कहीं वो राजनीति का शिकार तो नही हो गए


लोकसभा चुनाव से पहले एक समय आया जब हरियाणावाशियों को लगने लगा था की भाजपा प्रदेश में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए हरियाणा जनहित कांग्रेस से गठबंधन करेंगी। दोनों ओर के कार्यकर्ता मुहं बाय खड़े थे की आज नही तो कल दोनों पार्टिया हाथ मिला ही लेगी। लेकिन ऐसी कोई घोषणा होने से पहले भाजपा ने सभी समीकरणों को दरकिनार कर ओमप्रकाश चौटाला वाली इनलो से हाथ मिला लिया। बात कुछ हजम नही हुई तो दोनों दलों के नेताओ ने इसे दो दलों का नही दो दिलो का मिलन बताया। जैसे-तैसे लोकसभा चुनाव तो निपट गए और जनता ने इस गठबंधन को घास तक नही डाली। प्रदेश की राजनीति में अपनी पैठ बनाने के लिए कुछ ऐसे ही दिल मिले हजंका और बसपा के। दोनों ही गठबंधन का वही हुआ जिसका डर था। ऐसा लगा जैसे दो पार्टियों में पहले हुआ प्यार, फ़िर सगाई, शगुन के समय हुई लट्ठ बजाई, शादी का समय आने ही वाला था की तलाक़ की नौबत आई।
बात कुछ ऐसी थी की रविवार को हिसार में हरियाणा जनहित कांग्रेस और बसपा का सयुंक्त कार्यकर्ता सम्मलेन था। अभी बसपा के राज्य प्रभारी और बसपा के महासचिव मानसिंह मनहेडा कुछ बोलते उससे पहले ही एक बसपा कार्यकर्ता ने हो-हल्ला करते हुए मानसिंह मनहेडा को भला-बुरा कहा और मंच की ओर लपका। अभी कोई कुछ समझ पता उसने मनहेडा को तमाचा जड़ दिया। बात इतनी भड़की की कोई कार्यकर्ता किसी की पिटाई कर रहा था तो कोई किसी की। ऐसा लगा जैसे यह कार्यकर्ता सम्मलेन नही अपितु यहाँ दो पार्टियों द्वारा दंगल खेला जा रहा है। कोई किसी की गाड़ी के शीशे तोड़ रहा था तो कोई किसी की गाड़ी के। आख़िरकार मनहेडा ने कार्यकर्ताओ को संबोधित करते हुए कहा की यह सब कांग्रेस का किया धारा है, जबकि यह गठबंधन 24 घंटे के आदेश पर चुनाव जितने में सक्षम है। लेकिन इस प्रकरण के 3 दिन बाद ही मनहेडा ने यह कहते हुए गठबंधन तोड़ दिया की कुलदीप बिश्नोई झूठ की मशीन है, जबकि बिश्नोई का कहना है की मनहेडा हुडा के एजेंट है। चलो यह तो राजनीति है जिसमे कुछ भी कहना सुनना जायज है, जबकि पहलु यह है की कही हजंका द्वारा भाजपा से गठबंधन करने के लिए मनहेडा राजनीति का शिकार तो नही हो गए।
ऐसी क्या दावा ली बिश्नोई ने
मैंने यह तो सुना था की राजनीति में सब कुछ सम्भव है लेकिन यह समझ नही आ रहा की आख़िरकार हजंका सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई ने ऐसी कौन सी दवा ली जिससे उनकी स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी 4 दिनों में ठीक हो गई। रविवार को कार्यकर्ता सम्मलेन में यह बताया गया की इस सम्मलेन में बिश्नोई को भी आना था लेकिन वो स्वाइन फ्लू से पीड़ित है इसलिए नही आ सके। गठबंधन टूटने के पश्चात् भी कुलदीप बिश्नोई ने बताया की वो स्वाइन फ्लू से पीड़ित है लेकिन शाम होते होते समाचार आया की अब कुलदीप बिश्नोई पूरी तरह स्वस्थ है। तो मुझे यह समझ नही आया की जिस बीमारी से आज भारत में ही नही विश्व में प्रतिदिन कोई न कोई मृत्यु हो रही है उस बीमारी से कुलदीप ने कैसे निजात पाई। मैं भी उनके स्वस्थ रहने की कामना करता हूँ लेकिन जनहित में मेरा यह पूछना ग़लत नही होगा।

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1 आपकी गुफ्तगू:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

राजनीति में सब कुछ सम्भव है.

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