राजनीति में डबल पावर का गेम


अगर मैं यहाँ सिर्फ डबल पावर लिखता तो आप शायद कुछ जल्दी और ज्यादा समझ जाते. कसूर आपका भी नहीं है मुझे भी यही लगता की कोई खास बात बताई जाने वाली है. डबल पावर से वो खास बात क्या हो सकती है आपको भी पता है और मुझे भी पता है. लेकिन जो बात आज तक मेरे समझ में नहीं आई वो है राजनीति की डबल पावर. प्रदेश के लिए वो चाहे लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा. मुख्यमंत्री हुड्डा ने दोनों ही चुनावो के पश्चात् कुछ स्थानों पर डबल पावर का जम कर प्रचार किया. लेकिन जनता को यह डबल पावर ना तो दिखाई दी और ना ही इसका मतलब आज तक समझ में आया.
मैं भी क्या करता, पेशे से पत्रकार हूँ और आजकल गुफ्तगू भी कर लेता हूँ तो सभी तरफ ध्यान देना पड़ता है. लेकिन हिसार के समीपवर्ती शहर हांसी के लोगो का दर्द कुछ ऐसा है की वहा ध्यान देने वाला कोई नहीं है. ना तो अभी तक हांसी के विधायक विनोद भयाना हांसी के हो सकें है और ना ही डबल पावर के रूप में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता छत्रपाल इन दिनों हांसी में दिखाई पद रहे है. बावजूद इसके आज कोई ऐसा सप्ताह बमुश्किल बीतता होता जब हांसी में खून की होली ना खेली गई हो या कोई व्यापारी लूट का शिकार ना हुआ हो.
जनता से इन दोनों की लुकाछिपी अब जगजाहिर सी हो गई है. हरियाणा जनहित कांग्रेस की टिकट पर विधायक बनने वाले विनोद भयाना ने जहा कांग्रेस का दामन थाम लिया है वही कांग्रेस की टिकट पर चुनाव हार चुके छत्रपाल इन दिनों ढूंढे से भी नहीं मिल रहे. अब हांसी में बदमाशो की इतनी दहशत फैली हो और विधायक जी है की पंजाबी सम्मेलन के माध्यम से अपनी राजनीति चमका रहे हो तो बात गले नहीं उतरती. जबकि पुलिस द्वारा जनता से शांति बनाये रखने के उद्देश्य से बुलाया गया पुलिस-पब्लिक सम्मलेन में दोनों ही नेताओ का नहीं पहुंचना जनता और स्थानीय नेताओ के लिए सिरदर्द बना हुआ है.
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता छत्रपाल के लिए यह लेख भी जरुर पढ़े. कुर्सी बड़ी की पद
अब इस डबल पावर की बात मैं हिसार के लिए करूँ तो यहाँ भी लोकसभा चुनाव के पश्चात कुछ ऐसा ही प्रचार किया गया था की हिसार को एक नहीं दो सांसद मिले है. इसलिए हिसार अब प्रदेश का पहला ऐसा जिला है जहा दो सांसाद मिलकर विकास करवाएँगे. मुख्यमंत्री हुड्डा के इस उदगार के पीछे कारण था हिसार से विजयी हुए कांग्रेसी सांसद जय प्रकाश और हिसार के रहने वाले कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल. लेकिन पांच सालो में जहा जयप्रकाश हिसार में दिखाई ही नहीं दिए वही नवीन जिंदल का कहना था की वो तो कुरुक्षेत्र से सांसद है इसलिए हिसार की समस्याओ से वाकिफ ही नहीं है.
इस डबल पावर का हिसार की जनता पर क्या असर हुआ इसका जवाब तो बीते लोकसभा चुनाव में पुन चुनाव लड़ रहे जयप्रकाश को जनता ने दे दिया जबकि हांसी की जनता आज अपने को ठगा सा महसूस कर रही है. या फिर यह मान लिया जाये की जो छत्रपाल हुड्डा की जय-जयकार करने के लिए प्रति सोमवार पत्रकारों से मुखातिब हुआ करते थे उनके पास इस बार हुड्डा का गुणगान करने के लिए शब्द ही नहीं है. लगता है की वो अपनी हार से इतने हताश है की वो कुछ करना ही नहीं चाहते या फिर वो मुख्यमंत्री द्वारा कहीं जाने वाली डबल पावर की गेम को समझ गए है.

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1 आपकी गुफ्तगू:

आलोक सिंह "साहिल" said...

बिल्कुल सही विश्लेषण...उम्दा प्रस्तुति

आलोक साहिल

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