विधानसभा चुनाव, आतंक, उस पर अफवाहों का बोलबाला


जैसा की सभी को ज्ञात है की हरियाणा में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। तो यह भी स्वाभाविक है की बाजारों में राजनितिक चर्चा भी जोर पकड़ने लगती है। इस पर अगर जिले में अपराधो का बोलबाला हो तो चर्चा में जैसे तड़का लग जाता है। कोई होने वाली घटनाओ को शासन कर रही पार्टी से जोड़ता है तो कोई इसे विपक्ष की साजिश करार देता है। ऐसे में अगर तू-तू, मैं-मैं हो जाए तो कोई गम नही। ऐसा नही है की ऐसा सिर्फ़ मेरे हिसार में ही होता है। फर्क सिर्फ़ इतना है दिल्ली के नजदीक होने के कारण ऐसी चर्चाये हिसार में कुछ ज्यादा ही होती है। लेकिन अगर इस बीच कुछ अफवाहे और जुड़ जाए तो सोने पे सुहागा हो जाता है। ऐसा ही कुछ घटित हुआ वीरवार को हिसार में। आए दिन होने वाले खून खराबे से तो हिसार को निजात नही मिली लेकिन कुछ खास था तो यह की एक साथ तीन अफवाह जरुर लोगो का ध्यान अपनी और खींचने में कामयाब रही। चिंता तो उस समय होने लगी जब मेरे साथ-साथ मेरे साथी पत्रकारों के पास भी ऐसे कुछ फोन घनघनाने लगे। आनन-फानन में हमने भी फोन घुमाने शुरू किए तो खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली कहावत चरितार्थ होती साबित हुई।
शाम के लगभग 5 बजे थे की एक मित्र का फोन आया की भाई साहब हिसार के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की रोहतक में गोली मार कर हत्या कर दी गई है। यह समाचार मुझ सहित मेरे अन्य पत्रकार साथियों को हिला कर रख देने के लिए काफी था। इसका कारण था की कुछ दिन पूर्व एक जेल वार्डन की गोली मार कर की गई हत्या। लेकिन जब अन्य आलाधिकारियों से संपर्क किया गया तो यह सिर्फ़ महज अफवाह निकली। अभी इस अफवाह से निजात मिली ही थी की शाम को 7 बजे फ़िर मेरा फोन खनका। किसी ने मुझ से पूछा की आज की कोई खास ख़बर। मैंने सहज ही कहा की कुछ खास नही। तो मुझ से पूछा गया की आज कोई घटना नही घटी क्या। मैंने कहा की एक बिजली कर्मचारी को गोली मार कर लगभग 80000 रुपए लुटे गए है। फोन करने वाले का कहना था की तुम हिसार की ख़बर ही रख सकते हो। हिसार से बाहर की ख़बर भी रखा करो। मैंने कहा श्री मान ऐसी क्या बात हो गई। तो मुझे तपाक से जवाब मिला की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। ऐसा नही है की ऐसे फोन सिर्फ़ पत्रकारों को ही किए गए थे। जब भाजपा नेताओ को फोन करना शुरू किया तो वो भी ऐसे फोनों से चिंतित नजर आए।
इतना ही नही जिले की राजनीति को लेकर भी एक अफवाह शाम होते होते जोर पकड़ गई। कही से बात उठी की एक इनलो प्रत्याशी की टिकट बदल दी गई है। इस ख़बर के साथ ही यह समझते देर नही लगी की कोई शरारती तत्व ऐसी अफवाहों को जन्म दे रहा है। लेकिन इतना अवश्य है की एक तो विधानसभा चुनाव उस पर जिले में अपराधियों का आतंक और ऊपर से अफवाहों का बोलबाला। तो अब आम आदमी किस पर भरोसा करे किस पर नही यह समझना थोड़ा मुश्किल लगने लगा है।

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1 आपकी गुफ्तगू:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

प्रजातन्त्र के नजारे भी खूब हैं।
बधाई!
word verification hata den,
comment karne men dikkat hotee hai.

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