नया वर्ष - नए सपने - नई दुआए


हर वर्ष की भाँती इस वर्ष भी नया साल नए आगाज के साथ हमारे सामने है. लेकिन गुफ्तगू का विषय यह है की बीता वर्ष सभी के लिए कैसा रहा. कोई कहेगा की ठीक है यार जैसा था बीत गया तो कोई कहेगा की पता ही नहीं चला की एक साल कैसे बीत गया. सब अपना-अपना तर्क देने के बाद फिर से अपने काम में जुट जाते है. लेकिन आओ आज नई दुआओं के साथ नववर्ष में नए सपने संजोते हुए हम कामना करे की जो कुछ बीते वर्ष में हमको झेलना पड़ा, नए साल में हमको उससे मुक्ति मिले और जो हमको अच्छा मिला उसमे वृद्धि हो. दिली तमन्ना है की बीता साल सभी के लिए सुखद रहा हो. इतना जरुर है की बीते वर्ष में अनेक लेखे-जोखे और घटनाक्रम समय-समय पर समाचार पत्र-पत्रिकाओ की सुर्खिया बने रहे.
जहाँ पूरे साल एक के बाद एक भ्रष्टाचार के खुलासों ने आम जनता के नाक में दम किये रखा वहीँ भारत का क्रिकेट विश्वकप जीतना दिल को सुकून देने वाला था. देश में बढती महंगाई के साथ-साथ पैट्रोल के दामों ने जहाँ आग में घी डालने का काम किया वहीँ दुनिया में आई आर्थिक मंदी ने लोगों की धड़कने तेज किये रखी. इन सबके साथ-साथ वर्ष भर राजनीति भी खूब हावी रही. कभी कलमाड़ी, कभी ए राजा तो कभी कनिमोड़ी के मुद्दे पर राजनीति में घमासान मचा रहा तो काले धन पर बाबा रामदेव, भ्रष्टाचार पर स्वामी अग्निवेश तो लोकपाल बिल पर अन्ना हजारे के अनशन ने सरकार की नाक में दम किये रखा. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए चुनावों के कारण भी राजनीति में अस्थिरता का माहौल रहा.
हिसार भी बीते वर्ष के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाने में कामयाब रहा. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की मृत्यु जहाँ दुखद रही वहीँ कुलदीप बिश्नोई का भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे गया. इतना ही नहीं हिसार लोकसभा उपचुनाव में अन्ना हजारे का कांग्रेस के खिलाफ प्रचार हिसार के नाम को बुलंदियों पर ले गया वहीँ इस सीट को जीतने के लिए मुख्यमंत्री हुड्डा और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के सभी साम-दाम-दंड-भेद को धत्ता बताते हुए कुलदीप बिश्नोई यह चुनाव जीतने में सफल हुए. जीत का जश्न समाप्त होता की आदमपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई विजयी हुई. उधर जनता गैस और बिजली के लिए त्राहि-त्राहि करती रही.
अब बहुत हुआ, आओ दुआ करे
जो कुछ मैंने लिखा ऐसा नहीं है की आप पहली बार पढ़ रहे है. मेरा तो उद्देश्य ही यही है की मैं समाचारों के दूसरे पहलू को आपके सामने रख सकूँ. लेकिन जरुरत है तो सिर्फ जन जागरण की, सोचने की और सोच कर विचार करने की क्या इन हालातों में हम चैन की सांस ले सकते है. क्या हमारा देश आगे बढ़ सकता है. अगर नहीं तो आइये सब मिल कर नववर्ष में दुआ करे की महंगाई, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता व् राजनीति में परिवारवाद जड़ से ख़त्म हो. आने वाला साल राजनीति से मुक्त वर्ष हो और देश में लोकपाल बिल आये जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके ताकि हर इंसान का चेहरा खिला-खिला रहे.

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1 आपकी गुफ्तगू:

Rajesh Kumari said...

bahut achcha aalekh kuch hi shabdon me poore saal ka lekha jokha sarahniye lekh.hum sabhi ki yahi ichcha hai ki naya varsh bhrashtachar mukt varsh kahlaaye.humara satat prayaas jaroor rang laayega.

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