कहते है की तलवार की धार कई बार इतना गहरा घाव नहीं देती जितना की जुबान से निकली बोली चोट मार देती है. ऐसा ही कुछ तस्वीरों के साथ भी संभव है. कभी-कभी इतना कुछ हो जाता है की कलम नहीं लिख पाती लेकिन एक छोटी सी तस्वीर सब कुछ बयान कर जाती है. जैसा की आपको पता है की आज कल गुफ्तगू रोचक जानकारिय आप तक पहुंचा रहा है वैसे-वैसे इसके पाठक भी बहुत सी जानकारियों के साथ मेल करने लगे है. हाल ही में मुझे एक मेल मिली थी. मेल का शीर्षक था असमंजस में कलम . पढ़ कर कुछ अजीब सा लगा लेकिन जब मेल खोल कर कवि की सोच और भाव पढ़े तो उंगलिया अपने आप चलने लगी और यह मेल गुफ्तगू पर प्रकाशित हो गई. प्रकाशित भी क्या हुई आदरणीय रूप चन्द्र शास्त्री जी मयंक ने इसको अपने चर्चा मंच में स्थान दिया. जिसके लिए कविता का लेखक और शास्त्री जी दोनों ही बधाई के पात्र है. अब भाई जिसकी कविता उसी को मुबारक और यह मेरे लिए अच्छी बात है की किसी अच्छे कवि की वजह से मेरी गुफ्तगू को चर्चा मंच में स्थान मिला. अब देखो ना हम बात कर रहे थे अजब तस्वीरों के गजब खेल की. तो हाल ही में मुझे एक और मेल मिली. मेल में कुछ तस्वीरे थी जिन्हें देख हँसी भी आ रही थी तो कुछ ऐसा भी लग रहा था की क्या वाकई ऐसा हो सकता है. यह तस्वीरे मैं आपके समक्ष पेश कर रहा हूँ. आशा है आपको भी उतनी ही रोचक लगेगी जितनी की मुझे लगी है.
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अब तक सुना था की भारत में जुगाड़ नाम की एक ऐसी दवा है जो और कहीं नहीं बन सकती. लेकिन अब लगता है विदेशो में भी इस दवा का उपयोग होना शुरू हो गया है. अब इस गाडी को ही देख लो. भाई साहब की गाडी का एक दरवाजा क्या टूट गया इन्होने लकड़ी के फट्टे को ही दरवाजे का रूप दे दिया.
अब इन्हें ही देख लो. गाडी की तेल की टंकी का ढक्कन क्या गायब हुआ की सीडी लगा कर ही गुजारा कर रहे है.
गाडी का टायर पंचर हुआ है तो इसका मतलब यह थोड़े ही है की रस्ते में गाडी रोक कर टायर बदलूँगा. जब गाडी में स्केट्स है तो यह काम मै क्यों करूँ.
मेरे पास मोटर साइकिल है तो क्या हुआ आराम तो गाडी जैसा ही चाहिए. फिर भले लोग कुछ भी कहते रहे. मेरी मोटर साइकिल पर तो आरामदायक सिट ही लगेगी.
घर में मिक्सर नहीं है तो क्या हुआ. खाना बनाने और खाने के लिए ड्रिल मशीन तो है. इसी से मिक्स कर खाने की तैयारी की जाये तो क्या बुराई है.
अब इन साहब को ही देख लो. चोरो से गाडी बचाने का क्या खूब तरीका निकाला है. स्टेरिंग और गियर को कुछ इस तरह हथकड़ी लगाईं है की न गाडी कोई चला पायेगा और न गियर लगेंगे.
एक तीर और दो निशाने. शरीर में कुछ इस तरह टायर पहने की काम भी हो गया और कल को भगवान् न करे की हादसा हो जाये तो चोट भी नहीं लगेगी. और जब अपना काम निकल रहा है तो दुनिया की किसको पड़ी है.
आपको भी अब यह तस्वीर देख कर शायद अपने बगीचे में पानी देने के लिए ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. मैंने ठीक ही लिखा था की शायद अब जुगाड़ नाम की दवा का विदेशो में जम कर उपयोग होने लगा है. यही कारण है की इन साहब ने बोतल में सुराख कर पानी की पाइप को उसके अन्दर दाल कर फाउंटेन बनाया है.
गाडी में पहिया नहीं है तो क्या हुआ. मंजिल तक पहुंचना है. और जब हौसले बुलंद है तो कोई काम मुश्किल नहीं होता. इसी बात को सार्थक करते हुए यह साहब पहिये के निचे वजन ढोने के उपयोग में आने वाली गाडी को कार के निचे लगा कर ही मंजिल तक पहुचने का प्रयास कर रहे है. 

























3 आपकी गुफ्तगू:
मजेदार तस्वीरें.
अजब तस्वीरों का गजब खेल देखकर मजा आ गया .......
bahut badhiya - accha laga
Jolly Uncle
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