तक उपचुनाव को लेकर नेताओं द्वारा जो वादे जनता से किये जा रहे थे वो आज कहा काफूर हो गए. 
अब देखो ना आप ख़ुशी-ख़ुशी दीवाली मना रहे थे और मैं और मेरे शहर की जनता राजनीतिक दिवाली मनाने पर मजबूर थे. हमारा राजनीतिक दीवाली मनाने का मुख्य कारण था हिसार लोकसभा उपचुनाव के पश्चात हिसार में एकाएक हुई अपराधिक वारदाते. दिवाली के अवसर पर भी रह-रह कर वो हसीन पल याद आ रहे थे जो हमने चुनाव के दिनों में बिताये थे. चुनाव के दिनों में ना सिर्फ जनता को पूरा दिन बिजली मिली वहीँ कोई अपराधिक घटना होना तो दूर की बात है अपराधी भी ढूंढे से भी नहीं मिल रहे थे. मानो उन्हें या तो कोई काम मिल गया है या फिर जनता के वोट हथियाने की खातिर कोई और काम दे दिया गया है.
एक दिन वो थे जब हिसार के लिए ऐसा कोई दिन नहीं जाता था जब अपराधी कोई भी दिन ऐसा छोड़ते हो जिस दिन वो अपने मंसूबो को अंजाम नहीं देते हो. महिलाओं के लिए चैन स्नेचिंग जहाँ सिरदर्द बनी हुई थी वहीँ व्यापारियों के लिए आये दिन प्रतिष्ठानों के ताले टूटना जी का जंजाल बना हुआ था. हत्या, हत्या प्रयास, चोरी व् धमकी जहाँ आम बात हो गई थी वहीँ बिजली की आँख मिचौली से जनता परेशान थी. नेताओं द्वारा चुनाव के दिनों में दिखाए गए हसीन सपने लिए जैसे ही जनता दिवाली की खुमारी में अभी खोई ही थी की अपराधियों ने हिसार को फिर से अपने आगोश में ले लिया. 
चैन स्नेचिंग का मामला प्रकाश में आया तो एक युवक की हत्या कर दी गई. पुलिस अभी इस मामले को सुलझा पाती की दीवाली से एक दिन पूर्व एक जूते के शोरुम पर गोली चला बदमाश फिरौती की मांग कर गए. अभी दिवाली गई ही थी की शनिवार को आदमपुर के समीप एक युवक का पहले गला रेता फिर उस पर गोलियां दाग कर हत्या कर दी गई. चुनाव के दिनों में हर चौराहे पर दिखने वाली पुलिस भी अपराधियों का कोई सुराग नहीं लगा पा रही है. हद तो उस समय हो गई जब इतना सब कुछ होने के पश्चात भी चुनाव के दिनों में गली-गली दिखने वाला कोई नेता जनता के बीच नजर नहीं आया. कहीं-कहीं नजर आये तो सिर्फ उनके प्रतिनिधि.


ट्रैक्टर पर हो के सवार चला रे


हरियाणा के मुख्यमंत्री प्रदेश के लिए नारा देते है नंबर वन हरियाणा. उनका कहना ठीक है की आज हरियाणा नंबर वन है. लेकिन कोई उनसे पूछे की किस चीज में, तो शायद जो वो कहेंगे उनमे से एक भी चीज में नहीं. ना यहाँ बिजली है, ना पानी. रही-सही कसर सड़के और अपराध पूरी कर देते है. इस पर भी अगर कोई जवाब या सुना-सुनाया जुमला सुना दिया जाये तो मिर्चपुर प्रकरण और जाट आरक्षण की आग अभी तक बुझी नहीं है. तो अब आप कहेंगे की फिर हरियाणा नंबर वन कैसे है. वो ऐसे की पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ताबड़तोड़ बेमौसमी रैलियाँ कर हरियाणा को नंबर एक पर ला दिया. उसके बाद इनलो व् हरियाणा जनहित कांग्रेस ने भी प्रदेश में बेमौसमी रैलियाँ कर मुख्यमंत्री हुड्डा का साथ दिया. अब भाजपा भी इसी नक़्शे कदम पर चल रही है. यह तो भविष्य की गर्भ में है की इन रैलियों का किस को क्या फायेदा मिलता है लेकिन इतना जरुर है की जनता सब कुछ देख-समझ रही है की मौजूदा समय में हरियाणा नंबर वन क्यों है.
वैसे राजनितिक तौर पर हरियाणा हमेशा ही नंबर वन रहा है. क्योंकि यहाँ की राजनीति हमेशा तिकोनी रही है. एक समय था जब यह तीन लालो का ढंका बजता था. देवी लाल, भजन लाल और बंसी लाल. लेकिन समय के साथ और बंसी लाल की मृत्यु के साथ हरियाणा विकास पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया. अब बचे दो लाल, उसमे से भजन लाल ने अपनी अलग पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस बना ली. तो अब कुल मिला कर लालो के प्रदेश में ओम प्रकाश चौटाला अकेले कमान संभाल रहे है. ऐसे में कांग्रेस और इनलो हर दम आमने-सामने रहते है. लेकिन इस बीच चर्चा में कोई रहता है तो वो है भजन लाल के पुत्र और हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई. वो समय-समय पर अपने बयानों और क्रिया-कलापों से सुर्खियाँ बटोरते रहते है. कहने को तो वो अपने को प्रदेश का आगामी मुख्यमंत्री बताते है लेकिन यह वो भी भली-भांति जानते है की अकेले मुख्यमंत्री बनना तो दूर प्रदेश की राजनीति में चलना भी उनके लिए बहुत कठिन है.
लेकिन मजे की बात यह है की इन दिनों कुलदीप बिश्नोई किसी साइकिल, जानवर, गाड़ी या पैदल नहीं बल्कि ट्रैक्टर पर बैठ कर प्रदेश का दौरा कर रहे है. आपको यह भी बता दें की चुनाव आयोग द्वारा उनकी पार्टी हजकां का चुनाव चिन्ह बदल कर अब ट्रैक्टर कर दिया है. यहीं कारण है की अब वो जहां कभी भाजपा के डर पर दीखते है तो कभी ट्रैक्टर पर बैठ कर किसी गाँव के दौरे पर. कभी वो रैली में देसी घी का हलवा बाँट रहे है तो कभी महंगाई, भ्रष्टाचार और बिजली-पानी के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार की खिंचाई करते नजर आते है. जबकि बीते विधानसभा चुनावों में हजकां की टिकट पर जीतने वाले 5 विधायक जो अब कांग्रेस में शामिल हो चुके है उनका क्या होगा यह शायद कुलदीप बिश्नोई भी नहीं जानते. इतना जरुर है की इस मुद्दे पर वो सिर्फ मुख्यमंत्री हुड्डा, पांचो विधायको और विधानसभा स्पीकर को सिर्फ कोस ही सकते है. चलो जी अब जब कुलदीप बिश्नोई ट्रैक्टर पर बैठ कर निकल ही पड़े है तो उसकी रफ़्तार क्या रंग दिखाती है यह तो आगामी चुनावों में ही पता लगेगा.


आजादी, महंगाई और कांग्रेस


पूरे देश ने स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम से मनाया. सभी प्रदेशो, जिलो, तहसील, उपमंडल और यहाँ तक स्कूल-कालेजो में तिरंगा फहरा कर देशवाशियो ने अपनी आजादी का जश्न मनाया. दिल्ली में प्रधानमन्त्री ने अपना भाषण दिया तो कही पर प्रदेशो के मुख्यमंत्रियों ने. यहाँ तक की मंत्री-संतरी से लेकर विभिन्न पार्टियों के नेताओ ने जनता को आजादी कैसे मिली यह पाठ तो जरुर पढाया लेकिन आज देश जिस स्थिति में आजादी झेल रहा है उस पर किसी ने प्रकाश नहीं डाला. शाम होते-होते मिडिया को जरुर याद आई की आज हम जिस आजादी की बात कर रहे है सही मायेने में वो आजादी नहीं है. शाम को मैं एक खबरिया चैनल देख रहा था तो उसमे बताया गया की प्रधानमंत्री किस तरह देश के मुख्य मुद्दों पर चुप्पी साधे रहे. जबकि महंगाई और आतंकवाद पर वो खुल कर बोले. इस चैनल ने दिखाया की आज देश के सामने जो पांच मुख्य समस्याए है उनके रहते हम नहीं कह सकते की आज हम आजाद है. मैं यहाँ जरुर बताना चाहूँगा की उन समस्याओ का जिक्र मैंने कल दोपहर को ही कर दिया था. जिस आजाद भारत की तरक्की की बात की जा रही है सही मायेने में वो तरक्की नहीं है.
मेरी यह पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे. आजाद भारत की आजाद तरक्की
अब आज की गुफ्तगू. तो मैं बता रहा था की कल मैंने भी लिखा था और यह चैनल भी बता रहा था की किस तरह आज देश की एक बड़ी आबादी आनाज के बिना भूखी सो रही है और देश का हजारो टन आनाज बरसात में सड़ रहा है. जिसकी और सरकार या प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है. दो दिन पूर्व मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स पर भी लिखा था की जहा बड़े अधिकारी अपनी जेबे भरने में लगे है वही इन खेलो को लेकर भारत की आन-बान-शान खतरे में है.
इस पोस्ट को पढने के लिए क्लिक करे. आजाद भारत के.....
इन दोनों पोस्टो के साथ ही मैंने एक और पोस्ट लिखी थी क्लिक करे अब एक और स्वतंत्रता दिवस. यह सब पोस्ट लिखने के बाद मुझे लगाता है की भारत की आजादी और उसकी तरक्की को लेकर बहुत कुछ लिख दिया. लेकिन 15 अगस्त को प्रधानमन्त्री का भाषण जिस मुद्दे पर अटका रहा वो मुद्दा था महंगाई का. जिसका जिक्र मैं कल नहीं कर पाया. लेकिन कल शाम को जब मैंने यह भाषण सुना तो मेरे मोबाइल पर आया एक एसएमएस मेरे दिलो-दिमाग पर घुमने लगा. लगा की इस एसएमएस में जो लिखा है वो सही सन्देश दे रहा है.
एक बार की बात है की जब एक गरीब को कही भी खाने के लिए अनाज नहीं मिला तो वो एक नदी किनारे जा बैठा. खाने के बारे में सोचते-सोचते उसने एक मछली पकड़ ली और घर ले आया. बड़ी ख़ुशी से उसने वो मछली अपनी पत्नी को दिखाई और कहा की आज इस से ही पेट भरना पड़ेगा. लेकिन गरीब की ख़ुशी कुछ ही देर में काफूर हो गई जब उसकी पत्नी ने कहा की:-
घर में ना गैस है, ना बिजली है, ना तेल है और ना ही पैसा है. 
गरीब मरता क्या ना करता. वो वापिस नदी पर गया और मछली को पानी में छोड़ दिया. मछली ख़ुशी-ख़ुशी चिल्लाने लगी:- कांग्रेस जिंदाबाद, कांग्रेस जिंदाबाद. 


शराब पर भारी पानी


बहुत दिन हो गए. आपके बीच नहीं आ पाया. इसका मुझे मलाल भी है लेकिन ख़ुशी इस बात की है की घर में इस दौरान दो शुभ कार्यक्रम हुए. जिस कारण मैं कोई गुफ्तगू नहीं कर पाया. लेकिन कोई बात नहीं, मौसी के लड़के की शादी और मेरी बहन की सगाई की जो ख़ुशी आज मैं आपसे बाँट रहा हूँ उसे मैं सदा याद रखूँगा. लेकिन एक बात जरुर है की बीते दस दिनों में मुझे मेरे सभी पाठको, समर्थको और नियमित पाठको की बहुत याद आई. इसका जो मुख्य कारण था वो यह की इस दौरान देश-प्रदेश सहित मेरे शहर हिसार में बहुत कुछ घटित हुआ. कुछ जिलो में नगर परिषद्, पंचायत व् नगर पालिकाओ के चुनाव हुए तो देश की शांति को भंग करने वाले नक्सलियों को वार्ता की पेशकश की गई. मिर्चपुर मामले को लेकर संसद का घेराव तक किया गया वहीँ राहुल बाबा ने दोबारा हिसार आकर राजनीति को हवा दी तो ट्रेन हादसे ने भी जनता को हिला कर रख दिया. इन सब से परे हिसार में एक लड़की की अश्लील फोटो खिंच कर तीन साल तक ब्लैक मेलिंग के जरिये रेप किया गया तो गलत दिशा से आ रहे एक ट्रक ने ओवर ब्रिज पर एक व्यक्ति की जान ले ली.
इन सब के बावजूद मैं पिछले काफी समय से सोच रहा था की राजनीति पर कुछ लिखू. लेकिन कुछ तो समय का अभाव और गर्मी में हाल बेहाल. फिर भी मैंने जैसे-तैसे कर कुछ लिख कर छोड़ दिया था. जिसे मैं आज आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. बात कुछ ऐसी है की अभी हाल ही में हरियाणा के कुछ जिलो में नगर परिषद्, पालिकाओ और पंचायत के चुनाव संपन्न हुए है. मुद्दा यह नहीं है की इन चुनावों में कौन जीता, कौन हारा. बात सिर्फ इतनी सी है की इन चुनावों में क्या-क्या हुआ. कैसे-कैसे हुआ और क्यों हुआ. जैसा की सभी जानते है की उत्तर भारत में गर्मी इन दिनों चरम पर है. तो यह भी लाजमी है की इतनी गर्मी में भले ही मुख्यमंत्री बिजली-पानी के लिए कितने की बड़े-बड़े दावे कर ले लेकिन जनता की पूर्ति करना बहुत मुश्किल है. ऐसे में जनता भी बेचारी क्या करे. उसके पास एक ही रास्ता बचता है की धरना और प्रदर्शन. फिर भले की किसी को परेशानी हो रही हो या किसी को दुःख तकलीफ. यही कारण है की हिसार के उपायुक्त को यह सन्देश देना पड़ा की जनता ऐसा ना करे अगर उन्हें कोई तकलीफ है तो जनता उनसे सीधे मिले.
यहाँ बात हो रही थी चुनावों की. ऐसा नहीं है की चुनावों में खड़े प्रत्याशियों को गर्मी के साथ-साथ बिजली-पानी के पसीना नहीं बहाना पड़ा हो. प्रत्याशियों पर बिजली-पानी के लिए इतना दबाव था की किसी को यह पता नहीं था की इन चुनावों में कौन जीतेगा और कौन हारेगा. यहाँ तक की मतदाता को खुश करने के सभी तरीको के अलावा शराब भी इन चुनावों में कोई काम नहीं आई. जनता की सिर्फ एक ही मांग थी की बिजली-और पानी. जिसका की आज पूरे प्रदेश में बुरा हाल है. स्वयं प्रत्याशी मानते है की जनता को खुश करने के लिए इतना पैसा आज तक के चुनावों में शराब या अन्य तरीको पर नहीं लगा जितना की अब की बार जनता के दरवाजो पर पानी भिजवाने में खर्च हुआ है. तो क्या हम यह बात मान ले की चुनाव आयोग भले ही प्रत्याशियों पर कितना ही शिकंजा कस ले प्रत्याशी तो चुनावी खर्च अपने तरीके से ही करेंगे. कहने का भाव यह है की सभी को जीत सुनिश्चित करनी है फिर काहे का चुनाव आयोग और कैसा पैसा. लेकिन प्रत्याशियों को इन चुनावों में यह गाने का जरुर अवसर मिला की "महंगा हुआ पानी की थोडा-थोडा पिया करो".
चलते-चलते 
एक तो शादी का मौसम, उस पर घर में शादी तो ऐसा नहीं हो सकता की हिसार के पुराने ओवर ब्रिज पर से गुजरना ना हो. लेकिन एक रात मैंने जो नजारा देखा उसे देख में स्तब्ध रह गया. एक तो यह पुल तीन साल से ठीक होने का नाम नहीं ले रहा है उस पर रात 8 बजे नो अंटरी खुलने के बाद ओवर लोडिड ट्रक ओवर ब्रिज का एक हिस्सा बंद होने के कारण गलत दिशा से जा रहे थे. अगले ही दिन समाचार पत्र में पढ़ा की रात को ट्रक और एक कार की दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई. पुलिस अधीक्षक ने इस घटना पर तुरंत कार्यवाही करते हुए पुल की 24 घंटे निगरानी के लिए पुलिस दल तैनात किया है.


आओ करे दुआ महंगाई और भ्रष्टाचार से मुक्त वर्ष की


नया साल नए आगाज के साथ हमारे सामने है. माना की यह बात पुरानी हो चुकी है और सभी जानते भी है की नववर्ष आ चुका है. लेकिन गुफ्तगू का विषय यह है की बीता वर्ष सभी के लिए कैसा रहा. इस पर सभी के अपने-अपने मत होंगे. कोई कहेगा की ठीक है यार जैसा था बीत गया तो कोई कहेगा की पता ही नहीं चला की एक साल कैसे बीत गया. और कुछ ऐसा ही कहने के बाद हम फिर से अपने-अपने काम में जुट जाते है. लेकिन साथ ही कामना करते है की जो कुछ बीते वर्ष में हमको झेलना पड़ा नए साल में हमको उससे मुक्ति मिले और जो हमको अच्छा मिला उसमे वृद्धि हो. दिली तमन्ना है की बीता साल सभी के लिए सुखद रहा हो बावजूद इसके अनेक लेखे-जोखे समय-समय पर समाचार पत्र-पत्रिकाओ की सुर्खिया बने रहे. बीते वर्ष में देश को एक तो कुछ प्रदेशो को दो-दो चुनावो का सामना करना पड़ा. हरियाणा भी दो चुनावो से अछुता नहीं रहा. हरियाणावाशियों को पहले लोकसभा तो बाद में


अंग्रेजी से हिन्दी में लिखिए

तड़का मार के

* महिलायें गायब
तीन दिन तक लगातार हुई रैलियों को तीन-तीन महिला नेत्रियों ने संबोधित किया. वोट की खातिर जहाँ आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.

* शायद जनता बेवकूफ है
यह विडम्बना ही है की कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार का जनक. कोई अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो कोई कांग्रेस शासन को कुशासन ...

* जिंदगी के कुछ अच्छे पल
चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जो बीते कुछ समय में नगर हुई चोरी, हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ से सहमी हुई थी.

* अन्ना की क्लास में झूठों का जमावाडा
आज कल हर तरफ एक ही शोर सुनाई दे रहा है, हर कोई यही कह रहा है की मैं अन्ना के साथ हूँ या फिर मैं ही अन्ना हूँ. गलत, झूठ बोल रहे है सभी.

* अगड़म-तिगड़म... देख तमाशा...
भारत देश तमाशबीनों का देश है. जनता अन्ना के साथ इसलिए जुड़ी, क्योंकि उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आन्दोलन एक बहुत बड़ा तमाशा नजर आया.
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