
सदियों से राजा रानी वाली राजतंत्र की प्रशासन व्यवस्था में रह चुकी जनता ने लगभग साठ साल के गणतांत्रिक देश हिन्दुस्तान में हाल तक भी सभी भारतीयों की मानसिकता लोकतंत्र के लिए परिपक्व नहीं हो पायी है तभी तो सता पर पकड़ बनाये रखने के लिए नेहरू के वारिसों ने कांग्रेस के नाम से छद्म लोकतंत्र पर पूरे देश में अपने परिवार तंत्र का राज किया। जनता से राजगदृदी अपनाने के लिए राजनीति में जाति धर्म का कार्ड खेला। यह खेल इतने शातिर तरीके से खेला गया कि दूर-दूर तक की सोच रखने वालों से भी कभी यह पकड़ा नहीं जा सका।
हाल के बिहार विघानसभा चुनाव पर अगर सर्वो की खबर को यकीनी माने तो यह लगभग सच है कि मूल रूप से मुसलमानों ने वंशवाली कांग्रेस और राजद को वोट दिया क्योंकि कई कारणें के अलावा वो हिन्दु विरोधी भाषणों से खुश किये जाते रहे। सुन्नी मुसलमानों को आज तक देश के नागरिक के कर्तव्य और अधिकार दोनों को इमामों के हवाले कर दिया गया। मानों उपर वाले ने हिन्दुस्तान के इमामों को स्पेशल पोस्टींग करके भेजा है। लम्बें समय तक इमामों के फतवे पर सुन्नी मताधिकार का प्रयोग करते थे, पर इसमें कोई शक नहीं कि मदरसे की पढ़ाई और विज्ञान की भूमिका धीमे-धीमे इमामों के मकडजाल से डॉ अब्दुल कलाम जैसे पढ़ लिखे कईयों को बाहर कर चुकी।
अगर आस्था के नाम पर मूर्ख बनाये जाने वाले लोग जरा सी सोच और तर्क से दिमाग का इस्तेमाल करें तो वे समझ सकते है कि जहाँ बनाने वाले खुदा के लिए इबादतगाह के नाम पर दकियानुसी सोच का जाल फैलाना क्यों जारी रहा? जलन और नफरत का माहौल फैला, फूट डाल कर सता कब्जायी गयी ताकि देश की गरीब जनता की दौलत को लूट कर विदेशों में केवल अपनी औलादों के ऐशो आराम के लिए रकम जमा करा दी जाए। आज आधे से कम को समझ आया है कल सबको समझ में आ जाएगा कि राज चलाने की जगह राज पर काबिज रहने के काम बडी ही सूझबूझ से किये जाते रहे।
भ्रष्टाचार जब तक सौ करोड़ के खून में ना आ जाए तब तक काम नहीं किया जाता। जब तक हवलदार और सिपाही घूस ना लेने लगे तब तक तंख्वाह ना बढ़ाई। गरीबों को गरीबी हटाने के नाम पर लूटा गया। नियम कानून ऐसे बनाये कि एक ईस्ट इंडिया कंपनी की जगह हजार विदेशी कंपनीया आज हमारे देश में आकर मजदूर और किसान का खून चूस रही है। ईमानदार व्यवसायी को तंग कर करके मिट्टी में मिला दिया गया। हालात ऐसी बनायी गयी कि लोग कहें आजादी से अच्छी गुलामी।
आरक्षण के कार्ड को खेल कर सता पर पकड के लिए दलित मुसलमान, दलित इसाई जैसे शब्दो को जन्म देने वाली कांग्रेस सरकार का बस चला तो कल राजपूत मुसलमान और ब्राहमण ईसाई शब्दों की भी रचना कर देगी। वैसे इन दिनों दिख रहा है की समाज खत्म कर चुकी कांग्रेस सरकार अब परिवार खत्म करने के लिए सात जन्म के रिश्तो को महज समझौता बना कर छोड देगी।
हद तो तब है जब दो दिन के राजनैतिक कद वाले युवराज कहे जाते जनाब मीडीया के सामने दलितों के यहां नहाने खाने का नाटक करेगें जबकि अगर कोई दलित 10 जनपथ पर आ जाऐ तो डंडे खाये। नमाजी टोपी पहने नाटक बस अपने लिए वोट लेने तक के लिए है। चार बीबी और चालीस बच्चे की छूट इसीलिये तो है कि वो बस कैटल क्लास वाला वोटर बन कर जिन्दा रहे फिर गटर में या किनारे घिसट घिसट कर जीते हुए गरीब ने मर ही तो जाना है।
लेकिन वो दिन दूर नहीं जब एक एक करके मुसलमान जान लेगा कि एक बीबी एक बच्चा करके ही वो अपनी औलाद को आदमी की जिन्दगी देगा तब हिन्दुओं का वोट पूरी तरह खो चुकी कांग्रेस को एक वोट भी नहीं मिलेगा। बापू के सम्मान पर जब पटेल जी की जगह नेहरू को प्रधानमंत्री बना देना ही इतिहास की एक गलती हो गयी लेकिन सुधार की जिम्मेदारी आज के नौजवानों की है और बिहार के चुनाव के नतीजों ने विकास के वास्ते बदलाव का बिगुल बजा दिया। लालू को परिवार वाली कांग्रेस के विरूद्ध सता लाने के बाद जब लालू भी परिवार तंत्र का राज करने लगे तो कांग्रेस के साथ वह भी आज हाशिये पर चले गये। जनता जनार्दन ने माना तो भगवान भी बन सका भगवान है।
किसी तंत्र के प्रशासन सफलता जनता के स्वीकारने पर है और यही सच है। फिर नेताओं की बिसात क्या है। जनता के हित में काम करने के लिए अगर चुना है तो उसे जिम्मेदारी से करना होगा। वर्ना अंजाम के कई उदाहरणों से दुनिया के इतिहास भरे है।
साभार- मेरे ई-मेल बाक्स से
1 आपकी गुफ्तगू:
किसी तंत्र के प्रशासन सफलता जनता के स्वीकारने पर है और यही सच है। फिर नेताओं की बिसात क्या है
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!
Happy Republic Day.........Jai HIND
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