आओ बच्चो तुम्हे दिखाए....



नाटक कैसे बनता है. कैसे इसको तैयार किया जाता है. कौन तैयार करता है जैसे कई सवाल जहाँ कभी-कभी बच्चो के जेहन में दौड़ते है वही यही सवाल हमको भी सोने नहीं देते. यही करण है की नाटक के बारे में सीखना तो दूर बच्चे सही से जान भी नहीं पाते. आज के बच्चे सिर्फ और सिर्फ किताबी कीड़े बन कर रह गए है. यही करण है की हिसार के रंगकर्मियों ने बच्चो के दिल से नाटक, पर्दा और रंगमंच के प्रति डर निकालने के उद्देश्य से एक म्यूजियम बना कर जनता को समर्पित किया है. इसमें 6 साल से लेकर 16 साल तक के बच्चे वह सब कुछ जान पाएंगे जो एक नाटक या फिल्म देख कर उनके दिल में जिज्ञासा जागती है.
यह तो सभी जानते है की हिसार का रंगमंच बहुत पुराना है और हिसार ने बहुत से कलाकार इस देश को दिए है. इसके पीछे भी यह रंगमंच ही है जो एक बहुत लम्बे अरसे से कलाकारों की कर्मभूमि रहा है. ओपेरा नाम से बनाये गए इस म्यूजियम के बारे में बताते हुए निर्देशक गुलशन भूटानी ने कहा की विजिट टू ओपेरा में हमारा मकसद उन बच्चो में से झिझक और डर को दूर करना है जो यहाँ आयेंगे. साथ ही उन्होंने कहा की अगर किसी बच्चे को अपनी पढ़ाई के किसी विषय में कोई परेशानी है तो यहाँ उसकी परेशानी को प्ले के माध्यम से दूर किया जायेगा. ऐसा करने से ही बच्चे की प्रतिभा को तराशा जा सकता है.

एन.एस.डी. की छात्रा रही सुनीता तिवारी नागपाल ने बताया की एन.एस.डी के मंजे हुए कलाकार समय-समय पर अपने अनुभव और जानकारिय बच्चो के साथ सांझा करेंगे. ओपेरा थियेटर की जानकारी देते हुए डा. कश्यप ने बताया की इस तरह के विश्व में तीन थियेटर है. जिसमे से ओपेरा का नंबर तीसरा है जबकि एक डेनमार्क और दूसरा हालैंड में है. डा. कश्यप ने बताया की थियेटर को चार भागो में बांटा गया है जिससे बच्चो को सिखने में आसानी होगी. उन्होंने कहा की एक थियेटर लन्दन में बना था लेकिन वह आर्थिक संकट के चलते बंद हो गया. उन्होंने माना की भारत के रंगमंच की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है लेकिन वो किसी तरह इसको चला रहे है.


नशा है की उतरता ही नहीं


नशा भी नशा होता है. जब चढ़ता है तो ऐसा चढ़ता है की उतरने का नाम ही नहीं लेता. यह कभी नशे के आदि लोगो पर चढ़ता है तो कभी पहली बार नशा करने वालो पर. तो कभी-कभी भगवान् शिव के भक्तो पर भी नशा सिर चढ़ कर बोलता है. जबकि आम आदमी पर भी विभिन्न प्रकार का नशा समय-समय पर चढ़ता रहता है. फर्क मात्र इतना है की नशा कई प्रकार का होता है. कोई शराब का नशा करता है तो कोई गैरकानूनी प्रदार्थो का. तो कोई भांग का नशा करता है. जो आदमी की बात की गई है उसमे जिद, पैसे, रुतबा व् लालच का नशा शामिल है. लेकिन इनमे से कोई भी नशा ऐसा नहीं है जिसका असर तीन-चार दिन तक रहे. नशा कुछ समय तक तो अपना असर दिखता है, जिस कारण इंसान लोटपोट नजर आता है. लेकिन उसके बाद वह मदहोश होकर सो जाता है.
अब देखो ना स्टार प्लस पर आज कल एक धारावाहिक आ रहा है ये रिश्ता क्या कहलाता है. इस नाटक की मुख्य भूमिका में नैतिक और अकसरा को


अंग्रेजी से हिन्दी में लिखिए

तड़का मार के

* महिलायें गायब
तीन दिन तक लगातार हुई रैलियों को तीन-तीन महिला नेत्रियों ने संबोधित किया. वोट की खातिर जहाँ आम जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं छोड़ा वहीँ कमी रही तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों की.

* शायद जनता बेवकूफ है
यह विडम्बना ही है की कोई किसी को भ्रष्ट बता रह है तो कोई दूसरे को भ्रष्टाचार का जनक. कोई अपने को पाक-साफ़ बता रहे है तो कोई कांग्रेस शासन को कुशासन ...

* जिंदगी के कुछ अच्छे पल
चुनाव की आड़ में जनता शुकून से सांस ले पा रही है. वो जनता जो बीते कुछ समय में नगर हुई चोरी, हत्याएं, हत्या प्रयास, गोलीबारी और तोड़फोड़ से सहमी हुई थी.

* अन्ना की क्लास में झूठों का जमावाडा
आज कल हर तरफ एक ही शोर सुनाई दे रहा है, हर कोई यही कह रहा है की मैं अन्ना के साथ हूँ या फिर मैं ही अन्ना हूँ. गलत, झूठ बोल रहे है सभी.

* अगड़म-तिगड़म... देख तमाशा...
भारत देश तमाशबीनों का देश है. जनता अन्ना के साथ इसलिए जुड़ी, क्योंकि उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आन्दोलन एक बहुत बड़ा तमाशा नजर आया.
a
 

gooftgu : latest news headlines, hindi news, india news, news in hindi Copyright © 2010 LKart Theme is Designed by Lasantha