
आखिरकार एक साल के लम्बे इन्तजार के बाद होली के रंग में बच्चो, बुढो से लेकर महिला-पुरुष तक सभी सराबोर नजर आ रहे है. होली के इन्तजार की सबसे बड़ी वजह यह है की इस दिन सभी एक दुसरे को गुलाल-अबीर लगते है, गले मिलते है और महिलायें भी तरह-तरह के पकवान खिला कर एक दूसरे को होली की बधाई देते है. जबकि इस दिन बच्चो की मस्ती अपने अलग ही रंग में होती है. कुछ दिनों से होली का रंग ब्लोग्स पर भी छाया हुआ है. हर कोई अपने-अपने शब्दों में होली का जिक्र अपनी-अपनी पोस्ट में कर रहा है. सब ने बहुत कुछ समेटा है अपनी पोस्टो में. लेकिन मेरी गुफ्तगू का पहलु है होली मिलन समारोह. जिसकी आज कोई जरुरत नहीं है. क्योंकि आज होली के अवसर पर जरुरत है तो होली मिशन समारोह की.
अब देखो न हर साल की तरह इस साल भी फागुन मेले में मुझे खाटू श्याम जी जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. सात घंटे के इन्तजार के बाद बाबा श्याम के दर्शन कर जो आनंद प्राप्त हुआ उसका जिक्र तो मै यहाँ नहीं करना चाहता लेकिन इस बीच वहां की व्यवस्था देख लगा की मंदिर कमेटी हर बार की तरह पूरी तरह सजग थी. भक्तो के लिए विभिन्न तरह की सुविधाएं और सुरक्षा की दृष्टि से छह गुब्बारों में लगे कैमरे 10 किलोमीटर के क्षेत्र में होने वाली हर कार्यवाही पर नजर रखे हुए थे. बावजूद इसके जो अव्यवस्था देखने को मिली उसे देख लगा की आज होली पर किसी मिलन समारोह की नहीं अपितु मिशन समारोह की जरुरत है. आज हमको ना सिर्फ अपने त्यौहार ही बचने की आवश्यकता है बल्कि कुछ बुराईयों को जड़ से ख़त्म भी करना है.
अब आप ही बताओ की होली आते-आते संतरी-मंत्री से लेकर राजनेताओ व् व्यापारियों तक होली मिलन समारोह का आयोजन करने का कार्यक्रम बनाने लगते है. लेकिन जिस खाटू धाम में बाबा श्याम के दर्शन करने के लिए 35 से 40 लाख लोग उमड़े हो और वहां सरेआम धुम्रपान कर लोग कानून की धज्जियां उड़ा रहे हो और कानून के किसी भी रखवाले का कोई ध्यान नहीं हो तो आप क्या कहेंगे. इसके साथ-साथ जिसके पास किसी की सिफारिश थी सिर्फ उसको ही धर्मशाला में रहने के लिए कमरा मिल रहा था. एक बरगी लगा की जैसे यहाँ धर्मशाला नहीं बल्कि होटल चल रहे है. जबकि होना यह चाहिए की जो पहले आयें उसको रहने के लिए कमरा मिलना चाहिए. जबकि वहां हर किसी को चाह थी तो सिर्फ पैसे की.
इस से ज्यादा दुःख उस समय हुआ जब भगवान् के दर्शन को भी पैसे की जरुरत पड़ने लगी. खाटू श्याम जी में जब कुछ लोग बाबा के निकट से दर्शन कर रहे थे तो मैंने इस बात को ज्यादा महसूस नहीं किया लेकिन जब हम खाटू जी से सालासर पहुंचे तो यहाँ भी बहुत से लोग आम जनता के लिए लगे बैरियर से अन्दर बैठ कर सालासर हनुमान जी पूजा कर रहे थे. मन को बहुत ठेस पहुंची और पता करने बताया गया की यहाँ विभिन्न तरह की कीमतों में अलग-अलग तरह की पूजा करवाई जाती है. यह सुनकर लगा की अब भगवान् को भी पैसे के लिए बेचा जाने लगा है. या फिर भगवान् की पूजा के लिए अब पैसो की जरुरत पड़ने लगी है. क्या यह भगवान् और भक्तो के बीच की बात है यह सोच मै आपसे गुफ्तगू करने बैठ गया.

1 आपकी गुफ्तगू:
आपको और आपके पूरे परिवार को रंगों के पर्व होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
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