टैंक में डूबने से दादा, दादी व पोते की दर्दनाक मौत


हांसी : उपमंडल के महजत गांव में टैंक में डूबने से एक ही परिवार के 3 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में दादा, दादी व पोता शामिल है। घर से एक साथ तीन लोगों की अर्थियां उठने से क्षेत्र में मातम का माहौल है।
जानकारी के अनुसार महजत गांव में रामस्वरूप पिछले चार वर्षों से बाग को ठेके पर लेकर बागवानी कर रहा है। आज सुबह करीब सात बजे चार वर्षीय योगेश टैंक के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह टैंक में गिर गया। उसे बचाने के लिए दादा रामस्वरूप भी टैंक में कूद गया। दादा व पोते को टैंक में डूबता हुआ देखकर दादी ने भी टैंक में छलांग लगा दी।
जब वे तीनों डूबने लगे तो उनकी चिल्लाने की आवाज सुनकर पास ही गेहूं काट रही योगेश की मां रेखा मौके पर आई और आसपास के लोगों को सहायता के लिए बुलाया। गांव वालों ने मौके पर पहुंचकर टैंक से बच्चे सहित तीनों को बाहर निकाला और एम्बुलेंस की सहायता से अस्पताल हांसी लेकर आए। जब तक वे अस्पताल पहुंचे, उनकी मौत हो चुकी थी। चिकित्सकों ने जांच करके तीनों को मृत घोषित कर दिया।


बुजुर्ग महिला का पर्स छीन सत्तर हजार की नकदी ले उड़े बाईक सवार


कूरियर करवाने जा रही थी बुजुर्ग महिला, तीन युवकों ने दिया वारदात को अंजाम

पुलिस को घटना की जानकारी देती महिला
हिसार : सेक्टर 15 की रहने वाली बुजुर्ग महिला से बाइक सवार तीन युवक पर्स छीन कर फरार हो गए। पर्स में 70 हजार रुपये की नकदी और घर की चाबीया व जरूरी कागजात थे। घटना मंगलवार रात आठ बजे पारिजात चौक से मन्डी चौक के बीच की है। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस आसपास की दुकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है।

सेक्टर 15 के रहने वाले इंद्र कुमार ने बताया कि वे इंशोरेंस का काम करते है। ऑटो मार्केट में ऑफिस है। रात को पत्नी कृष्णा के साथ एक्टिवा पर सवार होकर पारिजात कॉम्पलेक्स में कूरियर करवाने के लिए आ रहे थे। जैसे ही पारिजात कॉम्पलेक्स की तरफ मुडे तो पीछे बाइक पर सवार तीन युवक आए। बाइक के पीछे बैठे युवक ने झपटा मार कर पत्नी के हाथ से पर्स छीन लिया। उन्होंने बताया कि पर्स में 70 हजार रुपये की नकदी के अलावा जरूरी कागजात थे।

इंद्र कुमार के अनुसार पर्स छीनने के बाद उनकी पत्नी चलते स्कूटर से निचे गिर गयी. उन्होने अपनी पत्नी को उठाया तो उन्हें घटना का पता लगा. इंद्र कुमार ने लुटेरो का पिछा भी किया लेकिन बाइक पर सवार तीनों युवक मलिक चौक की तरफ फरार हो गए। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची।


कागजों में ही दौड़ कर लाखों का डीजल पी गई उपायुक्त की कार


3 वर्षों तक सिर्फ कागजों में दौड़ती रही डीसी साहब की इनोवा
हिसार (राजेश्वर बैनीवाल)। प्रदेश की मनोहर सरकार भले ही सिस्टम को भ्रष्टाचार मुक्त करने के दावे करती नहीं थकती, लेकिन उसी सरकार के सिस्टम को सरकार के ही अधिकारी
भ्रष्टाचार से खोखला करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला फतेहाबाद की जिला आईटी सोसाइटी का है। जिला आईटी सोसाइटी (डीआईटीएस) का काम जिले के बीपीएल परिवारों और पंचायतों को डिजीटल साक्षर करने का था, लेकिन वो अपने भारी-भरकम फंड को इधर-उधर एडजस्ट करने में ही लगी रही। जिला आईटी सोसाइटी की पिछले तीन साल की आडिट रिपोर्ट में तो यही खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री तक शिकायत जाने के बाद मामले की जांच विजीलेंस को सौंपी गई है।
आडिट रिपोर्ट की मानें तो फतेहाबाद जिले में तीन वित्त वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 तक जितने भी डीसी आए, वो लगातार तीन वर्षों तक रोजाना 120 किलोमीटर इनोवा गाड़ी में घूमते रहे। इतना ही नहीं इन तीन वर्षों में आए सरकारी अवकाश और उनके निजी अवकाशों के दौरान भी ये इनोवा गाड़ी सड़कों पर दौड़ती रही। हां, ये बात अलग है कि जिले के किसी भी डीसी को स्थानीय लोगों या अधिकारियों ने इनोवा गाड़ी में निरीक्षण आदि पर जाते नहीं देखा। इसका सीधा सा मतलब है कि उनके लिए डीआईटीएस की इनोवा गाड़ी कागजों में ही दौड़ती रही और तीन साल में डीजल बिल की आड़ में सात लाख रुपए को ठिकाने लगा दिया गया।
हैरानी तो इस बात की है कि पिछले तीन साल में लगातार वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बावजूद इस गड़बड़झाले को रोकने का किसी ने प्रयास तक नहीं किया। और तो और आडिट रिपोर्ट में भी इन अनियमितताओं को अनदेखा किया जाता रहा। पिछले तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट में जो सामने आया है, उसकी जानकारी देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट सुशील बिश्नोई ने बताया कि वित्त वर्ष 2014 से लेकर 2017 तक डीसी की इनोवा गाड़ी पर सात लाख का डीजल एवं रिपेयरिंग खर्च आया है। हैरानी की बात तो ये है कि पिछले एक साल में जिला आईटी सोसाइटी ने एक भी पंचायत को डिजीटल साक्षर करने के लिए एक कैंप तक नहीं लगाया।
जानकारी के अनुसार फतेहाबाद जिले में दो-तीन साल में अलग-अलग उपायुक्त कार्यरत रहे लेकिन एनके सोलंकी ही इन तीन सालों में अधिकतर समय फतेहाबाद के उपायुक्त पद पर रहे। मीडिया ने जब पूर्व डीसी सोलंकी से इस संदर्भ में बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिया और फोन काट दिया। हालांकि जिला आईटी सोसाइटी के पिछले तीन साल के आडिट रिपोर्ट की एक प्रति भी है। ये इनोवा गाड़ी फिलहाल डीसी फतेहाबाद के निवास पर बने गैराज में बंद शटर के पार खड़ी है।
विजीलेंस को दी जांच : सुशील
एडवोकेट सुशील बिश्नोई के अनुसार उन्होंने पूरे गड़बड़झाले की शिकायत मुख्यमंत्री मनोहर लाल को की थी। मुख्यमंत्री ने शिकायत का अध्ययन करवाकर मामले की जांच का आश्वासन दिया था। अब उन्हें पता चला है कि मामले की जांच विजीलेंस को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सके।


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