आखिर पहले क्यों नही जागती सरकार


इन्हासमेंट के खिलाफ चल रहे आंदोलन की जीत, पहले होगी सही जांच
शुक्रवार सुबह धरनास्थल पर पहुंचकर धरना समाप्त करवाएंगे सरकार व पार्टी के प्रतिनिधि


हिसार : मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने इन्हासमेंट की समस्या से जूझ रहे हुडा सेक्टरवासियों को बड़ी राहत देते हुए समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने सही गणना न होने तक किसी प्लॉटधारक को नोटिस न देने तथा पूरे प्रदेश के सेक्टरवासियों को राहत देने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही हिसार में विधायक डा. कमल गुप्ता के आवास के समक्ष डाला गया पड़ाव शुक्रवार सुबह सरकार के प्रतिनिधि मौके पर आकर व सेक्टरवासियों को मुख्यमंत्री का आश्वासन देकर उठवाएंगे।
मुख्यमंत्री का यह ब्यान ऐसे समय मे आया हैं जब हिसार के सेक्टर निवासी वीरवार को विधायक कमल गुप्ता के निवास के बाहर धरना दे रहे थे. ऎसा नही हैं की सेक्टर निवासी आज तक चुप थे. लगभग माह पूर्व से इन्हासमेंट के खिलाफ उठ रही आवाज के प्रति उसमें से किसी के कान पर जूँ तक नही रेंग रही थी जिनकी आज पीथ थपथपाई जा रही हैं. आपको बता दे की भाजपा जिला प्रधान सुरेन्द्र पूनिया ने सेक्टर पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री से मिलवाया।
मुख्यमंत्री से मिलने वालों में जिला आरडब्ल्यूए प्रधान दलबीर किरमारा, सेक्टर 16-17 प्रधान जितेन्द्र श्योराण, डा. किताब सिंह पूनिया, डीपी ढुल, कुलदीप वत्स, सुभाष जैन व कर्नल चन्द्र रेड्डू शामिल थे। सेक्टर पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि हिसार में पिछले पिछले 28 दिनों से धरना, प्रदर्शन व आंदोलन चल रहा है जो हुडा विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा की गई गलत गणना की देन है। यदि इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो विभाग के अधिकारियों का बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के साथ अन्याय न हो, इसलिए पहले सही आंकलन किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल हिसार ही नहीं बल्कि वे पूरे प्रदेश को एक नजर से देखते हैं और यह पूरे प्रदेश के सेक्टरवासियों की समस्या है, इसलिए इसका समाधान अवश्य होगा।


265 करोड़ से सेक्टरों की सड़कें जल्द होंगी चकाचक


हिसार के सेक्टरों की सड़कों के लिए 13.55 करोड़ रुपये मिले


हिसार : सेक्टरों में बदहाल सडकों के दिन जल्द बहुरेंगे। हिसार के सेक्टरों की सड़कें 13.55 करोड़ रुपये की लागत से चकाचक होंगी. उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 20 शहरों के 163 सेक्टरों की विभिन्न सड़कों के स्पेशल रिपेयर के लिए 265 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। जल्द ही विभागीय टेंडर प्रक्रिया होने के बाद इस सडकों की स्पेशल रिपेयर कराकर लोगों को राहत दिलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा हिसार में सेक्टरों की सड़कों के नवीनीकरण हेतु 13.55 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इसके तहत सेक्टर 14, सेक्टर-13, सेक्टर 16-17, पीएलए, सेक्टर-15 व मेला ग्राउंड सहित अन्य सेक्टरों की सड़कें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हिसार के अलावा हांसी में 2 सेक्टरों की सड़कों की मरम्मत के लिए भी 4 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं जो यहां की जर्जर सड़कों के सुधार पर खर्च किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि लंबे अरसे से सेक्टरों की सड़कों के उचित रखरखाव के अभाव में इनकी हालत जर्जर हो गई थी। शहरी निकाय मंत्री कविता जैन के अनुरोध तथा वाहन चालकों व आमजन की परेशानियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सभी शहरों के ऐसे स्पेशल रिपेयर वाली सड़कों के एस्टीमेट मांगे थे। अब मुख्यमंत्री ने 20 शहरों के 163 सेक्टरों की सड़कों के सुधार के लिए 265 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है।


असपाम फाउंडेशन द्वारा गरीब कन्याओं का सामूहिक पाणिग्रहण संपन्न


कन्याओं को स्त्रीधन व कन्यादान देकर किया व

नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देत जिला उपायुक्त अशोक मीना व अशोक गोयल
हिसार : सेक्टर 16/17 में स्थित श्री रानी सती दादी मंदिर में अशोक गोयल मंगाली वाले ने सामूहिक विवाह समारोह में बेटियों के हाथ पीले करके कन्यादान का महा पुनीत कार्य संपन्न किया। उनका दृढ़ विश्वास है कि महिलाओं की उपेक्षा करके राष्ट्र विकास नहीं कर सकता। इस महा पुनीत कार्य में अपने सहयोग की आहुति डाल कर श्री गोयल ने बेटियों को सुरक्षित, शिक्षित और स्वावलंबी बनाने का संकल्प लिया । बेटियों पाणिग्रहण के पावन अवसर पर जिला उपायुक्त श्री अशोक मीना, भाजपा नेता घोलु गुर्जर, महावीर सिंह के अलावा शहर के अनेक प्रतिष्ठित नागरिकों ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया। वर वधु के परिजन व सगे-संबंधी उपस्थित रहे। असपाम फाउंडेशन के चेयरमैन श्री अशोक गोयल ने इस अवसर पर कन्याओं को कन्यादान के रूप में घर की आवश्यकताओं के अनुरूप स्त्रीधन व उपहार आदि भी दिए। 
इस अवसर पर जिला उपायुक्त ने कहा कि वह श्री अशोक गोयल के कन्या विवाह के इस कार्य की सराहना करते हैं और अपेक्षा करते हैं कि समाज के अन्य लोग भी इसकी प्रेरणा लें। 


टैंक में डूबने से दादा, दादी व पोते की दर्दनाक मौत


हांसी : उपमंडल के महजत गांव में टैंक में डूबने से एक ही परिवार के 3 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में दादा, दादी व पोता शामिल है। घर से एक साथ तीन लोगों की अर्थियां उठने से क्षेत्र में मातम का माहौल है।
जानकारी के अनुसार महजत गांव में रामस्वरूप पिछले चार वर्षों से बाग को ठेके पर लेकर बागवानी कर रहा है। आज सुबह करीब सात बजे चार वर्षीय योगेश टैंक के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह टैंक में गिर गया। उसे बचाने के लिए दादा रामस्वरूप भी टैंक में कूद गया। दादा व पोते को टैंक में डूबता हुआ देखकर दादी ने भी टैंक में छलांग लगा दी।
जब वे तीनों डूबने लगे तो उनकी चिल्लाने की आवाज सुनकर पास ही गेहूं काट रही योगेश की मां रेखा मौके पर आई और आसपास के लोगों को सहायता के लिए बुलाया। गांव वालों ने मौके पर पहुंचकर टैंक से बच्चे सहित तीनों को बाहर निकाला और एम्बुलेंस की सहायता से अस्पताल हांसी लेकर आए। जब तक वे अस्पताल पहुंचे, उनकी मौत हो चुकी थी। चिकित्सकों ने जांच करके तीनों को मृत घोषित कर दिया।


बुजुर्ग महिला का पर्स छीन सत्तर हजार की नकदी ले उड़े बाईक सवार


कूरियर करवाने जा रही थी बुजुर्ग महिला, तीन युवकों ने दिया वारदात को अंजाम

पुलिस को घटना की जानकारी देती महिला
हिसार : सेक्टर 15 की रहने वाली बुजुर्ग महिला से बाइक सवार तीन युवक पर्स छीन कर फरार हो गए। पर्स में 70 हजार रुपये की नकदी और घर की चाबीया व जरूरी कागजात थे। घटना मंगलवार रात आठ बजे पारिजात चौक से मन्डी चौक के बीच की है। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस आसपास की दुकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है।

सेक्टर 15 के रहने वाले इंद्र कुमार ने बताया कि वे इंशोरेंस का काम करते है। ऑटो मार्केट में ऑफिस है। रात को पत्नी कृष्णा के साथ एक्टिवा पर सवार होकर पारिजात कॉम्पलेक्स में कूरियर करवाने के लिए आ रहे थे। जैसे ही पारिजात कॉम्पलेक्स की तरफ मुडे तो पीछे बाइक पर सवार तीन युवक आए। बाइक के पीछे बैठे युवक ने झपटा मार कर पत्नी के हाथ से पर्स छीन लिया। उन्होंने बताया कि पर्स में 70 हजार रुपये की नकदी के अलावा जरूरी कागजात थे।

इंद्र कुमार के अनुसार पर्स छीनने के बाद उनकी पत्नी चलते स्कूटर से निचे गिर गयी. उन्होने अपनी पत्नी को उठाया तो उन्हें घटना का पता लगा. इंद्र कुमार ने लुटेरो का पिछा भी किया लेकिन बाइक पर सवार तीनों युवक मलिक चौक की तरफ फरार हो गए। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची।


देश व प्रदेश के व्यापारी व उद्योगपति नुकसान में : बजरंग दास गर्ग


श्री गर्ग ने कहा की गेहू खरीद को शुरू हुए हरियाणा में 15 दिन बितने के बावजूद भी गेहू खरीद के लिए सरकारी अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए किसान व आढ़तियों को नाजायज तंग करते है अगर किसी अधिकारी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए गेहू खरीद में देरी की तो मंडी बंद करके उस अधिकारी के खिलाफ व्यापार मंडल मोर्चा खोल देगा। प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में गेहू उठान के ठेके सरकारी अधिकारियों द्धारा अपने निजी स्वार्थ के लिए अपने चहेतो को अनाप शनाप रेटों में दे कर हरियाणा सरकार को करोड़ो रूपए का चुना लगाने का काम किया है।


चेयरमैन की दुकान में अवैध निर्माण पर आखिर प्रशासन क्यों है मौन


फेस-3 में अवैध निर्माण के सम्बंध में मुख्यमंत्री से मिलेगी बाबा विश्वकर्मा समिति 

हिसार। बाबा विश्वकर्मा समिति के पदाधिकारियों की बैठक समिति कार्यालय में हुई जिसमें व्यापार एवं व्यवसाय कुंज फेस-3 की मुख्य ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा हुई और विशेषकर फेस-3 में फुटपाथ तोड़कर उसके नीचे बनाई बेसमेंट पर चर्चा हुई। समिति के पदाधिकारियों ने प्रशासन के लचीले रवैये पर रोष प्रकट किया। आरोप लगाया गया कि यह दुकान भाजपा से जुड़े नेता एवं चेयरमैन की है और इसी दबाव में प्रशासन ने अब तक कोई कार्यवाही न करके उक्त नेता को खुली छूट दी हुई है। सरकारी जमीन पर कब्जे के बाद भी उक्त नेता की न तो दुकान का अवैध निर्माण सील किया गया है और न ही उक्त नेता के खिलाफ कोई कार्यवाही की गई है। समिति के प्रधान ओमपाल सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में बाबा विश्वकर्मा समिति ने आरटीआई के माध्यम से नगर निगम से जानकारी मांगी है कि उक्त नेता ने फुटपाथ के नीचे बनी दीवार हटाई है या नहीं, फुटपाथ का कब्जा छोड़ा है या नहीं, प्रशासन कोई कार्यवाही उक्त नेता के खिलाफ करेगा या नहीं, फुटपाथ खोदकर जो मिट्टी का प्रयोग किया गया, उसकी भरपाई उक्त नेता से की जाएगी या नहीं, भाजपा नेता के विरुद्ध अवैध निर्माण करने पर क्या कार्यवाही बनती है। आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी मांगी गई है। 
समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अगर प्रशासन इस अवैध निर्माण को सील नहीं करता तो समिति का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर उक्त नेता की कारगुजारी उनके सम्मुख रखेगा। उक्त नेता के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेगा। जब तक सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को सील नहीं किया जाता तब तक बाबा विश्वकर्मा समिति चुप नहीं बैठेगी।


जब भाजपा का उपवास..., उपहास सा लगने लगा


अधिकतर पदाधिकारी रहे दूर, आए वो कुछ देर में चलते बने, कुछ पहुंचे मात्र औपचारिकता निभाने


हिसार। कांग्रेस पर संसद न चलने देने का आरोप लगाते हुए देशभर में भाजपा के आह्वान पर किये गए उपवास का भाजपाइयों ने ही मजाक बना डाला। उपवास कार्यक्रम से पार्टी के अधिकतर पदाधिकारी ही दूर रहे वहीं अधिकतर नेता मौके
पर आकर औपचारिकता निभाकर जाते रहे। यही नहीं, जिले में विभिन्न विभागों, बोर्डों व निगमों के सात चेयरमैनों में से केवल एक चेयरमैन ही उपवास में नजर आए वहीं अन्य बड़े नेता भी कन्नी काटते नजर आए।
भाजपा के राष्ट्रीय आह्वान पर उपवास कार्यक्रम रखा गया था। हिसार में अग्रसेन चौक के उसी पार्क को भाजपा ने उपवास स्थल चुना, जिसमें कांग्रेसियों ने उपवास किया था। भाजपाइयों का उपवास कार्यक्रम भी कांग्रेसियों से कम नहीं रहा। जिस तरह कांग्रेसियों का उपवास कार्यक्रम मजाक बनकर रह गया वहीं भाजपा भी इससे अछूती नहीं रही। भाजपा के अधिकतर पदाधिकारी ही इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे, एक प्रदेशस्तरीय नेता लगभग दो बजे इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उक्त नेता के बारे में प्रसिद्ध है कि वह हर कार्यक्रम में देरी से पहुंचकर केवल बैठने के लिए सीट हथियाने के प्रयास में रहता है। बताया जाता है कि उक्त नेताजी को उपवास कार्यक्रम की जानकारी भी नहीं थी और उन्हें अपने मीडिया प्रभारी के माध्यम से उपवास कार्यक्रम की जानकारी मिली थी। हुआ यूं कि उक्त नेताजी के मीडिया प्रभारी किसी तरह पत्रकारों को मिल गये और जब पत्रकारों ने उससे पूछा की नेताजी उपवास में हैं क्या, तो मीडिया प्रभारी का कहना था कि किस बात का उपवास, आज पार्टी का कोई कार्यक्रम है क्या? इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से पूरी जानकारी लेकर अपने आका को फोन किया और उपवास कार्यक्रम में जाने की सलाह दी, जिस पर उक्त नेताजी लगभग दो बजे इस कार्यक्रम में पहुंचे और अपनी हाजिरी लगवाई। 
पार्टी के इस उपवास कार्यक्रम से कुछेक को छोड़कर अधिकतर पदाधिकारी ही दूर रहे। पार्टी आए दिन नई नियुक्तियों की घोषणा करती है लेकिन नई नियुक्तियों वाले तो दूर, पुराने पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी पार्टी जुटा नहीं पाई और हालत यह हो गई कि निर्धारित पार्क भरना तो दूर, चौथाई हिस्से में बैठकर सत्तारूढ़ भाजपाइयों को कांग्रेस पर हमले करने पड़े।


कागजों में ही दौड़ कर लाखों का डीजल पी गई उपायुक्त की कार


3 वर्षों तक सिर्फ कागजों में दौड़ती रही डीसी साहब की इनोवा
हिसार (राजेश्वर बैनीवाल)। प्रदेश की मनोहर सरकार भले ही सिस्टम को भ्रष्टाचार मुक्त करने के दावे करती नहीं थकती, लेकिन उसी सरकार के सिस्टम को सरकार के ही अधिकारी
भ्रष्टाचार से खोखला करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला फतेहाबाद की जिला आईटी सोसाइटी का है। जिला आईटी सोसाइटी (डीआईटीएस) का काम जिले के बीपीएल परिवारों और पंचायतों को डिजीटल साक्षर करने का था, लेकिन वो अपने भारी-भरकम फंड को इधर-उधर एडजस्ट करने में ही लगी रही। जिला आईटी सोसाइटी की पिछले तीन साल की आडिट रिपोर्ट में तो यही खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री तक शिकायत जाने के बाद मामले की जांच विजीलेंस को सौंपी गई है।
आडिट रिपोर्ट की मानें तो फतेहाबाद जिले में तीन वित्त वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 तक जितने भी डीसी आए, वो लगातार तीन वर्षों तक रोजाना 120 किलोमीटर इनोवा गाड़ी में घूमते रहे। इतना ही नहीं इन तीन वर्षों में आए सरकारी अवकाश और उनके निजी अवकाशों के दौरान भी ये इनोवा गाड़ी सड़कों पर दौड़ती रही। हां, ये बात अलग है कि जिले के किसी भी डीसी को स्थानीय लोगों या अधिकारियों ने इनोवा गाड़ी में निरीक्षण आदि पर जाते नहीं देखा। इसका सीधा सा मतलब है कि उनके लिए डीआईटीएस की इनोवा गाड़ी कागजों में ही दौड़ती रही और तीन साल में डीजल बिल की आड़ में सात लाख रुपए को ठिकाने लगा दिया गया।
हैरानी तो इस बात की है कि पिछले तीन साल में लगातार वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बावजूद इस गड़बड़झाले को रोकने का किसी ने प्रयास तक नहीं किया। और तो और आडिट रिपोर्ट में भी इन अनियमितताओं को अनदेखा किया जाता रहा। पिछले तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट में जो सामने आया है, उसकी जानकारी देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट सुशील बिश्नोई ने बताया कि वित्त वर्ष 2014 से लेकर 2017 तक डीसी की इनोवा गाड़ी पर सात लाख का डीजल एवं रिपेयरिंग खर्च आया है। हैरानी की बात तो ये है कि पिछले एक साल में जिला आईटी सोसाइटी ने एक भी पंचायत को डिजीटल साक्षर करने के लिए एक कैंप तक नहीं लगाया।
जानकारी के अनुसार फतेहाबाद जिले में दो-तीन साल में अलग-अलग उपायुक्त कार्यरत रहे लेकिन एनके सोलंकी ही इन तीन सालों में अधिकतर समय फतेहाबाद के उपायुक्त पद पर रहे। मीडिया ने जब पूर्व डीसी सोलंकी से इस संदर्भ में बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिया और फोन काट दिया। हालांकि जिला आईटी सोसाइटी के पिछले तीन साल के आडिट रिपोर्ट की एक प्रति भी है। ये इनोवा गाड़ी फिलहाल डीसी फतेहाबाद के निवास पर बने गैराज में बंद शटर के पार खड़ी है।
विजीलेंस को दी जांच : सुशील
एडवोकेट सुशील बिश्नोई के अनुसार उन्होंने पूरे गड़बड़झाले की शिकायत मुख्यमंत्री मनोहर लाल को की थी। मुख्यमंत्री ने शिकायत का अध्ययन करवाकर मामले की जांच का आश्वासन दिया था। अब उन्हें पता चला है कि मामले की जांच विजीलेंस को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सके।


सबको दे दो आरक्षण


हरियाणा: आज एक बार फिर हरियाणा आरक्षण की आग में जलने को तैयार है. जाट समुदाय के लोग पिछले आन्दोलन के दौरान बनाये गए मुक़दमे वापिस लेने के साथ-साथ आरक्षण की मांग को लेकर धरने पर है. ऐसे में जहाँ उन्होंने कई जगह रेलवे ट्रैक व् सड़क मार्ग जाम कर दिए है वहीँ प्रशासन भी किसी अनहोनी के अंदेशे के मद्देनजर मुस्तैद नजर आ रहा है. इसलिए जहाँ अब हिसार से दिल्ली दूर नजर आने लगा है वहीँ कई ऐसे सड़क मार्ग है जो अब दोगुनी समय सीमा में तय हो रहे है. बावजूद इसके जाट समुदाय का कहना है की एक ओर जब तक उनके ऊपर बनाये गए मुक़दमे वापिस नहीं लिए जाते वहीँ दूसरी ओर आरक्षण नहीं मिलने तक अब वो मानने वाले नहीं है.
यही कारण है की आज गुफ्तगू हो रही है की आरक्षण का शोर तो आज हर ओर सुनाई दे रहा है. जबकि मांगने वाले को पता ही नहीं की वो आरक्षण मांग ही क्यों रहा है. बस एक नेता की आवाज पर हो लिए उसके पीछे-पीछे. अब उनसे कोई पूछने वाला हो की क्या आरक्षण मांगने से पहले उनके घर में चूल्हा नहीं जल रहा था या उनको कोई परेशानी आ रही थी अपने बच्चो के लालन-पालन में. लेकिन नहीं इसका उनके पास कोई जवाब नहीं है. तो क्या इसका मतलब यह है की क्या हम लकीर पीट रहे है या भेड़चाल की माफिक चल रहे है.
अब देखो ना पहले तो सिर्फ अनुसूचित जातिया - जनजातियाँ ही आरक्षण की मांग किया करती थी लेकिन यह शायद मेरे देश का या यह कहें की संविधान का दुर्भाग्य ही है की आज जिसे देखो आरक्षण की मांग पर मांग किये जा रहा है. दुःख इस बात का नहीं की आरक्षण की मांग क्यों हो रही है दुःख तो इस बात का है की भारत की एकता के लिए जो " हिन्दू-मुस्लिम-सिख-इसाई, हम सभी है भाई-भाई" का नारा दिया जाता था उसके तो आज मायेने ही बदल गए है. आज धर्म की बात तो कोई करता ही नहीं है.

जो हिन्दू धर्म कभी 36 बिरादरियो की एकता का दम भरता था उसमे आज जात की बात होने लगी है. इससे ज्यादा दुःख की बात और क्या होगी की हिन्दुस्तान में आज कोई हिन्दू होने की बात नहीं करता. आज बात होती है तो सिर्फ मै बाल्मीकि, मै धानक, मै जाट, मै गुर्जर व् मै चमार की. गुफ्तगू का पहलु यह है की आज हर कोई आरक्षण के लिए झंडा उठाये हुए है. जबकि देश की किसी को कोई खबर नहीं है. आज आरक्षण से सिर्फ बचे है तो पंजाबी, ब्रह्मण व् अग्रवाल समुदाय.

लगता यह है की आज आरक्षण जनता की नहीं अपितु राजनीति की जरुरत बन कर रह गया है. आरक्षण मुद्दे पर सरकार कभी अपने को पाक-साफ़ दिखाना चाहती है तो कभी गेंद केंद्र के पाले में डाल देती है. जबकि विपक्ष अपनी अलग ही दाल गलाता नजर आता है. संविधान निर्माण के समय सिर्फ 10 साल के लिए किये आरक्षण पर आज किसी की भूमिका सकारात्मक नहीं है. कोई नहीं चाहता की देश से आरक्षण ख़त्म हो जाये और ना ही आज तक किसी ने प्रयास किया की इसका कोई हल निकला जाये.
पिसना तो आम आदमी को है
जाट समुदाय को आरक्षण मांगते महीनो हो गए. कभी वो तोड़-फोड़ करते है तो कभी सड़क मार्ग जाम कर देते है. आज हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के रेलवे ट्रैक सुने पड़े है. सरकार से लेकर उच्च व् सर्वोच्च न्यायालय तक की सभी अपील अब तक कोई रंग नहीं दिखा पाई. घर व् काम-धंधे छोड़ कर रेल पटरी पर बैठे लोगो के कानों पर कोई जूं तक नहीं रेंग रही. अब तो यहीं लगता है की इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि पिसना तो आम आदमी को ही है.
तो फिर सबको दे दो आरक्षण
अगर अब जाट समुदाय को भी आरक्षण दे दिया गया तो बचा कौन. सिर्फ अग्रवाल, पंजाबी व् ब्रह्मण. जबकि अब हरियाणा में ये तीनो समुदाय भी आरक्षण के लिए एकजुट होकर बैठके आयोजित कर रहे है. अगर जाट समुदाय का मामला शांत होने के पश्चात फिर से इन तीनो समुदाय के लिए आरक्षण की मांग उठी और ऐसे ही धरना-प्रदर्शन होना है तो आज ही क्यों नहीं सभी को आरक्षण दे दिया जाएँ.


प्रशासन सही या दुकानदार गलत


हिसार: दिन-प्रतिदिन बढ़ते ट्रफिक के जाम से आखिरकार नागोरी गेट के दुकानदारों ने निजात पा ही ली. बाजार में किसी भी तरह का चौपहिया वाहन नहीं आये इसके लिए बाजार के दोनों ओर पाइप गाड़ दिए गए है. ऐसा करने से बाजार में गाडियों का प्रवेश बंद हो गया है वहीँ सारा दिन वाहनों से खचाखच रहने वाला यह बाजार अब खाली-खाली सा लगता है. दुकानदार भी खुश है की उनकी मेहनत रंग लाई लेकिन शायद किसी भी दुकानदार ने यह नहीं सोचा की बाजार वालों की वन-वे करने की मांग पर पाइप लगाना ठीक है या गलत. यहीं कारण है की अब गुफ्तगू हो रही है की इस बाजार में जाम की स्थिति निपटने के लिए की गई कार्यवाही पर प्रशासन सही है या इस जाम को खुद ही बढ़ावा देने के लिए दुकानदार गलत.
क्योंकि नागोरी गेट के जाम व् वन-वे के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी भी दुकानदार ने कभी चाहा ही नहीं की बाजार से ट्रफिक कम हो. ऐसा नहीं है की दिन-प्रतिदिन बढ़ते जाम के लिए पुलिस प्रशासन दूध का धुला है लेकिन दुकानदार भी बराबर के दोषी है. सही मायने में तो इस बाजार के हाल के लिए पुलिस व् दुकानदार के साथ-साथ वह जनता भी कसूरवार है जो बाजार में खरीददारी करने के लिए आती है. यह सही है की दुकानदार से लेकर आम आदमी तक नागोरी गेट में लगने वाले जाम से परेशान है. यह भी सही है की पुलिस प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है. लेकिन फिर भी कोई कुछ नहीं कर रहा. पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है तो दुकानदार अपनी दूकान में कम और सड़क पर ज्यादा बैठा दिखाई देता है.
नागोरी गेट के दुकानदारों का आलम यह है की वो दो फुट से पांच-पांच फुट तक सड़क पर बैठे दिखाई देते है. उस पर दूकान के बोर्ड और सामान सड़क पर रख दिया जाता है वह अलग से. खरीददारी के लिए आने वाली जनता भी कुछ कम नहीं है. अक्सर ऐसा होता है की वाहन चलते कम और दुकानों के बहार खड़े ज्यादा दिखाई देते है. बावजूद इसके दुकानदारों ने मंत्री-संतरी से लेकर अधिकारियों तक को ज्ञापन देकर नागोरी गेट को वन-वे करने की मांग की. लेकिन एक बार जब पुलिस प्रशासन द्वारा नागोरी गेट को वन-वे किया गया था तो दुकानदारों ने काम कम होने की दुहाई दी थी तो आज प्रशासन ने ही वन-वे की मांग के अनुरूप अपनी ड्यूटी का ढीकरा जनता के सिर फोड़ने का काम किया है.
वैसे तो पुलिस प्रशासन समय-समय पर विभाग में पुलिसकर्मी कम होने का रोना रोता रहा है लेकिन ऐसा बहुत कम ही हुआ है की इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा हो. लेकिन हाल फिलहाल पुलिस प्रशासन ने जो कारनामा किया है उससे जनता को आज नहीं तो कल फिर से प्रशासन को ही कोसना पड़ेगा. हर किसी को सोचना पड़ेगा की कौन गलत कर रहा है और कौन सही. तभी सिर्फ नागोरी गेट ही नहीं बल्कि हर शहर, प्रदेश व् देश से जाम की स्थिति से निपटा जा सकता है.


फौज, फौजी और हरियाणा


हरियाणा: यह शायद प्रदेश में हो रहे ओधौगिक विकास का ही असर है की एक ओर तो भारतीय सेना के उच्चाधिकारी सेना में भर्ती के लिए युवाओं की बाट जोह रहे है और दूसरी तरफ उनकी आशा के विपरीत मात्र 30 प्रतिशत प्रतिभागी ही भर्ती में हिस्सा लेने के लिए पहुँच रहे है. एक समय होता था जब भारतीय फौज में हरियाणा का दबदबा होता था. जाट लैंड के युवा फौजी बनने में गर्व महसूस करते थे. भारतीय फौज में हरियाणा का नाम जहाँ सबसे ऊपर होता था वहीँ युद्ध के समय हरियाणा के फौजी भी सबसे आगे होते थे. शायद ही ऐसा कोई युद्ध रहा हो जिसमे हरियाणा के वीरों ने अपना व् प्रदेश का नाम रोशन नहीं किया हो. लेकिन आज स्थिति यह है की हरियाणवी युवाओं में फौजी बनने को लेकर रुझान घट रहा है.
यहीं कारण है की सेना के आलाधिकारी जहाँ फतेहाबाद जिले से 6000 से अधिक प्रतिभागी आने की उम्मीद जता रहे थे वहीँ फतेहाबाद से मात्र 2300 प्रतिभागी ही सेना का भर्ती टेस्ट देने के लिए पहुंचे. इसमें भी मजेदार बात यह है की 2300 में से भी केवल 120 युवक ही सेना का फिजिकल टेस्ट का पहला चरण पूरा कर पाए. जो औसतन 0.5 प्रतिशत रहा. ऐसा ही कुछ हाल जींद जिले का भी रहा. भले ही जींद के युवा फतेहाबाद जिले के युवाओं से मोर्चा मार गए हो लेकिन सेनाधिकारियों की उम्मीदों पर खरा उतरने में वो भी नाकामयाब रहे. जींद से 4500 प्रतिभागी फौज में भर्ती होने के लिए हिसार पहुंचे थे लेकिन 400 युवा ही टेस्ट का पहला चरण पार कर पाए. जिसका औसतन लगभग 10 प्रतिशत रहा.
एक ओर जहाँ ओधौगिक व् व्यापारिक विकास के चलते पानीपत, करनाल, फरीदाबाद, गुडगाँव व् अम्बाला जिले के युवाओं का रुझान सेना के प्रति कम हो चुका है वहीँ सेना को हिसार, जींद, रोहतक, भिवानी व् फतेहाबाद जिले के युवाओं का सेना में भर्ती होने के लिए बेसब्री से इन्तजार रहता है. इस पर भी अगर कुल 0.5 या 10 फीसदी युवा ही फिजिकल टेस्ट पास कर पाएंगे तो वो दिन दूर नहीं जब हरियाणा के साथ वीरों की धरती का नाम जुड़ना बंद हो जायेगा. सेना में भर्ती के लिए युवाओं की घटती संख्या जहाँ दुःखदायी है वहीँ यह शायद हरियाणा का दुर्भाग्य ही है की बीते वर्ष सिरसा में हुए वायु सेना के भर्ती टेस्ट से वापिस लौट रहे युवाओं ने रेलगाड़ी में सफ़र कर रही एक लड़की के कपडे तक फाड़ दिए थे.


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तड़का मार के

* महिलायें गायब
तीन दिन तक लगातार हुई रैलियों को तीन-तीन महिला नेत्रियों ने संबोधित किया. वोट की खातिर जहाँ आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.

* शायद जनता बेवकूफ है
यह विडम्बना ही है की कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार का जनक. कोई अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो कोई कांग्रेस शासन को कुशासन ...

* जिंदगी के कुछ अच्छे पल
चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जो बीते कुछ समय में नगर हुई चोरी, हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ से सहमी हुई थी.

* अन्ना की क्लास में झूठों का जमावाडा
आज कल हर तरफ एक ही शोर सुनाई दे रहा है, हर कोई यही कह रहा है की मैं अन्ना के साथ हूँ या फिर मैं ही अन्ना हूँ. गलत, झूठ बोल रहे है सभी.

* अगड़म-तिगड़म... देख तमाशा...
भारत देश तमाशबीनों का देश है. जनता अन्ना के साथ इसलिए जुड़ी, क्योंकि उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आन्दोलन एक बहुत बड़ा तमाशा नजर आया.
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