आजादी, महंगाई और कांग्रेस


पूरे देश ने स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम से मनाया. सभी प्रदेशो, जिलो, तहसील, उपमंडल और यहाँ तक स्कूल-कालेजो में तिरंगा फहरा कर देशवाशियो ने अपनी आजादी का जश्न मनाया. दिल्ली में प्रधानमन्त्री ने अपना भाषण दिया तो कही पर प्रदेशो के मुख्यमंत्रियों ने. यहाँ तक की मंत्री-संतरी से लेकर विभिन्न पार्टियों के नेताओ ने जनता को आजादी कैसे मिली यह पाठ तो जरुर पढाया लेकिन आज देश जिस स्थिति में आजादी झेल रहा है उस पर किसी ने प्रकाश नहीं डाला. शाम होते-होते मिडिया को जरुर याद आई की आज हम जिस आजादी की बात कर रहे है सही मायेने में वो आजादी नहीं है. शाम को मैं एक खबरिया चैनल देख रहा था तो उसमे बताया गया की प्रधानमंत्री किस तरह देश के मुख्य मुद्दों पर चुप्पी साधे रहे. जबकि महंगाई और आतंकवाद पर वो खुल कर बोले. इस चैनल ने दिखाया की आज देश के सामने जो पांच मुख्य समस्याए है उनके रहते हम नहीं कह सकते की आज हम आजाद है. मैं यहाँ जरुर बताना चाहूँगा की उन समस्याओ का जिक्र मैंने कल दोपहर को ही कर दिया था. जिस आजाद भारत की तरक्की की बात की जा रही है सही मायेने में वो तरक्की नहीं है.
मेरी यह पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे. आजाद भारत की आजाद तरक्की
अब आज की गुफ्तगू. तो मैं बता रहा था की कल मैंने भी लिखा था और यह चैनल भी बता रहा था की किस तरह आज देश की एक बड़ी आबादी आनाज के बिना भूखी सो रही है और देश का हजारो टन आनाज बरसात में सड़ रहा है. जिसकी और सरकार या प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है. दो दिन पूर्व मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स पर भी लिखा था की जहा बड़े अधिकारी अपनी जेबे भरने में लगे है वही इन खेलो को लेकर भारत की आन-बान-शान खतरे में है.
इस पोस्ट को पढने के लिए क्लिक करे. आजाद भारत के.....
इन दोनों पोस्टो के साथ ही मैंने एक और पोस्ट लिखी थी क्लिक करे अब एक और स्वतंत्रता दिवस. यह सब पोस्ट लिखने के बाद मुझे लगाता है की भारत की आजादी और उसकी तरक्की को लेकर बहुत कुछ लिख दिया. लेकिन 15 अगस्त को प्रधानमन्त्री का भाषण जिस मुद्दे पर अटका रहा वो मुद्दा था महंगाई का. जिसका जिक्र मैं कल नहीं कर पाया. लेकिन कल शाम को जब मैंने यह भाषण सुना तो मेरे मोबाइल पर आया एक एसएमएस मेरे दिलो-दिमाग पर घुमने लगा. लगा की इस एसएमएस में जो लिखा है वो सही सन्देश दे रहा है.
एक बार की बात है की जब एक गरीब को कही भी खाने के लिए अनाज नहीं मिला तो वो एक नदी किनारे जा बैठा. खाने के बारे में सोचते-सोचते उसने एक मछली पकड़ ली और घर ले आया. बड़ी ख़ुशी से उसने वो मछली अपनी पत्नी को दिखाई और कहा की आज इस से ही पेट भरना पड़ेगा. लेकिन गरीब की ख़ुशी कुछ ही देर में काफूर हो गई जब उसकी पत्नी ने कहा की:-
घर में ना गैस है, ना बिजली है, ना तेल है और ना ही पैसा है. 
गरीब मरता क्या ना करता. वो वापिस नदी पर गया और मछली को पानी में छोड़ दिया. मछली ख़ुशी-ख़ुशी चिल्लाने लगी:- कांग्रेस जिंदाबाद, कांग्रेस जिंदाबाद. 

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2 आपकी गुफ्तगू:

हमारीवाणी.कॉम said...

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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

क्या कहें!
कहीं न कहीं हम सब दोषी हैं!

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तड़का मार के

* महिलायें गायब
तीन दिन तक लगातार हुई रैलियों को तीन-तीन महिला नेत्रियों ने संबोधित किया. वोट की खातिर जहाँ आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.

* शायद जनता बेवकूफ है
यह विडम्बना ही है की कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार का जनक. कोई अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो कोई कांग्रेस शासन को कुशासन ...

* जिंदगी के कुछ अच्छे पल
चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जो बीते कुछ समय में नगर हुई चोरी, हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ से सहमी हुई थी.

* अन्ना की क्लास में झूठों का जमावाडा
आज कल हर तरफ एक ही शोर सुनाई दे रहा है, हर कोई यही कह रहा है की मैं अन्ना के साथ हूँ या फिर मैं ही अन्ना हूँ. गलत, झूठ बोल रहे है सभी.

* अगड़म-तिगड़म... देख तमाशा...
भारत देश तमाशबीनों का देश है. जनता अन्ना के साथ इसलिए जुड़ी, क्योंकि उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आन्दोलन एक बहुत बड़ा तमाशा नजर आया.
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