आज सुबह मैं मेरे देश के प्रधानमंत्री का लाल किले की प्राचीर से भाषण सुन रहा था। सुन रहा था की वो कैसे आर्थिक मंदी और मानसून न आने से आहात होने के बावजूद देश का गुणगान कर रहे थे। किसी तरह उनका भाषण ख़त्म हुआ और मैं भी आज के दिन आजादी मिलने पर खुश होते हुए अपने कार्यालय पहुँचा। प्रतिदिन की तरह समाचार पत्र हाथ में उठाये और देखा की यह खुशी मुझे ही नही अपितु उन सभी को है जिनके विज्ञापन से ये समाचारपत्र भरे पड़े है। फिर थोड़ा सा सोचा की क्या इन विज्ञापनदाताओ को वाकई ही आजादी मिलने की खुशी है या मात्र अपनी राजनीति और नाम चमकाने के लिए ये लोग ऐसे मौको पर विज्ञापन देते है। चलो जी अपना क्या लेते है सोच कर मैं फिल्ड में निकल पड़ा की शायद आज के दिन कुछ अच्छा लिखने को मिलेगा। और क्यो न मिले कल जन्माष्टमी थी और आज मेरा देश आजादी की 62 वी वर्षगाढ़ जो मना रहा है। घूमते-घूमते मैं भी हिसार में मनाये जाने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखने चला गया। यहाँ भी हरियाणा के मुख्य संसदीय सचिव धर्मवीर ने प्रदेश और प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा की जम कर वाह-वाह की। नगरवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा की हुडा के मुख्यमंत्री बनने से पहले हरियाणा विकास के मामले में देश में 14 वे स्थान पर था जो आज नंबर वन बनने की ओर अग्रसर है। मैं क्या करता यह सुन हरियाणा का निवासी होने के नाते खुश होता हुआ और कवरेज़ करने निकल पड़ा।
जन्माष्टमी पर कोई अनहोनी न हो गई हो यह सोच हिसार के सामान्य अस्पताल पहुँचा तो मेरा कलेजा ऊपर से नीचे तक हिल गया। अस्पताल में मैंने देखा की जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर किस तरह एक जालिम ने नन्ही सी बच्ची को अपनी हवस का शिकार बना डाला। फ़िर भी उसका पेट नही भरा तो उस 6 साल की मासूम की गर्दन तोड़ कर उसकी नृशंस हत्या कर दी। इतना ही नही किसी को इस घटना की भनक ना लगे इसलिए हत्यारे ने बच्ची के शव को कट्टे में डाल कर सड़क पर फेंक दिया। यह मेरे देश का दुर्भाग्य ही है की मामले का खुलासा उस समय हुआ जब देश-प्रदेश के आला नेता देश व् अपने नेता का यह कह कर गुणगान कर रहे थे की आज हम आजाद है। तो क्या अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री यह भूल गए थे की आज भले ही हम आजादी मिलने की खुशी मना रहे है लेकिन आज आतंकवादियों से न देश सुरक्षित है और ना हवस के मारो से मेरे देश की बच्चिया और महिलाये। और तो और जिस प्रदेश के मुख्य संसदीय सचिव न. वन होने का दावा कर रहे है वहा आज जंगल राज चल रहा है। कही पुलिस हिरासत में इंसान दम तोड़ रहा है तो सबसे ज्यादा फर्जी इनकाउन्टर भी इसी प्रदेश में हुए है। रही बात बलात्कार की तो आज देश का कोना-कोना इस बीमारी से त्रस्त है। आज के दिन हमको आजादी मिलने की खुशी नही मनानी चाहिए बल्कि इस बात पर गहन चिंता करनी चाहिए की किस बात की आजादी मना रहे है हम।
उसको तो बनना था कृष्ण की राधा
जन्माष्टमी के अवसर पर मृतक 6 वर्षीय भावना के परिजनों पर क्या बीत रही होगी उसका अंदाजा लगाना भी बड़ा मुश्किल है। क्योंकि जहा भावना को अपने घर के समीप के मन्दिर में राधा बनना था वही 15 अगस्त के दिन ही उसका जन्मदिन भी था। उसके परिजनों ने बताया की उसकी राधा बनने की ड्रेस भी आ चुकी थी। लेकिन भावना के 4 बजे से घर से गायब होने के कारण उसके परिजनों ने पुलिस से सम्पर्क साध लिया था। लेकिन त्यौहार के अवसर पर बच्ची इधर-उधर गई होगी सोच कर ज्यादा हलचल नही की। लेकिन शाम होते-होते चिंता बढ़ने लगी।
और वो कहते है की हम आजाद है.....
लेबल: अपराधिक गुफ्तगू, सभी, सरकार
तड़का मार के

तीन दिन तक लगातार हुई रैलियों को तीन-तीन महिला नेत्रियों ने संबोधित किया. वोट की खातिर जहाँ आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.
यह विडम्बना ही है की कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार का जनक. कोई अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो कोई कांग्रेस शासन को कुशासन ...

चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जो बीते कुछ समय में नगर हुई चोरी, हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ से सहमी हुई थी.

आज कल हर तरफ एक ही शोर सुनाई दे रहा है, हर कोई यही कह रहा है की मैं अन्ना के साथ हूँ या फिर मैं ही अन्ना हूँ. गलत, झूठ बोल रहे है सभी.

भारत देश तमाशबीनों का देश है. जनता अन्ना के साथ इसलिए जुड़ी, क्योंकि उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आन्दोलन एक बहुत बड़ा तमाशा नजर आया.
आओ अब थोडा हँस लें
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यह गलत बात है

पूरे दिन में हम बहुत कुछ देखते है, सुनते है और समझते भी है. लेकिन मौके पर अक्सर चुप रह जाते है. लेकिन दिल को एक बात कचोटती रहती है की जो कुछ मैंने देखा वो गलत हो रहा था. इसी पर आधारित मेरा यह कॉलम...
* मौका भी - दस्तूर भी लेकिन...
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लडकियां, फैशन और संस्कृति

आज लडकियां ना होने की चाहत या फिर फैशन के चलते अक्सर लडकियां आँखों की किरकिरी नजर आती है. जरुरत है बदलाव की, फैसला आपको करना है की बदलेगा कौन...
* आरक्षण जरुरी की बेटियाँ
* मेरे घर आई नन्ही परी
* आखिर अब कौन बदलेगा
* फैशन में खो गई भारतीय संस्कृति
5 आपकी गुफ्तगू:
बधाई।
आप बढ़िया लिख रहे हैं।
लेखनी का प्रवाह रुकनें न दे।
marmik aur chintajanak bhi .umda .man ko chhu gaya .
आपकी गुफ्तगू में पहली बार शामिल हो रही हूँ....
आपकी बात सोलह आने सही है की क्या हम सच-मच आजाद हुए है.....हिंसा-बलात्कार, आतंकवाद ने कब हमारा दामन छोडा.....शायद ये सब कुछ आज़ादी के साथ विरासत में मिली है हमें
लेकिन ये कहाँ नहीं है......प्रकृति का ही नियम है रात के साथ दिन, जन्म के साथ म्रत्यु.......
मरने के डर से जीना कोई नहीं छोड़ता.
हाँ अपने जीवन के स्तर को ठीक करता है.
ठीक वैसे ही ज़श्ने आज़ादी मानना है हर हाल में लेकिन उस आज़ादी को बेहतर बनाने की कोशिश करनी है...और इसके लिए सजगता की आवश्यकता है, एक-एक नागरिक को अपने अन्दर की पशुता का विनाश करने का प्रण लेना होगा तभी ये संभव है....
आपका लेख सटीक, सामयिक और सार्थक लगा
बधाई हो...
ada ji bahut sundar baate kah gayi aur sach bhi .
सूर्य जी , आपकी गुफ्तगू देखी, बहुत ही सुन्दर विचार और भाव के साथ आपने खबर को प्रस्तुत किया है , क्या हम आजाद हैं ? इस प्रश्न को हर भारतीय को खुद से पूछना चाहिए ,हम अंग्रेजों की गुलामी से तो आजाद हो गए लेकिन मानसिक गुलामी की जड़े इतनी गहरी है की वो कभी हमें आजाद नहीं होने देती
यही वजह है की , कहीं न कहीं ऐसी घटनाएं सुनने या देखने में आती रहती हैं , हमारे देश के नेताओं को अपने स्वार्थ के सिवा कुछ नहीं दिखता तो आम आदमी भी देश के प्रति कौनसे कर्तव्य निभा रहा है ?सारे कुएं में ही भांग पड़ी है ऐसे विपरीत समय में आप जैसे जागरूक पत्रकारों को अपनी लेखनी से समय समय पर जनता को जागरूक करना चाहिए
आप के मन में जन साधारण के प्रति जो दर्द हैं और आपके पास भाषा की भी ताकत है मुझे लगता है की आने वाले समय में आप सफलता के नए मापदंड रखेगें
भावना की खबर बहुत ही मार्मिक थी इश्वर ऐसे मानसिक रोगी अपराधियों को सदबुध्दी दे
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